Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
1 शमूएल 1 1 शमूएल 2 1 शमूएल 3 1 शमूएल 4 1 शमूएल 5 1 शमूएल 6 1 शमूएल 7 1 शमूएल 8 1 शमूएल 9 1 शमूएल 10 1 शमूएल 11 1 शमूएल 12 1 शमूएल 13 1 शमूएल 14 1 शमूएल 15 1 शमूएल 16 1 शमूएल 17 1 शमूएल 18 1 शमूएल 19 1 शमूएल 20 1 शमूएल 21 1 शमूएल 22 1 शमूएल 23 1 शमूएल 24 1 शमूएल 25 1 शमूएल 26 1 शमूएल 27 1 शमूएल 28 1 शमूएल 29 1 शमूएल 30 1 शमूएल 31



1 शमूएल 3:13 पर टिप्पणी – संदर्भ और significado
यह आयत पुराने नियम के समय के एक नयी दिशा के साथ जुड़ती है। शमूएल का प्रशिक्षण देवयोजना की रूपरेखा में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है: परमेश्वर भविष्यवाणी-संबंधी संदेशों के लिए उसे चुनते हैं, और यहाँ यह चेतावनी है कि परमेश्वर साधारण रूप से घर-परिवार के आचार-व्यवहार के अनुसार दण्ड देता है। आयत कहती है कि यह दण्ड अवश्य होगा क्योंकि होशियार पिता होने के बावजूद अगुआ ने अपने पुत्रों के अधर्म पर रोक नहीं लगाई, और इस कारण घर का न्याय अप्रत्याशित नहीं बल्कि पूर्वसूचित है।
केंद्रीय अर्थ
यह संदेश यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर अपने चयनित दtts के प्रति जिम्मेदारी से दृष्टिकोण लेते हैं। एक नीतिगत चेतावनी के रूप में कहा गया कि अगर माता-पिता या प्रेरक अधिकारी पाप के रोकथाम में निष्क्रिय रहते हैं, तो दण्ड आने से नहीं बचेगा। यहाँ specifically यह कहा गया है कि परमेश्वर ने स्पष्ट कर दिया है कि घर के सदस्यों के अधर्म के लिए घरेलू न्याय आएगा, क्योंकि पिता-रूढ़ी ने शुश्रुषा नहीं दी।
प्रधान विषय
हमारे लिए प्रमुख विचार
- माता-पिता और नेताओं की जिम्मेदारी कितनी केंद्रीय है; अधर्म रोकने के लिए साहस और दृढ़ता चाहिए।
- ईश्वर की सचेतनता व्यक्तिगत और पारिवारिक दोनों स्तर पर लागू होती है; नैतिकता की चक्रवात में भी योजना स्पष्ट रहती है।
- एक सच्चे हृदय की भाषा वह है जो देव-कार्यो में प्रेरणा बनती है, न कि दबाव या डर से।
संदर्भ से सम्बन्ध
1) यह सच-संदेश एक समान विचार देता है कि व्यक्तिगत विश्वास-जीवन में कान्त-ध्वनि का आना और कर्तव्य-पालन अनिवार्य है (निर्देशन-संरेख)।
2) यह आयत परमेश्वर के न्याय के नियमों को परिवार के भीतर भी लागू बताती है, जो पुराने विधान के नैतिक ढांचे से मेल खाती है।
3) शमूएल के आने की तैयारी इस बात को रेखांकित करती है कि परमेश्वर कैसे विपरीत परिस्थितियों में भी अपने उद्देश्य के अनुसार भविष्य बनाते हैं।
व्यावहारिक चिंतन
आज के पाठक के लिए यह स्मरण कराता है कि परिवार में सत्य और नैतिकता को गले लगाना कितना आवश्यक है। यदि हम अपने घरों में अनुशासन, नैतिकता, और พระय के साथ मार्गदर्शन नहीं देते, तो परिणाम समय के साथ विपरीत हो सकता है। यह आयत प्रेरित करती है कि हम अपने प्रभाव-क्षेत्र में नैतिक निर्णयों के लिए स्पष्ट कदम उठाएं, और ईश्वर की योजना के अनुसार शिक्षा-संरचना बनाएं।
छोटे cross-reference-चिन्तन
- प्रेरित वचन और पवित्रता के महत्व के साथ, परिवार में नेतृत्व की जिम्मेदारी पर जो अन्य आयतें देती हैं; छोटा संदर्भ: बास-याचना के नियम, और पिता के प्रभाव के बारे में (cross-reference)—इनमें यह समझ आता है कि नेतृत्व क्या अपेक्षा करता है।
- अन्यथा आयतें जो पिता और पुत्रों के आचरण के साथ देव के न्याय को जोड़ती हैं; यह दिखाती हैं कि परमेश्वर भक्ति-निष्ठा को कैसे मापते हैं।
संक्षिप्त निष्कर्ष
1 शमूएल 3:13 हमें यह सिखाता है कि परमेश्वर अपने चयनित व्यक्तियों और उनके परिवेश के प्रति निष्ठा से कार्य करते हैं। यदि परिवार-नेतृत्व अधर्म रोकने में नाकाम रहे, तो देव-न्याय आ सकता है। शमूएल की बुलाहट उसी विश्वास की शुरुआत है कि परमेश्वर अपने लोगों को मार्गदर्शन और शुद्धता के साथ आगे बढ़ाते हैं, भले ही रास्ते कठिन क्यों न हों।
नोट: इस पाठ पर हिंदी पवित्र पुस्तक HINIRV के अनुकूल भाव-भाषा में, मैथ्यू हेन्की (Matthew Henry), अलबर्ट बार्न्स (Albert Barnes) और एडम क्लार्क (Adam Clarke) के सार्वजनिक-घोषित विचारों से प्रेरित संक्षेप रूपांतर समाविष्ट हैं; इनमें उनके प्रमुख निष्कर्षों के अनुसार एकीकृत साक्ष्य प्रस्तुत किया गया है।