Old Testament
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होशे 1:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यहूदा के राजा उज्जियाह, योताम, आहाज, और हिजकिय्याह के दिनों में और इस्राएल के राजा योआश के पुत्र यारोबाम के दिनों में, यहोवा का वचन बेरी के पुत्र होशे* के पास पहुँचा।
होशे 1:1 पद-दर-पद बाइबल टीका
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होशे 1:1 समानांतर पद और संबंधित वचन
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रोमियों 9:25 (HINIRV) »
जैसा वह होशे की पुस्तक में भी कहता है, “जो मेरी प्रजा न थी, उन्हें मैं अपनी प्रजा कहूँगा, और जो प्रिया न थी, उसे प्रिया कहूँगा; (होशे 2:23)

मीका 1:1 (HINIRV) »
यहोवा का वचन, जो यहूदा के राजा योताम, आहाज और हिजकिय्याह के दिनों में मीका मोरेशेती को पहुँचा, जिसको उसने सामरिया और यरूशलेम के विषय में पाया।

यशायाह 1:1 (HINIRV) »
आमोत्स के पुत्र यशायाह का दर्शन, जिसको उसने यहूदा और यरूशलेम के विषय में उज्जियाह, योताम, आहाज, और हिजकिय्याह नामक यहूदा के राजाओं के दिनों में पाया।
होशे 1:1 पर दृश्टि: संदर्भ और प्रवेश
होशे के उद्धरण की यह पंक्ति किन परिस्थितियों में आई, इसका संकेत यह है कि यह भविष्यवाणी एक विशिष्ट ऐतिहासिक कालखंड से जुड़ी है। यहूदा राज्य में राजा उज्जियाह, फिर योताम, आहाज और हिजकिय्याह, तथा उत्तरे के इस्राइल में राजा योआश के पुत्र यारोबाम के कालों की बात करता है। यहोवा का वचन बेरी के पुत्र होशे के पास पहुँचा, जिसका मतलब है कि यह संदेश एक विशिष्ट, चुनौतीपूर्ण समय में ईश्वर ने चुना-ताया नया दूत भेजा ताकि इस्राइल और यहूदाह के शत्रु-आचरण के बीच सही दिशा दिखे।
मुख्य अर्थ और ध्येय
इस पद का केंद्रीय संदेश यह है कि ईश्वर अपने चुने हुए लोगों की निष्ठा और उनके विश्वासघात के बीच एक स्पष्ट सम्बोधन देता है। होशे की यह शपथ-प्राप्ति यह दर्शाती है कि परमेश्वर इतिहास के कठोर चरणों के बीच भी अपने उद्देश्य को आगे बढ़ाते हैं—न केवल न्याय के बारे में बल्कि दया और परिवर्तन के लिए भी बुलावा देते हैं।
दो-तीन मुख्य विषय
संबद्ध पंक्तियाँ (क्रॉस-रेफरेंसेज)
याद दिलाने वाले कुछ संदर्भ जो इस संदर्भ से जुड़ते हैं:
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि होशे का संदेश केवल आक्रमण-आह्वान नहीं, बल्कि ईश्वर की अनुकम्पा से पुनर्स्थापना का पथ भी है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
आज के पाठकों के लिए यह याद दिलाता है कि आध्यात्मिक जीवन में टिके रहने के लिए वरिष्ठ नेताओं के काल-खंड चाहे जैसे भी रहे हों, ईश्वर की आवाज स्थिर रहती है। हृदय को आकर्षित करने वाले प्रभु के निमंत्रणों पर ध्यान दें: अपने-अपने जीवन के भीतर विश्वासघात-भाव से जन्म लेने वाले ध्वंस के बजाय दया, सुधार और निष्ठा की ओर कदम उठाएं। परिवार, समुदाय और चर्च-जीवन में ईमानदारी, पवित्रता और प्रेम के मूल्यों को पुनः स्थापित करें।
संयुक्त सारांश
होशे 1:1 बताता है कि प्रभु के वचन एक ऐतिहासिक काल के भीतर आया, जब यहूदा और ישראל के राजवंशों में निष्ठा का संकट था। यह संदेश स्वागत है—यानी परमेश्वर अपने लोग भटकते समय भी बुलाते हैं, ताकि नयी राह में लौटकर उनके साथ प्रेम-बंध स्थापित हो सके।