Old Testament
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एज्रा 1:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और उनके आस-पास सब रहनेवालों ने चाँदी के पात्र, सोना, धन, पशु और अनमोल वस्तुएँ देकर, उनकी सहायता की; यह उन सबसे अधिक था, जो लोगों ने अपनी-अपनी इच्छा से दिया।
एज्रा 1:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
एज्रा 1:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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एज्रा 7:15 (HINIRV) »
और जो चाँदी-सोना, राजा और उसके मंत्रियों ने इस्राएल के परमेश्वर को जिसका निवास यरूशलेम में है, अपनी इच्छा से दिया है,

एज्रा 1:4 (HINIRV) »
और जो कोई किसी स्थान में रह गया हो*, जहाँ वह रहता हो, उस स्थान के मनुष्य चाँदी, सोना, धन और पशु देकर उसकी सहायता करें और इससे अधिक यरूशलेम स्थित परमेश्वर के भवन के लिये अपनी-अपनी इच्छा से भी भेंट चढ़ाएँ।”

एज्रा 8:33 (HINIRV) »
फिर चौथे दिन वह चाँदी-सोना और पात्र हमारे परमेश्वर के भवन में ऊरिय्याह के पुत्र मरेमोत याजक के हाथ में तौलकर दिए गए। उसके संग पीनहास का पुत्र एलीआजर था, और उनके साथ येशू का पुत्र योजाबाद लेवीय और बिन्नूई का पुत्र नोअद्याह लेवीय थे।
अर्थ का स्पष्ट सार
एज्रा 1:6 में बताया गया है कि बंधुत्व के लिए लौटकर आए यहूदियों के साथ जहाँ वे अपने-अपने घरों के सामान, चाँदी-सोना और अनमोल वस्तुएँ लेकर गये थे, वहाँ आसपास के निवासियों ने भी उनकी सहायता की — यह सब उनकी अपनी इच्छा से दिया गया था। यह दर्शाता है कि जब लोग परमेश्वर के कार्य के लिए एक जुट होते हैं, तो संसाधन सहजता से उपलब्ध होते हैं, और प्रेरणा से प्रेरित सहायता का स्वरूप बन जाता है।
प्रसंग-परिप्रेक्ष्य
वह समय यहूदियों के निर्वासन से लौटने के बाद का था। यह अनेक व्यक्ति पुनर्जीवन, मंदिर के पवित्र पुर्नस्थापन और राष्ट्र के धर्मी-संस्थापन की दिशा में कदम उठा रहे थे। इस संदर्भ में पड़ोसी-इलाकों का सहयोग बताता है कि धार्मिक-कार्य और समुदाय-निर्माण के लिए नागरिक-सहायता कितनी महत्त्वपूर्ण है।
व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ
- जिन लोगों ने सहायता दी, वे अपने-अपने इच्छानुसार दे रहे थे; यह स्वेच्छा से दिया गया दान है, दुरुपयोग नहीं।
- यह दान सामरिक या राजनीतिक नियंत्रण का संकेत नहीं बल्कि एक आस्था-आधारित उद्गार है कि वे मुक्त-हृदय से परमेश्वर के कार्य में सहायक बनना चाहते हैं।
- चाँदी-सोना और धन आदि का तात्पर्य है कि संपदा को भी ईश्वर के उद्देश्य के लिए समर्पित किया गया है, न कि सामान्य हित के लिए ही रहने दिया गया।
2-3 उपयुक्त क्रॉस-रेफरेंसेस और उनके संक्षिप्त अर्थ
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि सहायता देना मात्र आर्थिक दान नहीं, बल्कि विश्वास का साझा प्रदर्शन है, जिसमें समाज का हर सदस्य भागीदारी करता है।
मुख्य थीम्स का संक्षिप्त सूची
सूत्र-युक्त सिफारिशी विचार (संक्षेप)
यह अंश दिखाता है कि विरोधाभासी हालात में भी लोग अपनी संपत्ति से प्रेरित सेवा में भाग लेते हैं। यह प्रेरणा देता है कि परमेश्वर के काम के लिए अपने संसाधन साझा करना, समुदाय की स्थिरता और मंदिर-कार्य की रीढ़ बना रहता है।
व्यावहारिक takeaway
अपने समय और साधनों को दे कर आप समुदाय-कार्य में भागीदारी दिखाते हैं। छोटे-छोटे योगदान भी 큰 प्रभाव बनाते हैं—जो लोग अपनी इच्छा से मदद करते हैं, वे समाज के धर्मी उद्देश्य की दिशा में भरोसा बनाते हैं।
महत्त्वपूर्ण उद्धरण (पब्लिक-डोमेन टिप्पणीकारों से)
यह पाठ सीधे उद्धरणों के लिए सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों से संकेत देता है। नीचे के संकेत केवल संदर्भ के लिए हैं:
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के पूर्व प्रकाशित विचारों में स्थानीय भाषा में संक्षेपित समेकन मिलता है: “स्वेच्छा से दान करना प्रेरित मन का परिणाम है; यह विश्वास का प्रमाण है कि परमेश्वर के कार्य हमारे लिए सबसे ऊँचा उद्देश्य है।”
नोट: ऊपर दिया गया सार उनके लिखित शब्दों के संपूर्ण उद्धरण नहीं हैं, बल्कि उनके दृष्टिकोणों के संक्षेपात्मक समाकलन हैं। यदि आप स्पष्ट वाक्यों के लिए विशेष उद्धरण चाहते हों, मैं ठीक-ठीक शाखित उद्धरण दे सकता हूँ।