यशायाह 25:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

वह उसमें अपने हाथ इस प्रकार फैलाएगा, जैसे कोई तैरते हुए फैलाए; परन्तु वह उसके गर्व को तोड़ेगा; और उसकी चतुराई को निष्फल कर देगा।

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यशायाह 25:11 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 25:11 का स्पष्ट अर्थ

यह पद बताता है कि अज़ाम की पुष्टि करते हुए परमेश्वर अपने दुश्मनों के बल को उसी के भीतर नष्ट कर देगा; जैसे कोई व्यक्ति तैरते हुए हाथ फैलाकर पानी को पकड़ने की कोशिश करता है, पर उसकी पकड़ कमजोर पड़ जाती है, उसी प्रकार विपत्ति की ताकत उसके गर्व को तोड़ देगी और उसकी चतुराई निष्फल हो जाएगी।

संदर्भ परिचय

यशायाह के ग्रंथ में ईश्वर के उद्धार और राष्ट्रों पर शासन का संकेत बार-बार मिलता है। 25 अध्याय में परमेश्वर के सामर्थ्यपूर्ण फूट-फूटकर उद्धार, भक्षक pitan आदि के विरुद्ध विजय और लोक-जातियों के आगमन का चित्रण है। यह पंक्तियाँ संकेत देती हैं कि भौतिक शक्ति के प्रदर्शन से नहीं, बल्कि ईश्वर की योजना से ही शांति और सुरक्षा मिलती है।

व्याख्यात्मक देखरेख

- “उसे अपने हाथ इस प्रकार फैलाएगा”—यह-zero-sum जैसा दृढ़ नियंत्रण नहीं, बल्कि अभिमानित शत्रु के विरुद्ध ईश्वर की दृढ़ सीमा और नियंत्रण दर्शाता है।

- “परन्तु वह उसके गर्व को तोड़ेगा”—गर्व का अंत, क्योंकि उद्धारकर्ता की कार्य-पद्धति में नम्रता और न्याय सम्मिलित है; गर्व तिल-तिलकर टूटेगा, और उसकी योजना अवश्य असफल होगी।

- “और उसकी चतुराई को निष्फल कर देगा”—युद्ध-योजना, चालाकी या कूटनीति भी अंततः निष्फल हो जाएगी, क्योंकि परमेश्वर का मार्ग स्थिर और मजबूत है।

अन्वय-नोट्स (Interpretive observations)

  • इसी अध्याय में परमेश्वर के सत्य के साथ जनता के उज्ज्वल भविष्य की धारणा स्पष्ट है: भय और शोक के बाद आनंद और जीत।
  • यह शास्त्रीय तौर पर दिखाता है कि धार्मिक-राज्य में शक्ति का स्रोत ईश्वर की इच्छा है, न कि मानवीय हथियारों की ताकत।

स्पर्श-संयुक्त सिद्धांत (Cross-references with brief explanations)

  • यशायाह 2:11–17 — गर्व और विनाश का निष्कर्ष: परमेश्वर की महत्ता बनाम मानव-यत्नों का मूल्यांकन।
  • रोमियों 11:33–36 — परमेश्वर की योजनाओं का गहन गूढ़ता, और किस तरह यह मानव समझ से परे है।
  • यशायाह 29:19 — दीनता के पात्रों की खुशी और उद्धार का भाव।

छोटी शिक्षाप्रद सूची

प्रैक्टिकल निष्कर्ष

जीवन में चाहे कितनी भी शक्तिशाली योजनाएँ क्यों न हों, हमारा स्थायित्व ईश्वर की अनुमति और मार्गदर्शन में है। नम्रता, उद्धार की आशा और ईश्वर की गाइडेंस पर निर्भरता ही वास्तविक सुरक्षा देती है।

महत्वपूर्ण पाठ उद्धरण (Public-domain commentators)

यह अंश Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के समकक्ष पारमार्थिक निष्कर्ष से संगत है: वे स्पष्ट रूप से बताते हैं कि गर्व के विरुद्ध ईश्वर की कटुता और चालाकी की असफलता His sovereignty के सामने कमजोर पड़ती है। अगर आप चाहें तो इन स्रोतों के संपूर्ण विचार पूछ सकते हैं, पर इस पंक्ति में मुख्य संदेश वही रहता है कि गर्व, चालाकी और शक्ति-प्रदर्शन अंततः ईश्वर के पैमाने पर मँड़राते हैं और नष्ट हो जाते हैं।

उद्धृत विशिष्ट अभिधानों के बारे में: यदि उपलब्ध हो, तो मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स या एडम क्लार्क के कंठस्थ शाब्दिक छोटे उद्धरण इस पाठ में प्रयुक्त किये गए हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 25:11 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यही युक्ति सारी पृथ्वी के लिये ठहराई गई है; और यह वही हाथ है जो सब जातियों पर बढ़ा हुआ है।

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इस कारण यहोवा का क्रोध अपनी प्रजा पर भड़का है, और उसने उनके विरुद्ध हाथ बढ़ाकर उनको मारा है, और पहाड़ काँप उठे; और लोगों की लोथें सड़कों के बीच कूड़ा सी पड़ी हैं। इतने पर भी उसका क्रोध शान्त नहीं हुआ और उसका हाथ अब तक बढ़ा हुआ है।

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परन्तु अब यहोवा ने यह कहा है*, “मजदूरों के वर्षों के समान तीन वर्ष के भीतर मोआब का वैभव और उसकी भीड़-भाड़ सब तुच्छ ठहरेगी; और थोड़े जो बचेंगे उनका कोई बल न होगा।”

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