Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी1 पतरस 1:1 बाइबल पद की व्याख्या
1 पतरस 1:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
पतरस की ओर से जो यीशु मसीह का प्रेरित है, उन परदेशियों के नाम, जो पुन्तुस, गलातिया, कप्पदूकिया, आसिया, और बितूनिया में तितर-बितर होकर रहते हैं।
1 पतरस 1:1 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 पतरस 1:1 समानांतर पद और संबंधित वचन
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प्रेरितों के काम 2:5 (HINIRV) »
और आकाश के नीचे की हर एक जाति में से भक्त-यहूदी यरूशलेम में रहते थे।

याकूब 1:1 (HINIRV) »
परमेश्वर के और प्रभु यीशु मसीह के दास याकूब की ओर से उन बारहों गोत्रों को जो तितर-बितर होकर रहते हैं नमस्कार पहुँचे।

इब्रानियों 11:13 (HINIRV) »
ये सब विश्वास ही की दशा में मरे; और उन्होंने प्रतिज्ञा की हुई वस्तुएँ नहीं पाईं; पर उन्हें दूर से देखकर आनन्दित हुए और मान लिया, कि हम पृथ्वी पर परदेशी और बाहरी हैं। (उत्प. 23:4, 1 इति. 29:15)
1 पतरस 1:1 का अर्थ
यह वाक्य बताता है कि प्रेरित पतरस ईसुधर्मियों के समुदाय को पत्र दे रहा है—जो यीशु मसीह के अनुयायी हैं—विशेषकर वे जो पनतुस, गलातिया, कप्पदूकिया, आसिया और बितूनिया के दूर-दराज के शहरों में रहते हैं। यह परिचय उनके पहचान-चिह्न को स्थापित करता है: वे चयनित, प्रचारित और परमेश्वर की संरक्षित पवित्रता में बसे हुए लोग हैं।
पृष्ठभूमिและ परिप्रेक्ष्य
पहला पतरस वे बात बताता है कि मसीह-विश्वासियों को सतत् परीक्षणों का सामना करना पड़ेगा, फिर भी उनके धर्म और आशा स्थिर रहे। प्रेरित पतरस इस पत्र के माध्यम से यह समझाते हैं कि वे “परदेशी” हैं—धर्मी समुदाय की दुनिया से एक अलग, उन्मुख समुदाय—परन्तु भगवान की चुनी हुई योजना के भीतर। यह पत्र स्टार्टर के रूप में उनके विश्वास के स्रोत, उपहारों, और पवित्रता पर केंद्रित है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
थीमेटिक सार
संलग्न शास्त्रीय टिप्पणियाँ (संक्षेप)
Matthew Henry की छोटी टिप्पणी में यह कहा गया है कि प्रेरित पतरस अपने पाठकों को एक पवित्र, विश्वासपूर्ण जीवन की याद दिलाते हैं, भले ही वे बहुधर्मी स्थानों में रहते हों। Albert Barnes यह बताने का प्रयास करते हैं कि “परदेशी” शब्द यहाँ उन लोगों के लिए है जो शारीरिक जगह से अधिक, सामाजिक-धार्मिक पहचान में भिन्नता दिखाते हैं—परंतु परमेश्वर के साथ उनके संबंध दृढ़ हैं। Adam Clarke कहते हैं कि यह पंक्ति पाठकों की वैश्विक दृष्टि को दर्शाती है—विश्व-चर्च में एक विवेकशील, पवित्र जीवन का आह्वान।
Cross-references (संक्षिप्त परिचय)
- याकूब 1:1: विश्वासियों की आंतरिक पहचान और संसार से अलग जीवन की मांग। यह संदर्भ बताता है कि भितर से परिवर्तन बाहरी जीवन में कैसे परिलक्षित होता है।
- रोम 12:4-5: एक शरीर के अनेक सदस्य, हर एक का योगदान—यह पतरस के क्षेत्र-चिह्न से मिलते-जुलते विचार देता है कि विविधता के बावजूद एकता कैसे बनी रहे।
- 2 कुरिन्थ 5:20: मसीह के दूत की तरह प्रेषित होने की जिम्मेदारी—“हम ईश्वर के दूत बन कर” रहते हैं, यह स्त्रोत बनाम जीवनशैली का संयोजन दर्शाता है।
संक्षिप्त प्रैक्टिकल takeaway
विश्व-परिवेश चाहे जैसा हो, ईश्वर की चॉइस और ईश-आह्वान से बने रहने की प्रेरणा उठाएं। भिन्नताओं के बावजूद एक जैसी आस्था और चरित्र-जीवन को अपनाएं—सब एक यीशु मसीह के कारण एक परिवार के सदस्य हैं।