Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीरूत 1:1 बाइबल पद की व्याख्या
रूत 1:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
जिन दिनों में न्यायी लोग न्याय करते थे* उन दिनों में देश में अकाल पड़ा, तब यहूदा के बैतलहम का एक पुरुष अपनी स्त्री और दोनों पुत्रों को संग लेकर मोआब के देश में परदेशी होकर रहने के लिए चला।
रूत 1:1 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रूत 1:1 समानांतर पद और संबंधित वचन
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उत्पत्ति 12:10 (HINIRV) »
उस देश में अकाल पड़ा: इसलिए अब्राम मिस्र देश को चला गया कि वहाँ परदेशी होकर रहे क्योंकि देश में भयंकर अकाल पड़ा था।

उत्पत्ति 26:1 (HINIRV) »
उस देश में अकाल पड़ा, वह उस पहले अकाल से अलग था जो अब्राहम के दिनों में पड़ा था। इसलिए इसहाक गरार को पलिश्तियों के राजा अबीमेलेक के पास गया।

यहेजकेल 14:13 (HINIRV) »
“हे मनुष्य के सन्तान, जब किसी देश के लोग मुझसे विश्वासघात करके पापी हो जाएँ, और मैं अपना हाथ उस देश के विरुद्ध बढ़ाकर उसका अन्नरूपी आधार दूर करूँ, और उसमें अकाल डालकर उसमें से मनुष्य और पशु दोनों को नाश करूँ,
रूत 1:1 का महत्व और संदर्भ
यहोवा के समय के बारे में जो कथन यहाँ दिया गया है—“जिन दिनों में न्यायी लोग न्याय करते थे… तब यहूदा के बैतलहम का एक पुरुष…”—यह verse Ruth की कथा की पृष्ठभूमि सुनिश्चित करता है। यह वह समय है जब देश में अकाल था और कड़ा सामाजिक-आर्थिक संकट उभरा हुआ था, फिर भी एक ही परिवार ने निष्ठा और विश्वास के कारण अपने घर से बाहर जाकर मोआब के देश में रहने का निर्णय लिया। यह प्रारम्भिक पंक्ति कहानी की गति और उसकी दुःखभरी यात्रा की पहली पंक्ति बनती है; इससे पाठक को यह समझ में आता है कि ऐसें समयों में भी ईश्वर की योजना कैसे चलती है, भले ही परिस्थितियाँ विपरीत लगें।
पारंपरिकcontext और संदेश
यह पंक्तियाँ दो प्रमुख विचारों को उभारती हैं: एक निष्कर्ष नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन की कठिनाइयों के बीच विश्वास की धारा; दूसरा यह कि न्याय के कठिन परिदृश्य में भी रोग, भूख, या परदेशीपन से गुजरना व्यक्तिगत आस्था की परीक्षा है। यहूदा प्रांत के बैतलहम से एक व्यक्ति और उसकी पत्नी- पुत्रों की तुक्का-सी कहानी मोआब के देश में परदेशी होकर रहने की इच्छा में एक ऐतिहासिक सच लिए है: यहूदियों के लिए मोआब एक विरोधी आरम्भस्थल था, फिर भी वंश-वृक्ष को सुरक्षित रखने के लिए इन यात्राओं की धुरी बनी।
मुख्य संदेश और थीम
इस verse के पीछे की प्रमुख थीम एक विश्वसनीय, श्रमशील और विश्वास-आधारित जीवन है, जिसमें असफलताओं के बीच भी ईश्वर की योजना पर नजर रखने की सीख मिलती है। साथ ही यह कथा यह भी दिखाती है कि परमेश्वर अपने लोगों के लिए उनके दीपक बनकर चलते हैं—हम कैसे भी परिस्थितियों में हों, वह मार्ग बनाते हैं। यह समय-आधारित नैतिकता, परिवार की स्थिरता, और ग़ैर-स्थानीय स्थानों में परदेशीपन के कारणों पर भी प्रकाश डालता है।
आध्यात्मिक लिंक और क्रॉस-रेफरंसेस
नोट: ऊपर के क्रॉस-रेफरेंसेस पूरी बाइबल के भीतरタイ ביד में लिया गया है; यदि आवश्यक हो तो आप इन विषयों के लिए स्पष्ट शास्त्रीय उद्धरण देख सकते हैं, पर यहाँ पूर्ण आयत-उद्धरण नहीं दिया गया है।
छोटे पाठ पर विचार
कथानक की शुरुआत में अकाल और अस्थिरता के बीच एक सामान्य परिवार की यात्रा दिखती है—यही कथा का प्रेरक पाठ है: कठिन समय में भी कर्तव्य-निष्ठा और विश्वास की रक्षा। यहूदियों के लिए यह मोड़ यह भी संकेत देता है कि ईश्वर की योजना कभी-भी स्थिति से ऊपर है और वह अपने लोगों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलता है।
संक्षिप्त devotional reflection
ऐसी परिस्थितियों में जब जीवन की राह कठिन दिखे, तब भी ईश्वर हमारे साथ है और हमारी आस्था को परखता है। रुएट-यात्रा की कथा हमारे लिए एक स्मरण है कि घर-परिवार की सुरक्षा और ईश्वर की योजना की अहमियत एक साथ चलती है। अगर हम भी कठिन समय में अपने घर, अपने विश्वास, और अपने परिवार के प्रति दृढ़ निष्ठा बनाए रखें, तो ईश्वर की करुणा और दिशा हमारे जीवन को मार्गदर्शित करेगी।