Old Testament
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होशे 13:16 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
सामरिया दोषी ठहरेगा, क्योंकि उसने अपने परमेश्वर से बलवा किया है; वे तलवार से मारे जाएँगे, उनके बच्चे पटके जाएँगे, और उनकी गर्भवती स्त्रियाँ चीर डाली जाएँगी।
होशे 13:16 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
होशे 13:16 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 राजाओं 8:12 (HINIRV) »
तब हजाएल ने पूछा, “मेरा प्रभु क्यों रोता है?” उसने उत्तर दिया, “इसलिए कि मुझे मालूम है कि तू इस्राएलियों पर क्या-क्या उपद्रव करेगा; उनके गढ़वाले नगरों को तू फूँक देगा; उनके जवानों को तू तलवार से घात करेगा, उनके बाल-बच्चों को तू पटक देगा, और उनकी गर्भवती स्त्रियों को तू चीर डालेगा।”

2 राजाओं 15:16 (HINIRV) »
तब मनहेम ने तिर्सा से जाकर, सब निवासियों और आस-पास के देश समेत तिप्सह को इस कारण मार लिया, कि तिप्सहियों ने उसके लिये फाटक न खोले थे, इस कारण उसने उन्हें मार दिया, और उसमें जितनी गर्भवती स्त्रियाँ थीं, उन सभी को चीर डाला।

यशायाह 13:16 (HINIRV) »
उनके बाल-बच्चे उनके सामने पटक दिए जाएँगे; और उनके घर लूटे जाएँगे, और उनकी स्त्रियाँ भ्रष्ट की जाएँगी।
होशे 13:16 पर निहित प्रमुख बोध
इस पद में यहूदियों के लिए चेतावनी है कि सामरी दोषी ठहरेगी क्योंकि उसने अपने परमेश्वर के विरुद्ध बलवा किया। परिणामस्वरूप उनकी सेना नष्ट होगी, बच्चे सुरक्षित नहीं रहेंगे, और गर्भवती स्त्रियाँ भी चिर डाली जाएँगी। यह भी संकेत है कि चिथड़े-सी स्थितियों में न्याय का समय आ गया है, किन्तु परमेश्वर की सच्ची करुणा और उसकी प्रतिज्ञाओं के साथ यह चेतावनी एक महत्वपूर्ण पाठ प्रस्तुत करती है: परमेश्वर के साथ उसकी निष्ठा टूटना सामाजिक-नैतिक विनाश का कारण बनता है।
साहित्यिक संदर्भ (संदर्भ-विमर्श)
होशे की पुस्तक में यह संदेश सामरी के सामाजिक-धार्मिक पतन की तस्वीर है। यहूदा-इस्राइल के इतिहास में सामरी नगर की देह-हिंसा और धार्मिक भ्रष्टाचार के कारण आने वाला न्याय का संकट है। यह एक तीखी, कसौटी-परेख में लिखी गई आह्वान-गीत है जिसमें चेतावनी के साथ दयालु पुनरुत्थान की आशा भी छुपी है।
देवत्वीय महत्व (थियोलॉजिकल सत्व)
धर्म का टूटना, विशेषकर “अपने परमेश्वर से बलवा” करना, ईश्वर के प्रति अविश्वास और धार्मिक असमानता की चरम अवस्था है। होशे यह दिखाते हैं कि ईश्वर के विरुद्ध बलवा का परिणाम सामाजिक-विध्वंस, युद्ध और परिवार-विनाश के रूप में सामने आता है। परन्तु साथ ही पवित्रता और न्याय के उसके नियम कभी-भी पूरी तरह से हटाए नहीं जाते; वे समुदाय को अपने अंतःस्थ जीवन के पुनर्निर्माण के लिए सचेत करते हैं।
पवित्रशास्त्र के साथ conexiones
इन क्रॉस-रेफरेंसों में मिलता-जुलता तत्त्व है—आत्म-नियम का उल्लंघन सामाजिक उत्पात का कारण बनता है और परमेश्वर का न्याय उसे रोकने के लिए आता है, परंतु वहीं से सुधार के रास्ते की दिशा भी मिलती है।
जीवन-पयोगी प्रश्न (Reflection questions)
संक्षिप्त निष्कर्ष
होशे 13:16 चौकन्ने संदेश के साथ आता है—धर्म-निष्ठा के टूटने पर सामाजिक-विनाश और दुःख नजदीक आ जाते हैं। परन्तु यह लेखन गरीब, मज़लूमों की ओर संवेदना और समाज-नियंता की ओर न्याय के लिए बुलाव देता है। ईश्वर के साथ निष्ठा बनाए रखना ही सच्ची जीवन-तरह है।
आधारवाक्यों के उद्धरण (केवल सार):
यह अनुभाग पाठ के अनुरूप है, परन्तु सीधे उद्धृत नहीं। नीचे दिये गये पुराने commentators के विचारों के छोटे टुकड़ों के स्थान पर, उनकी समकालीन समझ के अनुसार प्रेरणा मिलती है—
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke की सार्वजनिक-डायरे के भीतर संक्षेपित भावनात्मक-आह्वानें—धर्म-निष्ठा का-पूरक, दंड-न्याय का संयोजन और करुणा का पुनःउद्धार का मार्ग। अगर किसी जगह उनके छोटे शब्द सीधे उद्धृत होते, तो वे इस प्रकार के हैं: “धर्मैकल्पित विश्वास का टूटना—कई बार सामाजिक-विनाश का कारण बनता है।”
यथार्थ cross-reference (संक्षेप)
1) होशे 6:6 — धर्म-निष्ठा का आह्वान “दिल में पिता के प्रति प्रेम”। इसका उल्लेख यहाँ है ताकि पाठक समझें कि बाहरी धर्म-प्रथाओं के बजाय दिल की निष्ठा ही असली धर्म है।
2) यिर्मयाह 7:4-7 — शहर-धर्म के बाहरी प्रदर्शन से अधिक आंतरिक विश्वास की आवश्यकता पर बल।
3) इस्राइल 12:14-15 — पवित्र जीवन के बिना वह शांति नहीं पाता; यदि नहीं, तो दंड और शांति का खात्मा होता है।