Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
दानिय्येल 1:1 दानिय्येल 1:2 दानिय्येल 1:3 दानिय्येल 1:4 दानिय्येल 1:5 दानिय्येल 1:6 दानिय्येल 1:7 दानिय्येल 1:8 दानिय्येल 1:9 दानिय्येल 1:10 दानिय्येल 1:11 दानिय्येल 1:12 दानिय्येल 1:13 दानिय्येल 1:14 दानिय्येल 1:15 दानिय्येल 1:16 दानिय्येल 1:17 दानिय्येल 1:18 दानिय्येल 1:19 दानिय्येल 1:20 दानिय्येल 1:21



दानीयेल 1:2 — तत्कालीन दृश्य और आध्यात्मिक संदेश
कथन का आरम्भ दानीयेल के समय के एक कठोर राजनीतिक-धार्मिक चरण से जुड़ता है, जब बाबिल की साम्राज्ञी ने यहूदा के राजा यहोयाकीम को परमेश्वर के भवन के कुछ पात्रों के साथ निर्गत किया। यह पंक्ति अपने आप में परमेश्वर की क्रिया-प्रभाव और מדיניות के गहरे आयाम खोलती है: सत्ता के बदले में परमेश्वर की वचन-सत्यता और न्याय की दिशा स्पष्ट होती है।
यह पाठ परमेश्वर या विश्वास के बारे में जो बताता है
यहाँ परमेश्वर यहूदियों के कर्मों की प्रतिफल प्रतिक्रिया देता है—क्योंकि वे अपने आराध्य से निगाहें हटा लेते हैं। परन्तु यह भी दिखता है कि परमेश्वर की सुरक्षा और नियंत्रण अधिक व्यापक है; राजा का हस्तांतरण और वह शिनार में ले जाना एक शासकीय क्रिया है, जो परमेश्वर की योजना के अधीन है। विश्वासियों के लिए यह स्मरण दिलाता है कि कठिन समय में भी परमेश्वर की योजना पर विश्वास रखना है, भले ही परिस्थितियाँ प्रतिकूल दिखें।
महत्वपूर्ण शब्दों/छवियों की स्पष्टता
सम्बन्धित पवित्र ग्रंथ
इन पंक्तियों से जुड़ी धारणा के सहारे कुछ अन्य संदर्भ होते हैं: • यहूदा के पथ-चयन के समय का अध्ययन (2 इतिहास 36:7) — एक समान निष्कर्ष देता है कि परमेश्वर की न्याय-धारा सत्ता-प्रधान है। • परमेश्वर की दया और दायित्वपूर्ण नियंत्रण के चित्रण (आमीन-उद्धरण के साथ) — विश्वासियों को संघर्ष के बीच में बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
आज के जीवन में अनुप्रयोग
1) सत्ता-विपरीत परिस्थितियों में भी परमेश्वर के Sovereignty पर भरोसा: हमारी योजनाएँ चाहे कितनी भी मजबूत क्यों न हों, परमेश्वर के नियंत्रण से बाहर नहीं।
2) आस्था बनाये रखना: मंदिर-चित्र की तरह, हमारे जीवन के मूल मान्यताओं—ईमान, प्रार्थना, नैतिकता—को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है, भले ही यह वातावरण विपरीत हो।
3) पृश्चाताप और दया की राह: प्रभु की योजना में परिवर्तन संभव है; विश्वासियों के लिए यह संकेत है कि नम्रता और समर्पण से पुनःस्थापना मिलती है।
संक्षिप्त समेकन
इस verse के द्वारा दिखाया गया है कि परमेश्वर न्यायी और नियंता है, परन्तु वह अपने लोगों के साथ आशा और उद्धार की राह भी रखते हैं। इतिहास की यह घटना हमारे लिए एक प्रेरणा है कि कठिन समय में भी परमेश्वर के विधान-नियमों के प्रति निष्ठा बनाए रखें, क्योंकि वही हमारी सुरक्षा और भविष्य निर्धारित करते हैं।
उद्धरण संकेत: - Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरी-टिप्पणियाँ से अपेक्षित छोटे उद्धरण उपलब्ध हैं: “...,” “...,” “...” (उद्धरण-टिप्पणियाँ केवल यदि उपलब्ध हों, पाठ के भीतर संक्षेप में दर्शे जाएंगे).