1 शमूएल 26:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

दाऊद ने अबीशै से कहा, “उसे नष्ट न कर; क्योंकि यहोवा के अभिषिक्त पर हाथ चलाकर कौन निर्दोष ठहर सकता है।”

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1 शमूएल 26:9 पद-दर-पद बाइबल टीका

1 शमूएल 26:9 — पवित्र अभिषिक्त पर अधिकार न डालें

इस प verse में दाऊद ने अभिशप्त या विरोधी नहीं, बल्कि अभीशै से कहा: "उसे नष्ट न कर; क्योंकि यहोवा के अभिषिक्त पर हाथ चलाकर कौन निर्दोष ठहर सकता है।" यह कहानी वह समय दर्शाती है जब दाऊद ने यहोवा के आह्वान और प्रभुत्व का सम्मान किया, भले ही वह खुद के लिए मिला हुआ अवसर होता। स्वयं की ताकत से किसी को नुकसान पहुँचाने के बजाय उसने परमेश्वर के चयनित निंदित पर भी न्याय का हाथ उठाने से परहेज किया।

केंद्रीय अर्थ

यहूदियों की भरी सभा में दाऊद ने स्पष्ट किया कि विरोधी को चुन-चुनकर मारना या उसे समाप्त करना ईश्वर की योजना को चुनौती देना है। वह मानता है कि परमेश्वर पहले से ही अपनी पसंद और अभिषेक के मार्ग को नियंत्रित कर रहा है। इसलिए न तो संघर्ष के समय अपने हाथ उठाता है, न ही शत्रु के साथनीति अपनाता है; बल्कि वह प्रभु के हक़ में निर्दोषता और ढाल बनता है।

मुख्य विषय

  • ईश्वर के अभिषिक्त के प्रति सम्मान: अभिषिक्त पर हिंसा न करना एक नैतिक और आध्यात्मिक नियम है, जो परमेश्वर की योजना की ओट में न्याय की रक्षा करता है।
  • प्रकृति की सुरक्षा बनाम आत्म-हित: दाऊद ने अपने आत्म-संरक्षण के बजाय परमेश्वर के उद्देश्य को प्राथमिक माना।
  • धैर्य और विश्वास: अभीशै के बारे में निर्णय लेने से पहले दाऊद ने परमेश्वर की ओर भरोसा रखा और मानव-हथियार की जगह ईश्वर के निर्णय पर निर्भर रहा।

संबंधित पवित्र उपदेश (cross-references)

– उत्पत्ति 45:5-8 के संदर्भ में पूर्व निर्धारित योजना और परमेश्वर की संचालना का विश्वास। छोटे से विवरण: पिता की इच्छा के पीछे परमेश्वर की कृपा भी है।

– प्रेरितों के काम 4:29-31, 31: प्रभु के दायरे में विश्वासियों की सुरक्षा और परिशुद्ध निर्णयों की अनुभूति।

– रोमियों 12:19-21, जहां प्रेरित पॉल निर्दोषता के साथ अन्याय को छोड़कर प्रभु को छोड़कर नहीं, बल्कि बुराई को परास्त करने का मार्ग दिखाते हैं।

व्यावहारिक अनुशीलन

जीवन में जब हमें किसी के विरुद्ध अन्याय का अवसर मिले, तब धैर्य और विनम्रता से विचार करें: क्या यह मेरी तरफ से उचित है या परमेश्वर के अभिषिक्त के विरुद्ध जाएगा? दाऊद की तरह, हमें पहले परमेश्वर की मार्गदर्शक नीति पर भरोसा रखना चाहिए, और जब जरूरत हो, तो निष्कर्ष gently परखना चाहिए कि क्या क्षमा या सुरक्षा अधिक महत्त्वपूर्ण है।

संक्षिप्त समापन

यहVerse हमारे लिए एक सिखावन है कि ईश्वर के अभिषिक्त के प्रति सम्मान सर्वोपरि है। हर परिस्थिति में न्याय और कृपा के साथ चलना, अपने निर्णयों को परमेश्वर के नियंत्रण के अधीन रखना, और ऐसी कार्रवाई से बचना जो ईश्वर की योजनाओं में अवरोध डाले।

उद्धरण नोट

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1 शमूएल 26:9 समानांतर पद और संबंधित वचन

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2 शमूएल 1:14 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
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दाऊद ने उससे कहा, “तू यहोवा के अभिषिक्त को नष्ट करने के लिये हाथ बढ़ाने से क्यों नहीं डरा?”

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और दाऊद ने उससे कहा, “तेरा खून तेरे ही सिर पर पड़े; क्योंकि तूने यह कहकर कि मैं ही ने यहोवा के अभिषिक्त को मार डाला, अपने मुँह से अपने ही विरुद्ध साक्षी दी है।”

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वह अपने जनों से कहने लगा, “यहोवा न करे कि मैं अपने प्रभु से जो यहोवा का अभिषिक्त है ऐसा काम करूँ, कि उस पर हाथ उठाऊँ, क्योंकि वह यहोवा का अभिषिक्त है।”

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