Old Testament
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रूत 1:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब वह मोआब के देश में यह सुनकर, कि यहोवा ने अपनी प्रजा के लोगों की सुधि लेके उन्हें भोजनवस्तु दी है, उस देश से अपनी दोनों बहुओं समेत लौट जाने को चली।
रूत 1:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रूत 1:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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भजन संहिता 132:15 (HINIRV) »
मैं इसमें की भोजनवस्तुओं पर अति आशीष दूँगा; और इसके दरिद्रों को रोटी से तृप्त करूँगा।

निर्गमन 4:31 (HINIRV) »
और लोगों ने उन पर विश्वास किया; और यह सुनकर कि यहोवा ने इस्राएलियों की सुधि ली और उनके दुःखों पर दृष्टि की है, उन्होंने सिर झुकाकर दण्डवत् किया। (निर्ग. 3:15, 18)

निर्गमन 3:16 (HINIRV) »
इसलिए अब जाकर इस्राएली पुरनियों को इकट्ठा कर, और उनसे कह, 'तुम्हारे पूर्वज अब्राहम, इसहाक, और याकूब के परमेश्वर, यहोवा ने मुझे दर्शन देकर यह कहा है कि मैंने तुम पर और तुम से जो बर्ताव मिस्र में किया जाता है उस पर भी चित्त लगाया है;
क्यों यह पद महत्त्वपूर्ण है
Rut 1:6 का यह वाक्य दर्शाता है कि जीवन के कठिन समय में भी परमेश्वर के भरोसे पर लौटना और अपनी घरेलू पनाह ढूँढना कितना आवश्यक है। न केवल यह रूत और नोमि के आगे के निर्णयों के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह दिखाता है कि प्रभु के दयालु समाज कैसे विपदा में भी जीवित मार्ग दिखाते हैं। यह अंश हमें यह याद दिलाता है कि अपनी मूल ठिकानों से पलायन कर वापस आना तब संभव होता है जब ईश्वर की Providence हमें सचेत कर दे और हमारे पड़ोसियों के साथ शुद्ध निष्ठा बनी रहे।
पारिभाषिक संदर्भ (Original Context)
यह पाठ रूत के परिप्रेक्ष्य में है, जब दासी-निर्दिष्ट मोआबी महिला रूत के लिए जीवन के तनाव बढ़ रहे थे। मोआब से लौटना, जहाँ वह और नोमि की बेटी-बहुएँ थीं, यह घोषणा इसलिए है क्योंकि यहोवा ने अपनी प्रजा के लोगों को भोजन और सुरक्षा प्रदान करने का संकेत दिया है। यह घटनाक्रम यह दिखाता है कि परमेश्वर इतिहास के बड़े मानचित्र पर कैसे स्थिर राह बनाते हैं—भोर के समय तक भी जब लोग अन्धकार में हों, प्रभु की सुधि और दयालुता पाई जाती है।
मुख्य संदेश
कथा से जुड़ी थीम्स (Supporting biblical themes)
1) ईश्वर की पुनःस्थापना और उद्धार: भोजन-वस्तु की देन से यह स्पष्ट है कि परमेश्वर अपने लोगों के लिए आवश्यक वस्तुओं को व्यवस्थित करते हैं।
2) विदेश और घरेलू लौटना: रूत का मोआब देश छोड़कर लौटना यह संदेश देता है कि विश्वास के कारण पथ साफ होता है, भले ही यह कठिन लगे।
3) निष्ठा व साहस: रूत और नोमि के बीच रिश्ते में निष्ठा और साहस की मिसाल मिलती है—परिस्थितियाँ चाहे जैसी हों, परमेश्वर के उद्देश्य के अनुसार संघर्ष में भी उम्मीद बनी रहती है।
क्रॉस-रेफरेंस
• यहूश 2:12-13: विश्वासयोग्यता और दया के साथ बहिर्गमन के समय भी ईश्वर की कृपा बनी रहती है; यहूदाudit में भी प्रजा के लिए दया का संकेत मिलता है।
• आदम-उत्पत्ति 22:14: प्रावधान और पालन के समय में 하나님 स्वयं उपस्थित रहते हैं और लौटने वालों के लिए आश्वासन देते हैं।
• मरकुस 10:29-30: कटाव-समय में भी कर्तव्य के साथ लौटना और परिश्रम से लाभ उठाना, ईश्वर के आशीर्वाद के मार्ग खोलता है।
नोट: उपरोक्त क्रॉस-रेफरेंस केवल संकेतन हेतु हैं; मूल पाठ के उद्धरण नहीं दिए गए हैं।
व्यावहारिक devotional reflection
जो लोग विपदा में हों, वे इस पाठ से सीखें कि लौटना, अपना कटाव छोड़ना और ईश्वर की provision पर निर्भर होना जीवन की दिशा बदल सकता है। रूत ने नोमि को देखा कि कैसे यहोवा ने उनके पीछे भोजन और सुरक्षा की व्यवस्था की—हम भी अपने जीवन के क्षेत्रों में उसी भरोसे को कायम रखें। एक विश्वसनीय समुदाय का हिस्सा बनें, जहां प्रेम, दया, और सहायता एक दूसरे के लिए हों।
छोटी-सी क्रियात्मक सूची
परिशिष्ट उद्धरण: नोडेशन के अनुसार Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सामान्य सार के भीतर, यदि उनके शब्द सीधे उद्धृत हों, तो उन्हें संरक्षित रूप में उद्धृत किया गया है।