Old Testament
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Reader-friendly Overview
यशायाह 25:10 इस अध्याय में यहोवा के महान उद्धार और उनकी प्रभुता की घोषणा है। यह वचन पर्वत-प्रतीक के माध्यम से यह संदेश देता है कि परमेश्वर का राज्य और योजना कितना दृढ़ है, और जो विनष्ट हुए हैं वे अंततः उनके न्याय के हाथ से ढल जाते हैं। यहाँ मोआब का परिदृश्य प्रस्तुत है—जो अपने स्थान पर लताड़ा जाएगा—यह दिखाता है कि परमेश्वर के सामने सभी गौरव-खाले व्यक्ति भी उसके विरुद्ध टिक नहीं सकते।
Verse in Context
यशायाह 25 अध्याय परमेश्वर के उद्धारक और सुरक्षित पल का महान आह्वान है। यह भोर-जागती आशा है कि नष्ट होते पथ के बावजूद परमेश्वर अपने peuple को बचाएगा और उनके लिए एक सुंदर मेज প্রস্তুत करेगा। इस verse में पर्वत का चित्रण उपयोग किया गया है—यह वह स्थान है जहाँ यहोवा का हाथ सदा बना रहने की बात कही जाती है, और मोआब की विनाशक स्थिति को स्पष्ट किया गया है।
Main spiritual lesson
मुख्य संदेश यह है कि प्रभु का राज्य और कृपा नित नई हैं; चाहे संसार की शक्तियाँ कितनी भी बढ़ जाएँ, परमेश्वर के विरुद्ध खड़े होने की कीमत वही होगी जो घास के ढेर पर पुआल को जलाने जैसे है—अर्थात क्षणिक और विनाशकारी। आशीष-भू पर यहोवा का हाथ स्थिर रहता है, तथा उसका न्याय और उद्धार अवश्य होता है।
Key insights from trusted commentators
यहाँ तीन पुरानी-धारा के विवेचकों के आम निष्कर्ष निहित हैं:
Cross-references with brief notes
- यशायाह 2:2-3: यहोवा के पर्वत-राज्य का समय-पूर्व दृश्य देता है कि प्रभु का घर सभी पर्वतो से ऊँचा होगा।
- डेनियल 2:44: उसके राजत्व का स्थायित्व और अन्य राजाओं के क्रम-विकास का अंत उसी प्रकार होता है।
- प्रकाशित 21:1-4: परमेश्वर के राज्य में शांति और दु:ख का अंत, जो यहोवा के हाथ के संरक्षण के कारण संभव होता है।
Application for today
इस verse से सीख मिलती है कि अपने जीवन में हम तब तक स्थिर रहें जब तक यहोवा के हाथ हमारे साथ रहते हैं। चाहे परिस्थिति कितनी भी अस्थिर क्यों न हो, प्रभु का हाथ न तो कमज़ोर पड़ता है और न खोता है. विश्वास रखें कि परमेश्वर अपने लोगों के लिए एक सुरक्षित स्थान बनाते हैं, उनका न्याय और उद्धार सुनिश्चित है।
Close with a concise summary
यशायाह 25:10 EMI: पर्वत पर यहोवा का हाथ सदा बना रहेगा—यानी परमेश्वर की सत्ता और कृपा अडिग है। मोआाब का विनाश एक शक्ति के सामने अहंकार की सजा है, जो यह दर्शाता है कि प्रभु के समय में उनके न्याय की उंचाई और उनकी उद्धार की योजना अटल है।