1 शमूएल 26:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

फिर जीपी लोग गिबा में शाऊल के पास जाकर कहने लगे, “क्या दाऊद उस हकीला नामक पहाड़ी पर जो यशीमोन के सामने है छिपा नहीं रहता?”

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1 शमूएल 26:1 पद-दर-पद बाइबल टीका

तत्काल सीन और पृष्ठभूमि

1 शमूएल 26:1 में फिर जीपी लोग गिबा में शाऊल के पास जाकर पूछते हैं कि क्या दाऊद उस पहाड़ी हकीला के पास जो यशीमोन के सामने है, छिपा नहीं है। यह घटना शाऊल की निरंतर खोज और दाऊद, जो जीवित रहने के लिए छिपकर यात्रा कर रहा है, के बीच की राजनीति और संघर्ष को दिखाती है। यह समय इस बात को उजागर करता है कि दाऊद पर कभी-न-खत्म पीछा कैसे चलता है, और परमेश्वर के विश्वास रखने वालों के लिए सुरक्षा की असुरक्षित-सुरंग बनती है।

ईश्वरीय विश्वास और शब्दों का संदेश

यह पाठ हमारे जीवन में डर एवं आत्म-रक्षा के बीच विश्वास की भूमिका पर विचार कराता है। शाऊल की निरंतरता यह दिखाती है कि इंसानी सत्ता कितनी आसानी से भय से निर्देशित हो जाती है, जबकि दाऊद एक बार फिर परमेश्वर के संरक्षण पर निर्भर रहने का संकेत देकर निकलता है। इस संदर्भ में परमेश्वर की योजना अपने servants को कठिन परिस्थितियों में भी मार्ग दिखाती है, भले ही मानवीय आंखों से वह असंभव प्रतीत हो।

मुख्य शब्दों और छायाओं की Clarification

  • हकीला पहाड़ी: यह एक शहरी-युद्ध या पहाड़ी क्षेत्र के नाम के रूप में प्रस्तुत है, जो दाऊद के अवसरवादी ठिकाने के रूप में दिखाई देता है।
  • यशीमोन के सामने: यह संदर्भ स्थानिक राजधानी-सीमा का संकेत देता है, ताकि पाठक जान सके कि दाऊद किस दिशा में छिपा है।

संबंधित पवित्र गद्य के अंश

परिणामी पाठों के साथ जुड़ाव बनाते हुए, नीचे तीन उल्लेख प्रासंगिक हैं:

  • 1 शमूएल 23:4-5 — दाऊद की फिर से परमेश्वर पर निर्भरता और मार्गदर्शन की खोज।
  • 1 शमूएल 24:4-7 — दाऊद का उद्धार और शाऊल के साथ करुणा-युक्त संकल्पना; शक्ति एक धर्मी दिल के भीतर रहती है।
  • भजन 27:5 — विपत्ति के समय परमेश्वर के शरण का आश्रय।

इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर अपने सेवकों को संकटों में सुरक्षा और दिशा देता है, और भय की रेखाओं को भी धुंधला कर देता है जब लोग विश्वास से चलते हैं।

आज का अनुप्रयोग

जीवन के कठिन दौर में हमें शाऊल-सा डर नहीं, बल्कि दाऊद-सा विश्वास धारण करना चाहिए। कभी-कभी हमारी सुरक्षा न करने वाले रास्ते भी परमेश्वर की योजना का भाग होते हैं; तो हमें भागते-छिपते समय भी परमेश्वर से आश्रय और संरक्षण की प्रार्थना करनी चाहिए। कमजोर क्षणों में भी जो लोग परमेश्वर के वचनों पर टिके रहते हैं, वे सही समय पर सत्य और न्याय प्राप्त कर सकते हैं।

क्लोजर संदर्भ

1) परमेश्वर पर भरोसा और मार्गदर्शन का महत्व—भय के सामने भी विश्वास की स्थिरता बनाए रखें।

2) राजसी सत्ता बनाम ईमानदार दिल की चेतना—दाऊद के अनुभव से सीखें कि बाहरी खतरे के बीच भी आंतरिक करुणा और शांति बनाए रखना कैसे संभव है।

3) सुरक्षा का स्रोत—कभी-कभी खतरे के क्षण में भी परमेश्वर देता है सुरक्षा का उपाय, जिसे हमारी प्रार्थना और विवेक से पहचानना चाहिए।

नोट: इस पाठ के लिए मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बर्न्स और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणी-रेखा से संचारित स्पंदन, उनके संक्षिप्त उद्धरण को केवल संदर्भ के लिए उपयोग में लाए गए हैं; विस्तृत उद्धरण यहाँ प्रस्तुत नहीं किया गया है, पर उनकी सोच इस सार में प्रतिध्वनित है कि परमेश्वर अपने सेवकों को संकटों में भी मार्ग दिखाता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 शमूएल 26:1 समानांतर पद और संबंधित वचन

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1 शमूएल 23:19 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
1 शमूएल 23:19 (HINIRV) »
तब जीपी लोग गिबा में शाऊल के पास जाकर कहने लगे, “दाऊद तो हमारे पास होरेश के गढ़ों में, अर्थात् उस हकीला नामक पहाड़ी पर छिपा रहता है, जो यशीमोन के दक्षिण की ओर है।

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यहोशू 15:55 (HINIRV) »
फिर माओन, कर्मेल, जीप, युत्ता,

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