Old Testament
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मत्ती 1:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और बन्दी होकर बाबेल जाने के समय में योशिय्याह से यकुन्याह*, और उसके भाई उत्पन्न हुए। (यिर्म. 27:20)
मत्ती 1:11 पद-दर-पद बाइबल टीका
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मत्ती 1:11 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यिर्मयाह 27:20 (HINIRV) »
जिन्हें बाबेल का राजा नबूकदनेस्सर उस समय न ले गया जब वह यहोयाकीम के पुत्र यहूदा के राजा यकोन्याह को और यहूदा और यरूशलेम के सब कुलीनों को बन्दी बनाकर यरूशलेम से बाबेल को ले गया था,

यिर्मयाह 52:28 (HINIRV) »
जिन लोगों को नबूकदनेस्सर बँधुआ करके ले गया, वे ये हैं, अर्थात् उसके राज्य के सातवें वर्ष में तीन हजार तेईस यहूदी;

दानिय्येल 1:2 (HINIRV) »
तब परमेश्वर ने यहूदा के राजा यहोयाकीम को परमेश्वर के भवन के कई पात्रों सहित उसके हाथ में कर दिया; और उसने उन पात्रों को शिनार देश में अपने देवता के मन्दिर में ले जाकर, अपने देवता के भण्डार में रख दिया। (2 इति. 36:7)
यह कियGo verse क्यों मायने रखता है
मत्ती 1:11 स्पष्ट करता है कि दाविद की वंशावली में एक निश्चित क्रम और इतिहास है: योशिय्याह के समय से बाबेल की captivity तक का इतिहास, और यकुन्याह के जन्म से पहले की पंक्ति। यह पाठ हमें विश्वास देता है कि परमेश्वर की योजना समय के हर क्षण में चलती है — यहां तक कि इतिहास के दुखद दौरों में भी। इससे यह समझ आता है कि ईश्वर अपने लोगों के उद्धार के लिए क्रमबद्ध तरीके से आगे बढ़ते रहते हैं।
पारिभाषिक संदर्भ और मूल संदर्भ
यह शास्त्रीय शृंखला हमें बताती है कि मसीह के वंशावली-पथ में बाबेल के समय की घटनाएं एक बड़े इतिहास-चक्र का हिस्सा हैं। यिर्मिया 27:20 तथा अन्य पुराने प्रमाणों के साथ यह मिलता है कि बाबेल जा कर लौटना और शासन व्यवस्था का परिवर्तन आने वाले वर्षों में ईश्वर के निर्माण-योजना का हिस्सा रहा है। इस दृष्टि से मत्ती 1:11 एक पुल की तरह है: यह अतीत के दुःखों को भविष्य की आशाओं से जोड़ देता है।
मुख्य संदेश
इस आयत का मूल संदेश यह है कि परमेश्वर अपने चहेतों के इतिहास को भूलते नहीं, बल्कि उसे एक पवित्र उद्धार-योजना के अनुसार संवारते हैं। बाबेल captivity के समय का उल्लेख यह संकेत देता है कि दायरे के भीतर भी ईश्वर की कृपा और प्रेरणा बनी रहती है। इससे यह स्पष्ट होता है कि इतिहास के हर मोड़ पर मसीह के जन्म की तैयारी चलती है—यही कारण है कि वंशावली गढ़ी जाती है ताकि लोग जान सकें कि उद्धार कैसे पृथ्वी पर आता है।
आध्यात्मिक विषय और आशय
कुछ विश्वसनीय cross-references
- 2 इतिहास 36:22-23: बाबेल से लौटना और यहूदा-देश के पुनर्निर्माण पर परमेश्वर की कृपा दिखती है; इसका तात्पर्य यह है कि दुष्काल के बीच भी ईश्वर का वादा स्थिर रहता है।
- यिर्मिया 29:10: बाबेल captivity के बाद की अवधि में ईश्वर की योजना का आश्वासन; यह दिखाता है कि वर्तमान दुख भी भविष्य के उद्धार के लिए तैयारी है।
- मत्ती 1:21 (कथा से जुड़ा): मसीह का नाम “ईश्वेर-याह” के रूप में उद्धार का संकेत बनता है; इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि वंशावली केवल ऐतिहासिक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि उद्धार की घोषणा है।
संक्षिप्त विचार-विमर्श
यही आयत आधुनिक पाठक के लिए भी एक प्रेरणा है: कठिन समय के बीच faith को बनाए रखना और जानना कि ईश्वर की योजना इतिहास के हर थपेड़ के पीछे चलती है। जैसे बाबेल-युग में भविष्य के राजा और उद्धारकर्ता के लिए सड़क तैयार होती है, वैसे ही हर पीढ़ी को भी परमेश्वर के वचन के साथ जुड़ना चाहिए ताकि अंततः मसीह का स्वागत Happily हो सके।
चोटे-चोटे उद्धरण
एडम क्लार्क और अन्य पब्लिक-डोमेन टिप्पणीकारों के समान स्वर में, यह विचार उभरता है कि इतिहास के हर मोड़ पर ईश्वर की सत्ता और वचन की प्रमाणिकता दिखती है; विपक्ष के बीच भी उसके वादे स्थिर रहते हैं।
निष्कर्ष devotional reflection
जब हम बाबेल के समय और योशिय्याह-यकुन्याह की वंशावली को देखते हैं, तो हमें अपने जीवन के अतीत-चक्र पर भी दृष्टि बनानी चाहिए। परमेश्वर पुराने इतिहास को नया प्रकाश देता है—हमारे व्यापार, दुख और परीक्षा के बीच भी। मसीह के जन्म के लिए मार्ग तैयार रहता है, और उसका उद्धार हर पीढ़ी के भरोसे पर टिका रहता है। इसे याद रखें: ईश्वर हमारी प्रार्थनाओं को सुनते हैं और समय आने पर पूर्णता के साथ उत्तर देते हैं।