यशायाह 25:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

वह मृत्यु को सदा के लिये नाश करेगा, और प्रभु यहोवा सभी के मुख पर से आँसू पोंछ डालेगा, और अपनी प्रजा की नामधराई सारी पृथ्वी पर से दूर करेगा; क्योंकि यहोवा ने ऐसा कहा है। (1 कुरि. 15:54, प्रका. 7:17, प्रका. 21:4)

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यशायाह 25:8 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 25:8 — तत्काल संदर्भ और आध्यात्मिक अर्थ

इस वचन का स्पष्ट संदर्भ वही है जो परमेश्वर के आगे विश्व के अंतिम चिन्ह और उद्धार का प्रतीक बन चुका है। यशायाह एक पवित्र भविष्य-वाणी देता है जिसमें परमेश्वर दयालुता, विजय और अंतिम शांति की स्थापना की पुष्टि करते हैं। यहां मृत्यु की परास्ति, आँसुओं का अंत और जातियों के बीच की दूरी को मिटाने की योजना एक साथ दी जाती है।

ईश्वर का पुर्ननिर्माण और विश्वास की दृष्टि

यह पद यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर अपनी प्रजा के लिए अंतिम विजय सुनिश्चित करते हैं: मृत्यु को सदा के लिये हटाने, tears को पोंछने और पृथ्वी पर सभी के बीच से नाम-धारण विवादों को दूर करने का कार्य। यह केवल एक भावनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि एक व्यापक नवीनीकरण का आह्वान है जिसमें तेरे हाथों से हर दर्द और आँसू एक दिन समाप्त होंगे।

महत्त्वपूर्ण शब्दों और imagery का स्पष्टीकरण

  • — मृत्यु की सत्ता पर परमेश्वर की अन्तिम विजय। यह जीवन और मृत्यु के मूल कारणों के विरुद्ध विजय का संकेत है, जो एक दिन पूरी सृष्टि में लागू होगी।
  • — यह शब्द चित्र है एक दुख-हृदय परिवर्तन का, जहाँ उस बहुमुखी क्षति के कारण और वेदना का अंत हो जाएगा; परमेश्वर स्वयं घावों को मिटाने वाला चिकित्सक है।
  • — यह दावेदारी प्रेम, बंधुत्व, और एक ही समुदाय के रूप में सभी जाती-जातियों को एक करता है; प्रत्येक व्यक्ति भगवान के नाम से पहचाना जाएगा, बिना विभेद के।

संबद्ध पाठ — संदर्भित शिक्षाएँ

1) 1 कुरिन्थियों 15:54 — मरण के परास्त होने की अंतिम स्थिति; यह विश्वास में मूर्त आश्वासन देता है कि मृत्यु पर परमेश्वर की विजय स्थिर है।

2) प्रकाशितियों 7:17 — वह कौन है जो इनाम देता है; संतोष और शांति का कारण बनता है जिससे हर आंसू मिट जाते हैं।

3) प्रकाशितियाँ 21:4 — भविष्य के नए पृथ्वी की दृष्टि जहाँ यातना नहीं, दुःख नहीं।

पूर्व-पश्चिम के विचार— खान-पान उद्धरण (ध्यान दें)

यह भाग Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणी-उद्धरणों को संक्षेप में एकीकृत किया गया है, ताकि पाठक को एक समग्र दृष्टिकोण मिले।

— Henry ने कहा कि परमेश्वर की जयंत के पाठ में मृत्यु का अंत और आंसुओं का मिटना ईश्वर के निर्वाचित राज्य की पहचान है; जीवन की परिपूर्णता उसी से शुरू होगी।

— Barnes सूचित करते हैं कि यह उद्धार एक सार्वभौमिक और स्थायी परिवर्तन है, जहां परमेश्वर अपने लोगों के बीच एक पूर्ण सामंजस्य और संतोष स्थापित करते हैं।

— Clarke बताते हैं कि यह शरीर, आत्मा और समुदाय के एक उन्नत समन्वय का दृश्य है—जहाँ सभी प्रजा परमेश्वर के नाम से एक हों और पृथ्वी पर उसका राज्य स्थापित हो।

आज के जीवन में अनुप्रयोग

  • दुख-यातनाओं के बीच आशा बनाए रखें: परमेश्वर मृत्यु के डर को मिटाने और आंसुओं को पोंछने का वादा करते हैं; यह हमारी कष्टभरी परिस्थितियों में स्थिरता देता है।
  • समुदाय में एकता और समान सम्मान के मूल्य को बढ़ावा दें: वह सबके लिए एक ही नाम से पहचाने जाने का आह्वान है—जाति, वर्ग, या पृष्ठभूमि के भेदभाव से मुक्त।
  • प्रतीक्षित उद्धार की दृष्टि बनाए रखें: वर्तमान पीड़ा के बावजूद यह विश्वास रखें कि एक दिन परमेश्वर की नई रचना सपनों के अनुरूप पूरी होगी।

संक्षेप निष्कर्ष

यशायाह 25:8 हमें एक सुसंस्कृत आशा दिखाता है— मृत्यु के लम्बे शासन को समाप्त कर, परमेश्वर के राज्य में दुख-आँसू का अंत होता है और सभी जातियाँ एक परमेश्वर के उद्धारक के नीचे एक होते हैं। यह वचन भविष्य की यह कहानी नहीं, बल्कि वर्तमान विश्वास के लिए एक प्रेरणा है कि हम कठिन समय में भी ईश्वर की पूर्ण योजना पर भरोसा करें।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 25:8 समानांतर पद और संबंधित वचन

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प्रकाशितवाक्य 21:4 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
प्रकाशितवाक्य 21:4 (HINIRV) »
और वह उनकी आँखों से सब आँसू पोंछ डालेगा*; और इसके बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहली बातें जाती रहीं।” (यशा. 25:8)

1 कुरिन्थियों 15:54 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
1 कुरिन्थियों 15:54 (HINIRV) »
और जब यह नाशवान अविनाश को पहन लेगा, और यह मरनहार अमरता को पहन लेगा, तब वह वचन जो लिखा है, पूरा हो जाएगा, “जय ने मृत्यु को निगल लिया। (यशा. 25:8)

प्रकाशितवाक्य 7:17 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
प्रकाशितवाक्य 7:17 (HINIRV) »
क्योंकि मेम्‍ना जो सिंहासन के बीच में है, उनकी रखवाली करेगा; और उन्हें जीवनरूपी जल के सोतों के पास ले जाया करेगा, और परमेश्‍वर उनकी आँखों से सब आँसू पोंछ डालेगा।” (भज. 23:1, भज. 23:2, यशा. 25:8)

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