Old Testament
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होशे 13:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
जब एप्रैम बोलता था, तब लोग काँपते थे; और वह इस्राएल में बड़ा था; परन्तु जब वह बाल के कारण दोषी हो गया, तब वह मर गया।
होशे 13:1 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
होशे 13:1 समानांतर पद और संबंधित वचन
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होशे 11:2 (HINIRV) »
परन्तु जितना वे उनको बुलाते थे, उतना ही वे भागे जाते थे; वे बाल देवताओं के लिये बलिदान करते, और खुदी हुई मूरतों के लिये धूप जलाते गए।

उत्पत्ति 2:17 (HINIRV) »
पर भले या बुरे के ज्ञान का जो वृक्ष है, उसका फल तू कभी न खाना: क्योंकि जिस दिन तू उसका फल खाएगा उसी दिन अवश्य मर जाएगा।”

गिनती 13:16 (HINIRV) »
जिन पुरुषों को मूसा ने देश का भेद लेने के लिये भेजा था उनके नाम ये ही हैं। और नून के पुत्र होशे का नाम मूसा ने यहोशू रखा।
होशे 13:1 पर टिप्पणी — इसका मूल आशय क्या है?
इस पद का तात्पर्य है कि इस्राएल का राजा-pride और अहंकार के साथ सम्मान पाता था, और एप्रैम एक ताकत का प्रतीक बन गया था; पर असल में बाहरी गौरव भीतर कमजोरी और पतन का कारण बना। जब वे बाल के कारण दोषी ठहराए गए, तब उनका शासन और प्रतिष्ठा क्षीण हो गया, और वे मर गए। यह संदेश परमेश्वर के न्याय और उसकी दया के संतुलन को दर्शाता है: शक्ति और महानता सिर्फ बाहरी लक्षणों से नहीं, बल्कि आंतरिक समर्पण और विश्वासी जीवन से मापा जाता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
होशे की किताब के समय इस्राएल विभाजन के बाद के राजनीतिक और धार्मिक संकट को दर्शाती है। एप्रैम (ईजराइल के उत्तर राज्यों का प्रतीक) अपनी शक्ति और राजनीतिक गौरव से आत्म-विश्वास में था, परन्तु उसकी आस्था में बिछोह और पाप का प्रभाव दिखा। यहाँ बाल के कारण दोषी ठहरना गम्भीर व्यंग्य है: बाल—यानी छोटे-छोटे, सांसारिक लाभ—परकृत होकर भी नैतिक गिरावट का कारण बनते हैं। इस वाक्य में एक महान राजा के रूप में एप्रैम की स्थिति को देखते हैं, जो बाद में पराभव को प्राप्त होता है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
अन्वेषणीय टिप्पणियाँ (सार-संयोजन)
यह अंश हमें स्मरण कराता है कि महानता और परमेश्वर के लिएสัตย์-निष्ठा एक साथ चलनी चाहिए। यदि जीवन के प्रमुख हिस्से—राजसी सम्मान, राजसी सुरक्षा—पर विश्वास खो दे, तो परिणाम विनाशकारी हो सकता है। राजा एप्रैम की स्थिति भी एक चेतावनी है कि बाह्य सफलता जीवन की आंतरिक पवित्रता से अधिक महत्वपूर्ण नहीं है।
2–3 संक्षिप्त निर्गम बिंदु (मुख्य विचार)
अन्य प्रासंगिक उद्धरण (क्रॉस-रेफरेंसेस)
कृपया ध्यान दें कि प्रत्येक क्रॉस-रेफरेंस में पूर्ण पदों का पाठ नहीं दिया गया है। नीचे छोटे सारांश दिए जा रहे हैं:
इन संदर्भों में एक सामान्य तत्त्व है: बाहरी रीतियों से आगे बढ़कर ईश्वर के साथ सच्चे मन से संबंध बनाए रखना आवश्यक है।
व्यावहारिक take-away
हम अपने समय-सीमा में भी देखते हैं कि सफलता चाहे कैसी भी हो, यदि हमारा दिल परमेश्वर से विरुद्ध हो, तो उसे खो देते हैं। अपने जीवन के उद्देश्यों में पवित्रता, आस्था और दया को प्राथमिकता दें। कठिनाइयों में भी ईश्वर की शिक्षा को समझने की कोशिश करें, ताकि वास्तविक शक्ति और सुरक्षा उन्हीं के साथ बनी रहे।
कथा-समाप्ति विचार
यह पाठ हमें एक संतुलित जीवन के लिए प्रेरित करता है: प्रसिद्धि भले ही साथ हो, पर भीतर की संकल्पना और ईश्वर-पालन ही वास्तविक मूल्य हैं।
नोट: यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के किसी उद्धरण के सटीक पाठ-रेफरेंस चाहते हैं, बताइए—मैं उपयुक्त उद्धरणों को उद्धृत कर दूँगा और उनके संदेश को समेकित रूप में प्रस्तुत कर दूँगा।