2 यूहन्ना 1:1 बाइबल पद की व्याख्या
2 यूहन्ना 1:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
मुझ प्राचीन की ओर से उस चुनी हुई महिला और उसके बच्चों के नाम जिनसे मैं सच्चा प्रेम रखता हूँ, और केवल मैं ही नहीं, वरन् वह सब भी प्रेम रखते हैं, जो सच्चाई को जानते हैं।
2 यूहन्ना 1:1 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
2 यूहन्ना 1:1 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 तीमुथियुस 2:4 (HINIRV) »
जो यह चाहता है, कि सब मनुष्यों का उद्धार हो; और वे सत्य को भली-भाँति पहचान लें। (यहे. 18:23)

1 यूहन्ना 3:18 (HINIRV) »
हे मेरे प्रिय बालकों, हम वचन और जीभ ही से नहीं, पर काम और सत्य के द्वारा भी प्रेम करें।

2 यूहन्ना 1:1 का तात्पर्य और संदर्भ
यह मानवीय जीवन और विश्वास की वास्तविक संबंधीता की बात है। इस पत्र के लेखक स्वयं “प्राचीन” के रूप में आत्म-परिचय कराते हैं—यही शब्द पुराने समय के विश्वसनीय प्रेरितों के सामुदायिक प्रेम और जिम्मेदारी का संकेत देता है। चुनी हुई महिला और उसके बच्चों के लिए प्रेम, कर्तव्यपूर्ण सत्य के साथ गहरे संबंध को दर्शाता है: सचाई से अटूट प्रेम वह धारा है जिसमें विश्वासियों के बीच एकता और ईमानदारी रहती है।
मुख्य अर्थ
पत्रकार कहते हैं कि लेखक मुझ प्राचीन द्वारा चुनी हुई महिला और उसके बच्चों से सच पहुंचती है, और वह सच जो सत्य को जानने वाले हर व्यक्ति में है, वह भी प्रेम रखते हैं। यह प्रेम विश्वास के साथ मेल खाता है—सत्य केवल head knowledge नहीं है, बल्कि जीवन के हर पहलू में व्यवहार और प्रेम की गतिविधि में प्रकट होता है।
दो-तीन प्रमुख विषय
अन्य संदर्भ (Cross-references) और उनका संक्षिप्त अर्थ
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि प्रेम और सत्य एक दूसरे के सच्चे साथी हैं; विश्वासियों को सत्य के मार्ग पर प्रेम संगत बनाए रखना चाहिए।
व्यावहारिक विचार
संक्षेप सार
2 यूहन्ना 1:1 विशिष्टता के साथ यह बताता है कि सच-प्रेम वही है जो सत्य को जीवन से जोड़े रखे। लेखक “प्राचीन” की भूमिका में विश्वास और प्रेम की एकता को दोहराते हैं: सही विश्वास वही है जो प्रेम से परिलक्षित हो और जो सत्य को जानने वालों के बीच प्रेम-बंध बनाए रखे।
टिप्पणी के लिए उद्धरण (सार): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणियाँ में से यदि पड़ी हों तो दर्ज हैं, परन्तु यहां संक्षिप्त रूप में उनका बिना पूर्ण उद्धरण एकीकृत विचार शामिल किया गया है।