Old Testament
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रूत 1:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
जहाँ तू मरेगी वहाँ मैं भी मरूँगी, और वहीं मुझे मिट्टी दी जाएगी। यदि मृत्यु छोड़ और किसी कारण मैं तुझ से अलग होऊँ, तो यहोवा मुझसे वैसा ही वरन् उससे भी अधिक करे।”
रूत 1:17 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
रूत 1:17 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 शमूएल 3:17 (HINIRV) »
तब उसने पूछा, “वह कौन सी बात है जो यहोवा ने तुझ से कही है? उसे मुझसे न छिपा। जो कुछ उसने तुझ से कहा हो यदि तू उसमें से कुछ भी मुझसे छिपाए, तो परमेश्वर तुझ से वैसा ही वरन् उससे भी अधिक करे।”

1 शमूएल 25:22 (HINIRV) »
यदि सवेरे को उजियाला होने तक उस जन के समस्त लोगों में से एक लड़के को भी मैं जीवित छोड़ूं, तो परमेश्वर मेरे सब शत्रुओं से ऐसा ही*, वरन् इससे भी अधिक करे।”

2 शमूएल 19:13 (HINIRV) »
फिर अमासा से यह कहो, 'क्या तू मेरी हड्डी और माँस नहीं है? और यदि तू योआब के स्थान पर सदा के लिये सेनापति न ठहरे, तो परमेश्वर मुझसे वैसा ही वरन् उससे भी अधिक करे।'”
सीधा सार: पन्ना रूत 1:17 का मूल अर्थ
जहाँ तू मरेगी वहाँ मैं भी मरूँगी, और वहीं मुझे मिट्टी दी जाएगी—यदि मृत्यु छोड़कर किसी कारण मैं तुझ से अलग होऊँ, तो यहोवा मुझसे वैसा ही वरन् उससे भी अधिक करे।
प्रासंगिक पृष्ठभूमि
यह वचन रूत और नाओमी के संबंध का एक समर्पक क्षण है, जहाँ रूत अपनी निष्ठा और वचनबद्धता को दोहराती है। नाओमी की विपरीत परिस्थितियाँ—खेल, अकाल और परित्यक्ता जीवन—रूत के लिए एक क्रांतिकारी संदर्भ बनती हैं कि वह मातृत्व, सुरक्षा या स्थिरता की चाहत से बढ़कर नाओमी के प्रति एक नए परिवार-उन्मुख दायित्व को अपनाती है। यह वचन व्यक्तिगत प्रेम, वैवाहिक व्रत और दाहिने रास्ते की प्रतिबद्धता को उजागर करता है।
व्याख्यात्मक बिंदु
मूल पाठ्य संकेत (सूक्ष्म अनुवादित पंक्तियाँ)
रूत यह कहती है कि वह नाओमी के साथ अपने समुचित भविष्य के लिए पूरी तरह समर्पित है, भले ही इसका परिणाम कितना भी कठिन क्यों न हो। यह निष्ठा विवाह-बन्धन से भी ऊपर उठकर एक व्यक्तिगत संकल्प बन जाती है।
एकीकृत टिप्पणी: पूर्ववर्तियों के प्रकाश में
मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स और एडक Clarke की सार्वजनिक-डोमेन टीकाओं से संचित धारणा यह है कि रूत का निर्णय केवल नाओमी के प्रति प्रेम नहीं, बल्कि एक विश्वसनीय आस्था और पवित्र दायित्व का प्रतीक है।
“मैथ्यू हेनरी” कहता हैं कि रूत की शपथ एक ठोस कदम है जो उसे न सिर्फ विवाह-बंधन, बल्कि एक नई आस्था-संरचना में प्रवेश कराती है।
“एल्बर्ट बार्न्स” स्पष्ट करते हैं कि यह वचन सामाजिक सुरक्षा के दायरे से परे है—यह एक पवित्र, सचे प्रेम की सार्वजनिक घोषणा है कि जो भी हो, वह साथ चलने को तैयार है।
“एडम क्लार्क” बताते हैं कि इस प्रकार की निष्ठा परमोच्च प्रेम की पराकाष्ठा है, जो यह दिखाती है कि एक व्यक्ति अपने भाग्य को दूसरों के लिए बदल सकता है।
जोड़ते शब्द: अन्य सम्बंधित संदर्भ
1) रूत 1:16— रूत ने कहा, “जहाँ तू जाएगा, मैं भी जाूँगी”—यह कथन उसी निष्ठा का विस्तार है और बताता है कि वह अपनी मौलिक पहचान से आगे बढ़कर नाओमी के परमिश्रय जीवन पर चलना चाहती है।
2) यहीस 4:7-8 (संकेत लिए): समुदाय के लिए एक प्रतिज्ञा-उद्धार की सोच को प्रेरित करता है कि व्यक्ति अपने दायित्वों को पूरी ईमानदारी से निभाए।
3) गणना-कार्य के भीतर विवाह-सम्बन्ध: यहोवा के साथ विश्वस्त प्रतिज्ञा की भावना को भी दर्शाता है कि प्रेम और निष्ठा दिव्य योजना के अनुरूप चलते हैं।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
कुल मिलाकर, रूत 1:17 एक साहसपूर्ण वचन है जो प्रेम, दायित्व और आस्था के एक निरपेक्ष मॉडल के रूप में हमारे सामने आता है।
Cross-references:
– रूत 1:16: जहाँ तू जाएगा, मैं भी जाऊँगी; यह प्रारम्भिक दृढ़ संकल्प है।
– याकूब 2:17 (संवेदी संदर्भ): कर्मों के बिना विश्वास निष्क्रिय है; निष्ठा इस वचन में क्रियाशील होती है।
– इफिसियों 5:2 (संकेत): प्रेम को देखते हुए जीवन-निर्वाह-शैली की नींव डालना चाहिए।