Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 21:1 1 राजाओं 21:2 1 राजाओं 21:3 1 राजाओं 21:4 1 राजाओं 21:5 1 राजाओं 21:6 1 राजाओं 21:7 1 राजाओं 21:8 1 राजाओं 21:9 1 राजाओं 21:10 1 राजाओं 21:11 1 राजाओं 21:12 1 राजाओं 21:13 1 राजाओं 21:14 1 राजाओं 21:15 1 राजाओं 21:16 1 राजाओं 21:17 1 राजाओं 21:18 1 राजाओं 21:19 1 राजाओं 21:20 1 राजाओं 21:21 1 राजाओं 21:22 1 राजाओं 21:23 1 राजाओं 21:24 1 राजाओं 21:25 1 राजाओं 21:26 1 राजाओं 21:27 1 राजाओं 21:28 1 राजाओं 21:29



1 राजाओं 21:3 पर टिप्पणी — संदर्भ और अर्थ
यह पद राजा ऐहोब के इतिहास की एक निर्णायक योजना का भाग है, जब नाबोत का वयस्कता के समय गिब़्आन के बग़ीचे पर एक राजनीतिक मांग सामने आती है। आहा-ब के शासन के दौरान इस बग़ीचे को पाने की लालसा उसकी सत्ता-लालसा का उत्स है, पर नाबोत परमेश्वर की प्रेरित संपत्ति के प्रति अपनी निष्ठा से पीछे नहीं हटते। नाबोत कहते हैं कि यह भाग उनके पुरखाओं का अभिन्न हिस्सा है और यह भगवान की हिफाज़त में है; वे परिणाम से नहीं डरते बल्कि अपनी आस्थाभक्ति को बचाते हैं।
केंद्रीय अर्थ
यह verse समझाता है कि नैतिक और आध्यात्मिक सिद्धांत सत्ता के दबाव से ऊपर है। नाबोत का उत्तर स्पष्ट है: भाग-स्वत्व केवल परमेश्वर का है, और मनुष्यों की भविष्यवाणी या भोग के लिए नहीं बदला जा सकता। ऐहोब की अनुमति मांग एक भयावह परीक्षण है कि क्या राज्य-लक्ष्य परमेश्वर की आज्ञाओं से ऊपर हो सकता है। नाबोत की दृढ़ता परमेश्वर की व्यवस्था के प्रति अडिग आस्था का उद्घाटन है।
मुख्य विषय
संबद्ध पारायणियाँ
1) 1 राजाओं 21:4-16 — ऐहोब की बह रही लालच और नाबोत के इनकार के परिणामों का आगे का दृश्य, जिसमें एक धार्मिक-राजनीतिक संकट उभरता है।
2) 2 समvány 23:7-8 — परमेश्वर के स्थान-भक्ति के विरुद्ध जनता की अंध-आस्था पर चेतावनी।
3) प्रेरितों के काम 5:29 — भगवान की आज्ञाओं से ऊपर मानवीय आदेशों को न मानना चाहिए, जब वह दैवी निर्देश से टकराते हैं।
व्यावहारिक चिंतन
हमारे समय में भी कई झंझावात होते हैं जहाँ सामाजिक-राजनीतिक दबाव ईमानदारी और नैतिकता पर चुनौती डालते हैं। नाबोत का उत्तर हमें सिखाता है कि सत्यमार्ग, जब भी वह भगवान की धरोहर से जुड़ा हो, कठिन हो सकता है पर साहस और आत्म-समर्पण के साथ निभाया जाना चाहिए। हमारी जीवन-परिस्थितियों में, चाहे वह पैसे, प्रतिष्ठा, या सुरक्षा का दबाव हो, परमेश्वर के निर्देश को सर्वोच्च मानना हमारे लिए परमेश्वर-प्रेम की सच्ची परीक्षा है।
संक्षिप्त समापन
नाबोत का स्पष्ट इनकार यह बताता है कि हर अधिकार-स्वामित्व, हर भूमि-हक़, और हर धरोहर परमेश्वर की है। ऐहोब के समय का यह संघर्ष हमें याद दिलाता है कि ईमानदार विश्वास और परमेश्वर-आज्ञा के प्रति वफादारी किसी भी राजनीतिक लाभ से ऊपर है।
क्रॉस-वर्ड संदर्भ में संक्षेप:
कुल मिलाकर, यह verse हमें यह स्मरण कराती है कि परमेश्वर के पास जो धरोहर है, उसे कभी भी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं चुकाया जा सकता; सच्ची भक्ति और सत्य-निष्ठा ही एक समाज को सच्चे आशीर्वाद के मार्ग पर ले जा सकती है.
महत्वपूर्ण उद्धरण (थोड़े हिस्से) जो सार्वजनिक-डोमैन टिप्पणीकारों से निकली पंक्तियाँ संदर्भित हैं: Matthew Henry और Albert Barnes के पुराने-प्रशंसित विवेचन में ऐसी अनुभूतियाँ मिलती हैं जो इस घटना की नैतिक प्रेरणा को बखूबी उजागर करती हैं।