एज्रा 1:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

फारस के राजा कुस्रू के राज्य के पहले वर्ष में यहोवा ने फारस के राजा कुस्रू का मन उभारा कि यहोवा का जो वचन यिर्मयाह के मुँह से निकला था वह पूरा हो जाए, इसलिए उसने अपने समस्त राज्य में यह प्रचार करवाया और लिखवा भी दिया:

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एज्रा 1:1 पद-दर-पद बाइबल टीका

एज्रा 1:1 — आधिकारिक स्थितियाँ और ईश्वर की योजना की उद्घोषणा

फारस के राजा कुस्रू के राज्य के प्रारम्भिक वर्ष में यहोवा ने राजा कुस्रू का मन उभारा कि यहोवा का जो वचन यिर्मयाह के मुँह से निकला था, वह पूरा हो जाए। इस कारण उसने अपने समस्त राज्य में यह प्रचार करवाया और लिखवा भी दिया।

पवित्रता और प्रभु की योजना का उद्घोष

यह पाठ बताता है कि इतिहास के सबसे बड़े राजनीतिक परिवर्तनों के पीछे भी परमेश्वर की योजना सक्रिय है। न केवल इस्राइल की वापसी की तैयारी हो रही है, बल्कि दुनिया के महान साम्राज्यों के भीतर भगवद् उद्देश्य कार्य कर रहा है। कुस्रू के मन का उभार एक ऐसी घटना है जो यहोवा के वचन की पूर्णता की दिशा में कदम दर्शाती है, भले ही उसे मानव इतिहास के बड़े नायक के रूप में सम्मानित किया गया हो। इसका तात्पर्य यह है कि परमेश्वर अपने लोगों के लिए समय-समय पर क़दम निर्धारित करता है, ताकि उनकी आशाएं सच हों।

पवित्रशब्दों के अर्थ में स्पष्टता

फारस के राजा कुस्रू की सत्ता, यहोवा की इच्छा के अनुसार सक्रिय हुई है—यानी ईश्वर ने इसे प्रेरित किया ताकि यहूदियों के निर्वासन के बाद वह पहले कदम उठे और येरुसलेम में मंदिर के पुनर्निर्माण की राह बने। “मन उभारना” का अर्थ है कि प्रभु ने राजा के विचारों और निर्णयों को संचालित किया ताकि यहोवा के वचन पूरी हों। यह संकेत देता है कि परमेश्वर इतिहास के केंद्र में है, और सत्ता चाहे कितनी भी विशाल हो, उसी के हाथ में है।

अन्य मौजूदा संदर्भ और क्रॉस-रेफरेंसेज़

  • यिर्मयाह के प्रेरित वचन: प्रभु अपने विश्वासियों के लिए समय पर उद्घोष करते हैं—ये इस घटना से मेल खाता है कि यहोवा के वचनों की पूर्ति में समय दर समय आता है।
  • एज्रा-नातियों में वापसी और मंदिर की बहाली: यह प्रकरण सीधे उन घटनाओं से संबद्ध है जिनमें यहूदियों की वापसी और धर्म-संस्थाओं के पुनर्स्थापन की योजना बनती है।
  • अन्य विश्व-राज्यों के भीतर परमेश्वर की योजना: यह दिखाता है कि परमेश्वर दायरे में जो भी सत्ता हो, वे His sovereign purpose के अधीन हैं।

इन क्रॉस-रेफरेंसेज़ से स्पष्ट होता है कि ईश्वर का वचन केवल आस्थाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बाहरी इतिहास के ताने-बाने में भी सक्रिय रहता है और उसे पूरा करने के लिए प्रेरणा और निर्देश प्रदान करता है।

पवित्रता, अनुभव और आज के लिए अनुप्रयोग

आज के संदर्भ में यह पाठ स्मरण कराता है कि कठिन राजनीतिक परिस्थितियाँ भी परमेश्वर की योजना के अनुरूप आ सकती हैं। हमारी प्रतिक्रिया — विश्वास में धैर्य, परमेश्वर के वचनों पर आश्रय बनाकर चलना और सत्यापित कार्य करना — यह दिखाती है कि हम अपने समय के व्यवस्थाओं के भीतर प्रभु की योजना से कैसे जुड़ते हैं।

संक्षिप्त सार

यहसूचित करता है कि: परमेश्वर अपने वचन को पूरी करने के लिए समय-समय पर सत्ता और मानव इतिहास के बड़े क्षणों में क्रियाशील रहते हैं। यह घटना यह भी दिखाती है कि निर्वासन-पूर्वक महत्व और वापसी की राह ईश्वर के उद्देश्य के अनुसार बनती है, ताकि भविष्य की पूजा और संस्थाओं का पुनर्निर्माण संभव हो सके।

छोटे संदर्भित पाठ

1) यहोवा का उद्देश्य पूर्णता की ओर है, न कि मानव स्वार्थ के संचलन के अनुसार। 2) इतिहास में सत्ता के पीछे भी परमेश्वर की योजना चलती है। 3) वापसी और मंदिर-निर्माण का विचार आज भी विश्वासियों के लिए प्रेरणा है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

एज्रा 1:1 समानांतर पद और संबंधित वचन

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“यहोवा यह कहता है कि बाबेल के सत्तर वर्ष पूरे होने पर मैं तुम्हारी सुधि लूँगा, और अपना यह मनभावना वचन कि मैं तुम्हें इस स्थान में लौटा ले आऊँगा, पूरा करूँगा।

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फारस के राजा कुस्रू के पहले वर्ष में यहोवा ने उसके मन को उभारा कि जो वचन यिर्मयाह के मुँह से निकला था, वह पूरा हो। इसलिए उसने अपने समस्त राज्य में यह प्रचार करवाया, और इस आशय की चिट्ठियाँ लिखवाई:

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राजा का मन जल की धाराओं के समान यहोवा के हाथ में रहता है, जिधर वह चाहता उधर उसको मोड़ देता है।

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