Old Testament
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1 पतरस 1:16 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि लिखा है, “पवित्र बनो, क्योंकि मैं पवित्र हूँ*।” (लैव्य. 11:44, लैव्य. 19:2, लैव्य. 20:7)
1 पतरस 1:16 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
1 पतरस 1:16 समानांतर पद और संबंधित वचन
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लैव्यव्यवस्था 11:44 (HINIRV) »
क्योंकि मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ; इस कारण अपने को शुद्ध करके पवित्र बने रहो, क्योंकि मैं पवित्र हूँ*। इसलिए तुम किसी प्रकार के रेंगनेवाले जन्तु के द्वारा जो पृथ्वी पर चलता है अपने आप को अशुद्ध न करना। (1 पत. 1:16)

लैव्यव्यवस्था 19:2 (HINIRV) »
“इस्राएलियों की सारी मण्डली से कह कि तुम पवित्र बने रहो; क्योंकि मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा पवित्र हूँ।

लैव्यव्यवस्था 20:7 (HINIRV) »
इसलिए तुम अपने आप को पवित्र करो; और पवित्र बने रहो; क्योंकि मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ। (1 पत. 1:16)
1 पतरस 1:16 का पाठ-वरण और उसका संदेश
पद का पृष्ठ-परिदृश्य यह है कि प्रभु यीशु के प्रति विश्वास रखने वाले साधारण अंधकार-जनित जीवन से उठकर एक पवित्र कर्म-जीवन की ओर बुलाए जाते हैं। 1 पतरस 1:16 में परम piyara का उद्घोष है कि परमेश्वर जो पवित्र है, उसके समान हम भी पवित्र बनें। यह उद्घोष लेवीय विधान के संदर्भ में दिया गया है कि पवित्रता हर अनुयायी के आंतरिक चरित्र और दैनिक व्यवहार में प्रकट होनी चाहिए।
पवित्रीकृत आयोजन और ईमान की पहचान
इस वाक्य में “पवित्र बनो” कहा गया है, क्योंकि परमेश्वर पवित्र है। इसका मतलब सरल है: विश्वासियों को अपने आचरण, विचारों और संबन्धों में ऐसे उच्च मानदंडों पर चलना चाहिए जो ईश्वर के स्वभाव से मेल खाते हों। पवित्रता एक आंतरिक परिवर्तन का फल है जो बाहरी जीवन में स्पष्ट होता है—यानी सत्य के साथ जीवन जीना, झूठ-धोखा-भय से दूर रहना, और नयी सृष्टि की तरह प्रेम, नम्रता और दया को बनाए रखना।
पद के विशेष शब्द और उनके अर्थ
संदर्भित पवित्रता के स्रोत
जो पवित्रता ईश्वर के स्वभाव से निकलती है, वह प्रभु की कृपा, नया जन्म और पवित्र आत्मा के प्रभाव से होती है। यह दूर से नहीं, बल्कि हमारे चल पड़े व्यवहार-रहित जीवन में अनुवादित होती है—जैसे कि सत्य, प्रेम, और नैतिक साहस।
अन्य प्रासंगिक बाइबल संदर्भ
कई जगह पवित्रता की मांग का संदेश मिलता है:
प्रेम-आधारित आवेदन
आज के समय में पवित्र बनना केवल व्यक्तिगत शुद्धिकरण नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी है। अपनी भाषा, अपने व्यवहार, और अपने संबंधों में नम्रता, सच्चाई और सहायता की भावना बनाए रखें। कठिन परिस्थितियों में भी यह याद रखें कि हमारा पवित्र जीवन ईश्वर के प्रकाश को दिखाने का एक माध्यम है।
उद्धृत टिप्पणी-उद्धरण (संदर्भित पंक्तियाँ)
यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के मूल-उद्धरणों के पूर्ण वाक्यों को देखना चाहें, नीचे संक्षिप्त संदर्भ दिए हैं। इस पंक्ति में संकेतित उद्धरण पाठ के मूल शब्दों का पूर्ण पाठ नहीं देता; इसके स्थान पर वे संदेश देते हैं कि पवित्रता किस प्रकार आत्मा-संरचना का भाग है:
— "पवित्र बनो" का सिद्धांत ईश्वर के चरित्र के अनुरूप आचरण पर जोर देता है।
युवा विश्वासियों के लिए नीचे दी गई क्रिया-चरण
Cross-reference notes: यह पवित्रता के आह्वान के साथ 1) रोमियों 12:1–2 के अनुरूप जीवन-बलिदान और मन-renewal, 2) याकूब 1:27 के “कल्पित धर्म” के व्यावहारिक पक्ष, और 3) लैव्य 11:44-45 जैसी पवित्रता-आह्वान के पुराने कानूनिक आधार से जुड़ता है।