Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
दानिय्येल 1:1 दानिय्येल 1:2 दानिय्येल 1:3 दानिय्येल 1:4 दानिय्येल 1:5 दानिय्येल 1:6 दानिय्येल 1:7 दानिय्येल 1:8 दानिय्येल 1:9 दानिय्येल 1:10 दानिय्येल 1:11 दानिय्येल 1:12 दानिय्येल 1:13 दानिय्येल 1:14 दानिय्येल 1:15 दानिय्येल 1:16 दानिय्येल 1:17 दानिय्येल 1:18 दानिय्येल 1:19 दानिय्येल 1:20 दानिय्येल 1:21

दानिय्येल 1:16 का पाठ-व्याख्या (HINIRV)
यह verse दानिय्येल और उसके चार साथियों के पालतू भोजन से सम्बन्धित की शासन-सभा की व्यवस्था के समय का है। नNebuchadnezzar के दरबार में वे बंधी परंपराओं के अनुसार भोजन ग्रहण कर रहे थे, पर एल्केमन की सलाह से मूर्ति-सम्बन्धी विदेशी भोजन छोड़कर सिर्फ साग-पात पर टिके रहने का निर्णय लिया गया। इस verse में मुखिया उनके लिए दाखमधु और भोजन की जगह साग-पात देने का क्रम बदल देता है, ताकि उन्हें पवित्र, शरीरिक-संयमित और कर्मशुद्ध बनाए रखा जा सके।
केंद्रीय अर्थ
मुखिया उनके भोजन और दाखमधु को छुड़ाकर साग-पात प्रदान करता है—यह एक स्पष्ट व्यवस्था परिवर्तन है जो तीन ठोस संदेश देता है: (1) नियंत्रण बनाये रखना: ईश्वर की वफादारी के लिए वे बाहरी दायित्वों से मुक्त होकर नैतिक-आचरण की राह में चलते हैं; (2) स्वस्वरूप-साक्षीता: भोजन की आदतें परिवर्तनशील हो सकती हैं, पर ईमानदारी और विश्वास-निष्ठा स्थिर हैं; (3) परंपरा बनाम आस्था: राजसी भोजन-परंपरा पर सवाल उठाते हुए वे अपने समुदाय के प्रति सचेत रहते हैं कि कितनी गर्मजोशी और विश्वास के साथ उन्हें अपने देव-निष्ठ बने रहना चाहिए।
दो–तीन प्रमुख थीम
संदर्भ-उद्धरण से सम्बद्ध मार्गदर्शन
इसके अनुरूप शास्त्रीय टिप्पणीकारों ने यह दिखाया है कि यह कदम दानिय्येल के लिए एक नैतिक और आध्यात्मिक विकल्प है, जिससे वे्बर-आवश्यकिता पर दया नहीं छोड़ते बल्कि परमेश्वर के विधान के अनुसार चलना चुनते हैं।
अनुवादित उद्धरण (संदर्भित बिंदु)
यदि उपलब्ध हो सके तो सीधे उद्धरण: "... भोजन और दाखमधु छोड़कर साग-पात दें"—यह संक्षिप्त वाक्यांश उनके आचरण की दिशा को दर्शाता है कि वे कौन-सी प्राथमिकता चुनते हैं।
संबद्ध विचार (cross-references) और संक्षिप्त स्पष्टीकरण
व्यावहारिक विचार
इस verse से सिखाते हैं कि कठिन समय में भी अपनी आस्था के नियमों को याद रखना आवश्यक है। यह दिखाता है कि आचर-बद्ध जीवन में छोटे-छोटे चयन कितने बड़े प्रभाव डालते हैं—चरित्र बनता है, न कि केवल बड़े फैसलों से। अगर हम दबाव में हों, तो भी स्वास्थ्य-आहार, नैतिक सीमाओं और परमेश्वर के निर्देशों की प्राथमिकता बनाए रखें।
संक्षिप्त निष्कर्ष
दानिय्येल 1:16 हमें यह समझाता है कि बाहरी दबावों के बीच भी ईश्वर के लिए हमारी निष्ठा सर्वोपरि है। भोजन-चयन के छोटे निर्णय में भी परमेश्वर के हित को पहले रखना हमारी आध्यात्मिक पहचान को मजबूत करता है।