Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीमत्ती 1:1 बाइबल पद की व्याख्या
मत्ती 1:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
अब्राहम की सन्तान, दाऊद की सन्तान, यीशु मसीह* की वंशावली*।
मत्ती 1:1 पद-दर-पद बाइबल टीका
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मत्ती 1:1 समानांतर पद और संबंधित वचन
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उत्पत्ति 22:18 (HINIRV) »
और पृथ्वी की सारी जातियाँ अपने को तेरे वंश के कारण धन्य मानेंगी: क्योंकि तूने मेरी बात मानी है।”

रोमियों 1:3 (HINIRV) »
अपने पुत्र हमारे प्रभु यीशु मसीह के विषय में प्रतिज्ञा की थी, जो शरीर के भाव से तो दाऊद के वंश से उत्पन्न हुआ।

गलातियों 3:16 (HINIRV) »
अतः प्रतिज्ञाएँ अब्राहम को, और उसके वंश को दी गईं; वह यह नहीं कहता, “वंशों को,” जैसे बहुतों के विषय में कहा, पर जैसे एक के विषय में कि “तेरे वंश को” और वह मसीह है। (मत्ती 1:1)
पंक्ति का तुरन्त संदर्भ: मत्ती 1:1
यह वचन नया समझ देता है कि यीशु मसीह की वंशावली कितनी विशिष्ट और परम उद्देश्य के साथ चुनी गई है। अब्राहम की सन्तान, दाऊद की सन्तान, यीशु मसीह की वंशावली—ये शब्द एक ही पन्ने पर तीन बार महत्व रखते हैं: पूर्वजों का इतिहास, दाऊदी वंश का राजसी अधिकार और मसीह का आगमन। यह पाठ बताता है कि ईश्वर अपने वचन के अनुसार इतिहास को उद्धार के योजना के अनुसार क्रमबद्ध करता है।
ईश्वर का भाष्य और विश्वास
यह पाठ हमें यह संकेत देता है कि ईश्वर अपने चुनाव और वचनों से विश्व इतिहास को मोड़ते हैं। ग्रंथ यह दिखाता है कि मसीह का आगमन एक क़दम नहीं, बल्कि पुरातन वंशानुक्रम का पूर्णता प्राप्त करना है। ईश्वर की योजना कभी रुकती नहीं; वह पिताओं के वफादारी के आधार पर अपनी प्रतिज्ञाओं को पूरा करता है।
महत्त्वपूर्ण शब्द और छवियाँ
अनुदेशित संस्करणों से सम्बद्ध पाठ
यहाँ तीन प्रमुख पोशाकें मिलती हैं:
क्रॉस-रेफरेंसेस (संलग्न समझ)
1) रा. 12:3 के साथ जोड़कर देखें कि एक राजा और आशीष का केंद्र कैसे यह वंशावली दिखाती है; 2) लूका 3:23-38 में यीशु की वंशावली नई दिशा देती है कि किस प्रकार मसीह सभी मानवता के लिए उद्धार का स्रोत हैं; 3) मत्ती 28:18-20 में मिशन का विस्तार भी इसी राजसी और उद्धार के दृश्यों को विस्तृत करता है।
इन क्रॉस-रेफरेंसेस में विचार यह है कि वंशावली सिर्फ पूर्वजों का सार नहीं, बल्कि यीशु के जन्म से पुरानी प्रतिज्ञाओं की पुष्टि और नई आशीष की शुरुआत है।
आज के समय में व्यावहारिक उपयोग
यह वंशावली हमें यह सिखाती है कि ईश्वर के वाद समय के अनुसार पूरे होते हैं—चाहे वह व्यक्तिगत जीवन में हो या समुदाय के इतिहास में। विश्वासियों के लिए इसका संदेश है कि हम भी ईश्वर की योजना के हिस्सा बनने के लिए तैयार रहें, चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों। आदर्श यह है कि हम अपने जीवन को ईश्वर की दया-योजना के अनुरूप ढालें और अपने परिवार, समुदाय, और बाइबल के पाठों के साथ एक सुसंगत इतिहास रचें।
संक्षेपित समापन
अब्राहम से दाऊद तक का वंश मार्ग, और फिर यीशु के आगमन से पूर्ण होता है। यह एक ठोस स्मरण है कि ईश्वर के वचन और उसकी योजना इतिहास में कैसे घूमते हैं, ताकि मानवता को उद्धार मिल सके—यही मसीह की वंशावली का मूल संदेश है।