1 शमूएल 3:19 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और शमूएल बड़ा होता गया, और यहोवा उसके संग रहा, और उसने उसकी कोई भी बात निष्फल होने नहीं दी।

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1 शमूएल 3:19 पद-दर-पद बाइबल टीका

याद दिलाने वाला संदर्भ: 1 शमूएल 3:19

पढ़ने योग्य संदर्भ में यह वाक्य शमूएल के युवा समय की कहानी का समापन है, जब प्रभु शमूएल के साथ रहा और उसकी किसी भी बात को निष्फल नहीं किया गया। पहले भाग में शमूएल की निद्रा से जगना, ईश्वर की आवाज सुनना और यहोवा की दिशा में उसकी प्रतिक्रिया दिखती है; अंत में यह उद्धृत होता है कि यहोवा ने उससे जो कहा, उसे शमूएल ने सच माना और वह आगे बढ़ता गया। यह verse इस बात का संकेत है कि परमेश्वर जो चाहता है, वह न केवल शत-प्रतिशत सच रहता है, बल्कि उसकी योजना के अनुसार उसका सेवक भी दृश्य-ध्वनि में निर्देश प्राप्त करता है।

केंद्रीय अर्थ

इस वचन में तीन बातें स्पष्ट हैं: (1) शमूएल का बढ़ना—धीरज और ईश्वरीय प्रवाह को स्वीकारना; (2) यहोवा का संग होना—ईश्वर का अनुग्रह और आर्त संगतता; (3) निष्फल न होना—ईश्वर के वचनों का प्रभावशील होना। जब शमूएल ने ईश्वर की आवाज सुनी, वह भय से नहीं, बल्कि विश्वास द्वारा प्रतिक्रिया देता है; ईश्वर ने उससे जो कहा, उसे उसने बिना हिचक चढ़ाई के माना और आगे बढ़ा।

महत्‍वपूर्ण विषय (two-three themes)

  • ईश्वर का व्यक्तिगत संचार: शमूएल के प्रकार से दिखता है कि भगवान युवाओं के बीच भी बोलते हैं और उनकी प्रतिक्रियाओं पर निर्भर रहते हैं।
  • विश्वासपूर्ण स्वीकृति: शमूएल ने तुरंत मान लिया कि आवाज परमेश्वर से है; यह विश्वास-संस्कार का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
  • निष्ठा और प्रेरणा: “उसकी कोई भी बात निष्फल नहीं दी” से संकेत मिलता है कि ईश्वर के वचनों में नियति और मार्गदर्शन दोनों होते हैं; शमूएल उनका पालन करता है और बढ़ता है।

सम्बद्ध आयतें (Cross-references)

• यशायाह 50:4-5—एक शिष्य के लिए प्रभु की आवाज़ सुनना और उसे स्वीकारना।

• यहह्यू 1:1-2—पुराने समय से ईश्वर का बोलना और संतानों के लिए निर्देश।

• यूहन्ना 10:27—ईश्वर की आवाज़ मानना और उसकी राह पर चलना।

व्यावहारिक विचार

यदि हम भी ईश्वर की आवाज़ सुनते हैं, तो मन शांत रखें, भय न रखें, और विश्वास से उत्तर दें। छोटे-से-छोटे अवसरों पर भी निर्देश मिलते हैं; यहूद-प्रेरणा है कि परमेश्वर संग रहता है और हमारी बातों को निष्फल नहीं करता।]

संक्षिप्त सार

शमूएल 3:19 में यह स्पष्ट शब्द है कि परमेश्वर ने उसे मार्गदर्शित किया और उसका साथ बना रहा; जैसे-जैसे वह बढ़ता गया, ईश्वर उसके साथ बना रहा और उसकी हर बात सफल रही। यह हमारे लिए प्रेरणा है कि ईश्वर चाहे कितनी भी छोटी आवाज क्यों न हो, यदि हमारे दिल में विश्वास है, तो His मार्गदर्शन को ग्रहण करना चाहिए।

पाद-समापन

यह verse एक मजबूत पाठ देता है—ईश्वर का सेवक बनने की राह में निष्ठा, विश्वास और अनुग्रह प्रमुख हैं।

कठोर उद्धरण (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke):

• "And Samuel grew, and the Lord was with him, and did not let any of his words fall to the ground." — यह फ्रेम यह दर्शाता है कि ईश्वर के संग रहने पर उसकी बातों का प्रभाव होता है।

• "The Lord was with him, and did not let any of his words fall to the ground." — Barnes/Clarke के सारभूत विचारों के समान भावनाओं का संयोग।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 शमूएल 3:19 समानांतर पद और संबंधित वचन

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उसने उससे कहा, “सुन, इस नगर में परमेश्‍वर का एक जन है जिसका बड़ा आदरमान होता है; और जो कुछ वह कहता है वह बिना पूरा हुए नहीं रहता। अब हम उधर चलें, सम्भव है वह हमको हमारा मार्ग बताए कि किधर जाएँ।”

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उत्पत्ति 39:2 (HINIRV) »
यूसुफ अपने मिस्री स्वामी के घर में रहता था, और यहोवा उसके संग था; इसलिए वह भाग्यवान पुरुष हो गया।* (प्रेरि. 7:9)

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यहोवा ने हन्ना की सुधि ली, और वह गर्भवती हुई और उसके तीन बेटे और दो बेटियाँ उत्‍पन्‍न हुईं। और बालक शमूएल यहोवा के संग रहता हुआ बढ़ता गया।

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