Old Testament
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मत्ती 1:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यहूदा और तामार से पेरेस व जेरह उत्पन्न हुए, और पेरेस से हेस्रोन उत्पन्न हुआ, और हेस्रोन से एराम उत्पन्न हुआ।
मत्ती 1:3 पद-दर-पद बाइबल टीका
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मत्ती 1:3 समानांतर पद और संबंधित वचन
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उत्पत्ति 38:29 (HINIRV) »
जब उसने हाथ समेट लिया, तब उसका भाई उत्पन्न हो गया। तब उस दाई ने कहा, “तू क्यों बरबस निकल आया है?” इसलिए उसका नाम पेरेस रखा गया।

उत्पत्ति 46:12 (HINIRV) »
यहूदा के एर, ओनान, शेला, पेरेस, और जेरह नामक पुत्र हुए तो थे; पर एर और ओनान कनान देश में मर गए थे; और पेरेस के पुत्र, हेस्रोन और हामूल थे।

उत्पत्ति 38:24 (HINIRV) »
लगभग तीन महीने के बाद यहूदा को यह समाचार मिला, “तेरी बहू तामार ने व्यभिचार किया है; वरन् वह व्यभिचार से गर्भवती भी हो गई है।” तब यहूदा ने कहा, “उसको बाहर ले आओ कि वह जलाई जाए।”
मत्ती 1:3 का दृश्य: पेरेस, हेस्रोन, एराम तक क्रम
इस पद में यीशु के वंश-वृक्ष की शुरुआत हमारे सामने एक सीधी पंक्ति के बजाय कई पीढ़ियों के क्रम को प्रस्तुत करती है। यहूदा और तामार से पेरेस और जेरह, फिर पेरेस से हेस्रोन और हेस्रोन से एराम—ये नामंय क्रम दिखाते हैं कि कैसे परमेश्वर ने शरीर-वंश को संभाला और अपनी योजना के अनुसार अवरोधों के बावजूद उद्धार के लक्ष्य को पूरा किया। इतिहास-संदर्भ में यहूदियों के लिए यह एक स्मरण है कि अनुशासन, वंशावली और परम-ज्ञानी योजना एक दूसरे से अलग नहीं होते; हर vida, हर पीढ़ी एक लक्ष्य के लिए चुनी गई है।
मुख्य अर्थ
यह वंशावली बताती है कि यीशु मसीह का राजवंश एक सामान्य मानव इतिहास से गुज़र कर आया है—क्योंकि परमेश्वर ने अपने उद्धारकार्य को मानव-कथा के भीतर स्थापित किया है। यहूदा से तामार और पेरेस, जेरह, हेस्रोन, एराम—इन नामों के माध्यम से यह दिखता है कि पाप और अस्थिरता भी ईश्वर की नेतृत्व-योजना को नहीं रोक पाते। फिर भी हर पीढ़ी एक चरण है जो प्रभु के आने के लिए निर्धारित था।
केंद्रीय विषय
1) वंशावली की पवित्रता के साथ इतिहास की वास्तविकता: परमेश्वर अपने उद्धार-कार्य के लिए मानवीय इतिहास को नहीं छोड़ते—दूर तक नहीं, बल्कि उसे उनके उद्देश्य में ढालते हैं।
2) क्रम और योजना का मेल: दिखता है कि कैसे अल्प-जानकारी में भी परमेश्वर की महिमा खुलती है; हर पीढ़ी में वह युवक, वृद्ध, और चुनौतीपूर्ण स्थिति—सब कुछ एक लक्ष्य की ओर ले जा रहा है।
संवद्ध दृश्यों के भीतर से दो–तीन थीम
अनुचित से संबंधित पठन-परिच्छेद
– पुराने नियम की वंशावली पंरपराओं के साथ मिलकर यीशु को परमेश्वर के अनुग्रह को दिखाती है, जैसे 1:2–3 में कहा गया है कि पिता के वंश के क्रम से यीशु का जन्म होता है।
– प्रेरित पेत्रुस के अनुसार, “आत्मा के काम से” प्रेरित होकर मसीह के जन्म के समय भी इतिहास का नियम चलता रहा (याद रहे कि यह पंक्ति पूरी कविता नहीं है, पर इसके प्रमुख आशय से जुड़े हैं)।
– पौलुस के विचार से, सब राष्ट्र यीशु में आशीष पाते हैं, और यही वंशावली इस बिंदु पर है कि विश्व-स्तरीय उद्धार एक मानव-यात्रा के माध्यम से आता है।
व्यावहारिक विचार
1) विश्वास की स्मृति मजबूत करें: परमेश्वर जिस तरह समय-समय पर एक योजना को आगे बढ़ाते हैं, हम भी अपने जीवन में परिस्थितियों के बावजूद विश्वास बनाए रखें।
2) इतिहास को उद्धार की कड़ी समझें: अपने परिवार, समुदाय या जीवन के विभाजन-क्रम को अपनी दिशा देने वाला भाग मानें; आप भी परमेश्वर की योजना का हिस्सा हैं।
संक्षिप्त निष्कर्ष
मत्ती 1:3 हमें दिखाता है कि यीशु का जन्म एक सामान्य मानव इतिहास के भीतर हुआ—पर यह भी प्रमाण है कि परमेश्वर की उदार योजना हर अंश में परिलक्षित है। यहूदा से पेरेस तक की यह वंशावली हमें यह याद दिलाती है कि इतिहास की हर कड़ी, हर नाम, उद्धार के महान उद्देश्य की ओर समर्पित है।
क्रॉस रेफरेंसेस (संक्षेप में)
– इब्रानियों 1:1-2: समय-समय पर परमेश्वर ने पूर्व-घोषित उपायों से अपने पुत्रों के द्वारा मार्ग दिखाया; यह वंशावली उसी विचार को आगे बढ़ाती है।
– रोमियों 15:12: एब्राहाम के वंशन से देशों तक उद्धार की आशा का विस्तार; यीशु इस योजना का प्रमुख केंद्र हैं।
– मत्ती 28:18-20:uddehaar के कार्य के लिए चोटी की परिपक्वता; संसार भर में शिष्य बनाना इस क्रम को पूर्ण करता है।
उद्धरण नोट: इस पंक्ति के लिए Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सीधे पूर्ण उद्धरण अपेक्षित हैं; नीचे दी गई भाषा में उनकी संक्षिप्त धारणा सम्मिलित है, यदि किसी कथन की शाब्दिक-पंक्ति उपलब्ध हो तो उसे उद्धृत किया गया है:
Matthew Henry: “...”, Albert Barnes: “...”, Adam Clarke: “...”