1 शमूएल 24:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

वह अपने जनों से कहने लगा, “यहोवा न करे कि मैं अपने प्रभु से जो यहोवा का अभिषिक्त है ऐसा काम करूँ, कि उस पर हाथ उठाऊँ, क्योंकि वह यहोवा का अभिषिक्त है।”

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1 शमूएल 24:6 पद-दर-पद बाइबल टीका

संक्षिप्त अर्थ और मुख्य संदेश

1 शमूएल 24:6 में कहा गया है कि दाऊद ने अपने लोगों से कहा, “यहोवा न करे कि मैं अपने प्रभु से जो यहोवा का अभिषिक्त है ऐसा काम करूँ, कि उस पर हाथ उठाऊँ, क्योंकि वह यहोवा का अभिषिक्त है।” इसका साक्षात्कार यहोवा के अभिषिक्त व्यक्ति के सम्मान और प्रतिशोध के बजाय परमेश्वर के कानून के प्रति आस्था और विश्वास के निर्णायक मूल को दर्शाता है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यह घटना दाऊद की भागदौड़ के समय घटित होती है जब वह जंगल में रहता है और शाऊल उसका पीछा कर रहा है। शकित, दाऊद और उसके पुरोहितों ने समर्पण के साथ प्रकट किया कि शासक का अपमान या सिंहासन-आवरण, अपने समय के प्रभु की योजनाओं के अनुसार ही होना चाहिए। यह वाक्य “यहोवा का अभिषिक्त है” के संरक्षण को केंद्र में रखता है, जो देह-स्वामित्व से परे परमेश्वर की नियुक्ति की महत्ता को मान्यता देता है।

व्याख्यात्मक अवलोकन

• दाऊद अपनी सेना के साथ यह पुष्टि करता है कि शासन के विरुद्ध कार्रवाइयाँ परमेश्वर की योजना के विरुद्ध जाएँ, यह उसकी नैतिक दृढ़ता और परमेश्वर के प्रचारक के प्रति सम्मान का संकेत है।

• “अभिषिक्त” शब्द यहाँ केवल सत्ता की चीज़ नहीं, बल्कि परमेश्वर की नियुक्ति का प्रमाण है—यानी जो भी राजा होता है, उसे ईश्वर की नियुक्ति के साथ स्वीकारना चाहिए।

• यहाँ प्रतिशोध नहीं, बल्कि संयम और भरोसा दिखता है कि वास्तविक न्याय ईश्वर ही कराते हैं, और मानवीय हाथ उठाने से पहले परमेश्वर की अनुमति और समय का विचार करना चाहिए।

2-3 प्रमुख उद्धृत विचार (संकेतित संदिग्ध उद्धरणों के स्थान पर संकलन)

  • यहोवा के अभिषिक्त के साथ व्यवहार करते समय नैतिक विवेक और धैर्य का पालन करना—यह दाऊद की धार्मिक-संयमिता को दर्शाता है।
  • किसी की सत्ता का सम्मान, भले ही वह विरोधी क्यों न हो; क्योंकि परमेश्वर ने उसे स्थापित किया है।

संलग्न क्रॉस-रेफरेंसेस और उनके संक्षिप्त अर्थ

• 1 शमूएल 26:9— दाऊद के लिए अभिषिक्त का सम्मान बनाए रखना किस प्रकार जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में भी सत्यनिष्ठा को बनाए रखता है।

• नीतिवचन 16:12— राजा के लिए धार्मिकता और न्याय में परमेश्वर की कृपा को स्थान देना चाहिए।

• प्रेरितों के काम 23:5— प्रेरित पॉल की स्थिति में भी आस्थावान लोग परमेश्वर के अनुसार निर्णय लेते हैं, इंसानी दाम्पत्य के बजाय ईश्वर के आह्वान के अनुरूप।

संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष

  • किसी भी सत्ता या व्यक्ति के विरुद्ध बंदूक या अपहरण से नहीं, बल्कि परमेश्वर के कानून के अनुरूप आचरण से संघर्ष हल करें।
  • जब दिल में प्रतिशोध का भाव उठे, तब यह याद रखें कि ईश्वर के अभिषिक्त पर हाथ उठाने के लिए उनकी अनुमति चाहिए; नैतिक साहस और धैर्य बनाये रखें।

मर्यादित निष्कर्ष

यह साधारण-सी पर गहरी सीख देती है: प्रभु के अभिषिक्त के प्रति सम्मान बनाये रखना, चाहे परिस्थिति कैसी भी हो। परमेश्वर के समय और न्याय पर भरोसा रखने में हमारी निष्ठा सुरक्षित रहती है, और यही सच है जो दाऊद के व्यवहार में झलकता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 शमूएल 24:6 समानांतर पद और संबंधित वचन

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