Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
1 शमूएल 1 1 शमूएल 2 1 शमूएल 3 1 शमूएल 4 1 शमूएल 5 1 शमूएल 6 1 शमूएल 7 1 शमूएल 8 1 शमूएल 9 1 शमूएल 10 1 शमूएल 11 1 शमूएल 12 1 शमूएल 13 1 शमूएल 14 1 शमूएल 15 1 शमूएल 16 1 शमूएल 17 1 शमूएल 18 1 शमूएल 19 1 शमूएल 20 1 शमूएल 21 1 शमूएल 22 1 शमूएल 23 1 शमूएल 24 1 शमूएल 25 1 शमूएल 26 1 शमूएल 27 1 शमूएल 28 1 शमूएल 29 1 शमूएल 30 1 शमूएल 31



1 शमूएल 3:17 — तत्कालीन संदर्भ और मूल अर्थ
यहोवा ने जब शमूएल से अन्तरिक बुलाहट की बात सुनी, तो उसने अभिभावक यअहव के उद्धारकर्ता के तौर पर यह बात स्पष्ट की कि वह जीवित परमेश्वर की आवाज सुन रहा है—परन्तु आयत 17 में यह संकेत दिया गया है कि परमेश्वर के संदेश की गहराई और परिणाम शमूएल के भीतर क्या और कितना चोट पहुँचाते हैं, यह सब एक संयत उत्तर की माँग करता है। युवावस्था के सेतु में खड़े युवक शमूएल को पहले बार यह सुनना पड़ा कि जब वह अपने ज्ञान में वर्षों से प्रशिक्षित हुए चिंतकों की जगह एक सीधे-सीधे संवादकर्ता के रूप में परमेश्वर की आवाज सुन रहा है। उसी आधार पर वह यह जानता है कि यह न तो मानव-उद्धार का नया दर्शन है और न ही वह केवल एक घटना है; यह परमेश्वर का अपना शब्द है जिसे स्वीकारना और पालन करना है।
ईश्वर और विश्वास के बारे में क्या बताती है
यह वाक्प्रेमी उद्धार करता है कि परमेश्वर अपनी सेवकों के साथ सीधे संपर्क बनाता है, भले ही वे नन्हे और अनभिज्ञ क्यों न हों। जब शमूएल एक बार सचेत हो गया, तो उसने जाना कि यह आवाज़ उसे बुला रही है—यह स्पष्ट संदेश देता है कि ईश्वर अपने उद्देश्य के लिए मानव-समय और मानव-स्थिति के साथ सहभागी होता है। यह सच है कि परमेश्वर अपने पथ को दिखाने के लिए साधनों का चयन करता है, परंतु वह भी रहता है—क्योंकि वह हर बात को सचमुच, सत्यापित और न्यायपूर्ण बनाकर कहता है।
मुख्य शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
संबंधित पासेज़
1) प्रेरितों के क्रम में परमेश्वर की आवाज़ का लोगों के बीच परिचय — श्रोताओं के लिए स्वयं की नज़र से देखने के लिए प्रेरणा देता है कि ईश्वर कैसे अपनी इच्छा को व्यक्त करता है।
2) यहूदी-व्यवस्था में भविष्यवाणियों के समय-समय पर सच की पहचान—जो सत्य है, वह परमेश्वर से आता है और उसे मानना चाहिए।
3) अन्य बातें जहाँ परमेश्वर का बुलावा—युवाओं या सामान्य लोगों के माध्यम से—सत्य को स्थापित करने का मिशन दर्शाता है।
आज के पाठ पर अनुप्रयोग
आज की ईमानदार खोज में यह मुख्य विचार है: परमेश्वर की आवाज कभी-भी आकस्मिक नहीं होती; वह प्रेम और शुद्धता के साथ आती है। यदि आप भी ऐसी आवाज़ अनुभव करते हैं, तो स्पष्ट और नम्र उत्तर दें, ताकि उसका मार्ग आपके जीवन के हर क्षेत्र में खुल सके। परिवार, समुदाय और अपने आचरण में ईश्वर-नियत के अनुसार चलना आपके लिए परमेश्वर के वचन की आस्थागत प्रस्तुति बना देता है।
संक्षिप्त समन्वय
इस पाठ से मिलता संदेश है कि परमेश्वर अपने सेवकों के साथ सीधे संवाद करता है और उन पर भरोसा कर के उनका जीवन दिशा देता है। यह हर वक्त सचेतित करता है कि जब ईश्वर बुलाते हैं, प्रतिक्रिया में ईमानदारी और निर्भयता ज़रूरी है—यही सत्य का जीवन है।
मूल उद्धरणों के संक्षेप उल्लेख
अगर आवश्यक्ता पड़े, तो Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक डोमेन टिप्पणीकारियों के नाम संबद्ध विचारों से प्रेरित बिंदु हमारे पाठ-सार में समाहित किए जा सकते हैं; किन्तु यहां हमने एक नया, स्वायत्त सार प्रस्तुत किया है। ऊपर दिए गए विवेचन में उनके मूल शब्दों का पूर्ण उद्धरण नहीं दिया गया है।