Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीहोशे 13:14 बाइबल पद की व्याख्या
होशे 13:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
मैं उसको अधोलोक के वश से छुड़ा लूँगा* और मृत्यु से उसको छुटकारा दूँगा। हे मृत्यु, तेरी मारने की शक्ति कहाँ रही? हे अधोलोक, तेरी नाश करने की शक्ति कहाँ रही? मैं फिर कभी नहीं पछताऊँगा। (1 कुरि. 15:55, प्रका. 6:8)
होशे 13:14 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
होशे 13:14 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

यशायाह 25:8 (HINIRV) »
वह मृत्यु को सदा के लिये नाश करेगा, और प्रभु यहोवा सभी के मुख पर से आँसू पोंछ डालेगा, और अपनी प्रजा की नामधराई सारी पृथ्वी पर से दूर करेगा; क्योंकि यहोवा ने ऐसा कहा है। (1 कुरि. 15:54, प्रका. 7:17, प्रका. 21:4)

प्रकाशितवाक्य 21:4 (HINIRV) »
और वह उनकी आँखों से सब आँसू पोंछ डालेगा*; और इसके बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहली बातें जाती रहीं।” (यशा. 25:8)

यशायाह 26:19 (HINIRV) »
तेरे मरे हुए लोग जीवित होंगे, मुर्दे उठ खड़े होंगे। हे मिट्टी में बसनेवालो, जागकर जयजयकार करो! क्योंकि तेरी ओस ज्योति से उत्पन्न होती है, और पृथ्वी मुर्दों को लौटा देगी*।
होशे 13:14 पर एक समझदार पाठ-आलेख
होशे की पुस्तक के इस अत्यंत उकसाने वाले भाग में परमेश्वर के विरह-घात के बाद भी उसकी करुणा की आस है। यहाँ बहती हुई स्मृति बताती है कि राज्य-शासन नहीं, बल्कि मृत्यु के हाथों से मुक्त करना ही 하나님 की इच्छा है। इस आयत का संदेश दुख और विपत्ति के बीच भी जीवन की आशा को जिंदा रखने का है।
पद का संदर्भ और पाठ-स्थिति
यह होशे के उद्धारक प्रेम की गहराई को दर्शाने वाला भाग है। होशे ने इस समय इस्राएल के बीच कुछ दर्दनाक समय देखे—उकसाने वाले बर्ताव और गड़बड़ आस्थाओं के दौर। पर परमेश्वर का संकेत है कि वह मृत्यु और अधोलोक के खिलाफ विजय की घोषणा कर रहा है, ताकि दुष्ट शासन का अन्त हो और उसकी अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार उद्धार का मार्ग खुले।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
अनुसंग और तुलनात्मक पाठ
इस आयत के साथ 1 कुरिन्थियों 15:55 में मरण-जीवन पर विजय का उल्लेख है, जो कहते हैं कि “हे मृत्यु, तेरी विजय कहाँ है? हे मृत्यु, तेरी काँट कहाँ?” यह दोनों पाठ एक-दूसरे को उजागर करते हैं कि मृत्यु का चक्र केवल परमेश्वर के उद्धारकारी उद्देश्य में सीमित है और संतोषजनक जीत उसकी ओर से आती है। इसके अलावा प्रकाशितवाक्य में शुद्ध विजयी आकाशीय राज्य और मृत्यु के अन्तिम विनाश का चित्रण भी समाहित है, जिसने भविष्य में सत्य को पूरा किया जाएगा।
लागू करने योग्य शिक्षा
- प्रभावित परिस्थिति में भी ईश्वर की इच्छा उद्धार और पुनःस्थापना की है, इसलिए भय से नहीं बल्कि विश्वास से बंधे रहें।
- मृत्यु और अधोलोक के प्रतीकात्मक डर से डर कर नहीं, बल्कि परमेश्वर के प्रेम और साधन-योजनाओं पर टिके रहें।
- जीवन के मार्ग पर लौटना और पूर्वकथन के अनुसार अपने पथ की समीक्षा करना—ताकि पछतावे की स्थिति बार-बार न आये।
आंतरिक पाठ-समझ
हम हर दिन जो भी आते-तौर पर संकटों का सामना करते हैं, उनमें ईश्वर की उद्धार की पथ दिखाई देती है। यह आयत यह कहती है कि उद्धार का मार्ग मृत्यु की शक्तियों के विरुद्ध है और यह वास्तविक इतिहास में पूरी तरह से प्रमाणित हुआ है। ब्रह्मांड के सभी दमन और गुमनामी के बंधनों से भी परमेश्वर के प्रेम, दया, और सामर्थ्य से ही मुक्ति मिलती है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षिप्त, स्पष्टीकरण के साथ)
नोट: नीचे उद्धरणों के लिए, मैथ्यू हेनरी, एलबर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के सार्वजनिक डोमेन टिप्पणीकारों के साक्ष्यों से संक्षेपित विचार सम्मिलित हैं; इनमें उनके मौलिक वाक्यों के संक्षिप्त रूप मिलते हैं।
सार-सार
होशे 13:14 का संदेश गहराई से यह बताता है कि परमेश्वर उद्धार के प्रति प्रतिबद्ध है, मृत्यु और अधोलोक की शक्तियों पर विजय की घोषणा करके अपने लोगों की मुक्ति चाहता है। यह हमें निराशाओं के बीच भी आशा, क्रूरताओं के बीच भी विश्वास और अंततः परमेश्वर के प्रेम-युक्तीय योजना पर स्थिर रहने का साहस देता है।
उद्धार की यह स्मृति न केवल अतीत के लिए है, बल्कि हर दिन के जीवन के लिए है—जहाँ हम अपने आप से, हमारे प्रियजनों से, और संसार से निकट आकर भी उसे अपनाते हैं।
संक्षेप में, यह आयत यह कहती है: परमेश्वर मुक्त कर देगा; मौत की शक्ति कहाँ रही; अधोलोक की नाश करने की शक्ति कहाँ रही; मैं फिर कभी नहीं पछताऊँगा।