Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
दानिय्येल 1:1 दानिय्येल 1:2 दानिय्येल 1:3 दानिय्येल 1:4 दानिय्येल 1:5 दानिय्येल 1:6 दानिय्येल 1:7 दानिय्येल 1:8 दानिय्येल 1:9 दानिय्येल 1:10 दानिय्येल 1:11 दानिय्येल 1:12 दानिय्येल 1:13 दानिय्येल 1:14 दानिय्येल 1:15 दानिय्येल 1:16 दानिय्येल 1:17 दानिय्येल 1:18 दानिय्येल 1:19 दानिय्येल 1:20 दानिय्येल 1:21

अध्याय 1, पद 18 पर विचार: दानिय्येल 1:18
इस पद में नबूकदनेस्सर के आदेश के बाद भविष्यवाणी-संरचना का एक महत्वपूर्ण क्षण दर्शाया गया है। शरणागत जीवन में एक केंद्रीय बात उभरती है—परिश्रम, स्थिरता और परमेश्वर की कृपा के कारण जो भी परीक्षा हो, वह अंततः प्रतिफलित होती है। यहाँ नाटक की घड़ी तब शुरू होती है जब नत्थे युवाओं को उनकी योग्यता और चरित्र के अनुसार राजा के समक्ष पेश किया जाता है।
पद का पाठ और संदर्भ
यह पद वास्तव में यह बताता है कि राजा ने युवाओं को उनके भीतर के गुणों के कारण सामने बुलवाया—खोजों का प्रधान उनके साथ था। दानिय्येल और उसके साथियों के लिए यह अवसर एक पड़ाव था, जहां वे न केवल संसारिक चमत्कारों के लिए चुने गए, बल्कि उनकी आस्था और मानवीय प्रज्ञा भी परखा जा रही थी।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
अनुबन्धित पवित्र ग्रंथों से समकक्ष प्रसंग
कुछ अन्य हिस्से हैं जहाँ परमेश्वर का मानवीय परीक्षा के समय में संबल और मार्गदर्शन दिखता है:
व्यावहारिक अनुप्रयोग
आज भी हम यूर-युवाओं की तरह कठिन परिस्थितियों में प्रवेश करते हैं—शिक्षा, कार्य, या सामाजिक दबाव। इस वचन से सीख मिलती है कि:
कुल मिलाकर सार
दानिय्येल 1:18 उन लोगों के लिए एक प्रेरक स्मरण है जो उत्तर-पूर्वों या विपरीत परिस्थितियों में भी अपने आस्थागत दायित्व को याद रखते हैं। संकल्प, निष्ठा और परमेश्वर की कृपा मिलकर एक ऐसी प्रतिमा बनाते हैं जिसे राजा भी सम्मान से देखता है। यह पद हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर उनके संघर्षों से अविचल रहता है जो उसके नाम पर चलते हैं।
क्रॉस-रेफरेंसेज़ (संक्षेप)
यही समय-सीधे देखने लायक कुछ क्रॉस-रेफरेंसेज़: रोम 12:2 का विवेकपूर्ण परिवर्तन, यशायाह 41:10 का भय-रहित साहस, और दनिययेल के समकालीन विश्वास की कथा—ये सभी एक ही धारा की ओर इशारा करते हैं: परमेश्वर के साथ एकजुट होकर जीवन के परीक्षा-चक्र पर विजयी रहना।
नोट: इस पंक्तियों के भीतर Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के पूरे उद्धरण नहीं दिए जा रहे हैं; केवल उनके विश्लेषण के संक्षिप्त सार और सामान्य सिद्धान्त प्रस्तुत किए गए हैं। यदि आप चाहें तो मैं उनके प्रकाशित टिप्पणियों के छोटे स्पष्ट उद्धरण-टुकड़े उद्धृत कर सकता/सकती हूँ।