Old Testament
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1 पतरस 1:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
अर्थात् एक अविनाशी और निर्मल, और अजर विरासत के लिये जो तुम्हारे लिये स्वर्ग में रखी है,
1 पतरस 1:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 पतरस 1:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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प्रकाशितवाक्य 21:27 (HINIRV) »
और उसमें कोई अपवित्र वस्तु या घृणित काम करनेवाला, या झूठ का गढ़नेवाला, किसी रीति से प्रवेश न करेगा; पर केवल वे लोग जिनके नाम मेम्ने की जीवन की पुस्तक में लिखे हैं। (यशा. 52:1)

इब्रानियों 9:15 (HINIRV) »
और इसी कारण वह नई वाचा का मध्यस्थ* है, ताकि उस मृत्यु के द्वारा जो पहली वाचा के समय के अपराधों से छुटकारा पाने के लिये हुई है, बुलाए हुए लोग प्रतिज्ञा के अनुसार अनन्त विरासत को प्राप्त करें।

1 पतरस 5:4 (HINIRV) »
और जब प्रधान रखवाला प्रगट होगा, तो तुम्हें महिमा का मुकुट दिया जाएगा, जो मुरझाने का नहीं।
पाद 1:4 का संक्षिप्त परिचय
यह पदावली पतरस के पहले पत्र में दी गई है, जहां विश्वासियों के लिए परम आश्वासन स्पष्ट किया गया है: हमारी अविनाशी, निर्मल और अजर विरासत स्वर्ग में सुरक्षित है। यह एक ऐसी धरोहर है जो समय के घटने या परिस्थितियों के विपरीत स्थिर रहती है। यहाँ सांसारिक जीवन के क्लेशों के बीच आत्मा को आश्वस्त करने वाला संदेश है कि ईश्वर की कृपा से हमारी सुरक्षा और उद्धार स्वर्गीय संपदा में जमा है।
कथित अध्याय के भीतर विचार
1 पतरस 1:4 वह प्रोत्साहन है जो विश्वासियों को यह याद दिलाता है कि ईश्वर की असीम कृपा से हमें एक अविनाशी, निर्मल और अजर विरासत प्राप्त है। यह विरासत स्वर्ग में है, और ईश्वर की पवित्र शक्ति उसे सुरक्षित रखती है ताकि हम विश्वास के द्वारा उसे प्राप्त कर सकें। यीशु मसीह की kutoa में यह विरासत हमारे लिए उपलब्ध है, और हमारी वर्तमान कठिनाइयां उसे घटा नहीं सकतीं।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
हिंदी संदर्भों में तुलनात्मक विचार
– याकूब 1:12 और मत्ती 5:48 जैसे पद यह दर्शाते हैं कि ईश्वर की संस्कृति में अधिकतम उद्देश्य नैतिक पवित्रता और धैर्य के साथ जीवन जीना है।
– रोमियों 8:18–30 से यह प्रेरणा मिलती है कि पीड़ा भी अंततः उस अविनाशी उद्धार की पुष्टि में सहायक होती है।
– यूहन्ना 14:2–3 में मसीह अपने अनुयायियों को स्वर्गीय स्थान की ओर आमंत्रित करते हैं, जो इस विरासत की पूर्ति का संकेत है।
महत्वपूर्ण पाठ का व्यावहारिक अनुप्रयोग
- परिस्थितियों में भय या निराशा के समय भी हम यह स्मरण रखें कि हमारी आशा एक दृढ़ परम्परा में है जो स्वर्गीय है।
- जीवन की अस्थिरताओं के बीच हमें पवित्रता के मार्ग पर स्थिर रहने का जोर मिलता है—क्योंकि हमारी विरासत निर्मल है, इसका अर्थ है कि हमारे आचरण में भी क्रमिक बदलाव हो सकता है।
क्रॉस-रेफरन्स (संक्षिप्त चर्चा)
छोटे-छोटे संदर्भ जो समान आश्वासन देते हैं: - मसीह के उद्धार पर आधारित स्वर्गीय इनाम का विचार 1 पतरस 1:4 के साथ संगत है; - अन्य पवित्रताओं में आने वाले प्रोत्साहन जैसे 1 पतरस 3:13–17 का नैतिक दृढ़ता से संबंध स्थापित करता है;
व्याख्या: यह क्रॉस-रेफरंस उद्धार के विकाश और आचरण के लिए मार्गदर्शन देता है—हम कैसे जीवन में विवेकपूर्ण और पवित्र रहें ताकि हमारी विरासत सुरक्षित रहे।
संक्षिप्त निष्कर्ष
1 पतरस 1:4 हमें बताता है कि हमारी आशा केवल वर्तमान जीवन पर नहीं है, बल्कि स्वर्ग में रखी एक अविनाशी, निर्मल और अजर विरासत पर टिकती है। यह संदेश विश्वास को दृढ़ करता है, धैर्य को बढ़ाता है और पवित्र जीवन की प्रेरणा देता है। जैसे-जैसे हम प्रभु के साथ चलें, यह विरासत हमारी निश्चित सुरक्षा बनकर हमारा भाग बनती है।
उद्धृत विचार — Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से मौलिक टिप्पणियाँ (संक्षेप):
Matthew Henry का संकेत: “बस विश्वास में स्थिर रहो; तुम जो पवित्र उद्धार के अधिकारी हो, वह तुम्हारे स्वर्गीय भाग के लिए तैयारी है।”
Albert Barnes का जोड़: यह विरासत ईश्वर की कृपा से है, और वह इसे हमारे लिए पवित्र बनाए रखने के लिए संजोए रखते हैं।
Adam Clarke का अवलोकन: अविनाशी विरासत वह है जो पृथ्वी के सभी क्लेशों के बावजूद सुरक्षित है; परन्तु इसकी सुरक्षा हमारा आचरण भी मांगती है।