Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीएज्रा 4:1 बाइबल पद की व्याख्या
एज्रा 4:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
जब यहूदा और बिन्यामीन के शत्रुओं ने यह सुना कि बँधुआई से छूटे हुए लोग इस्राएल के परमेश्वर यहोवा के लिये मन्दिर बना रहे हैं,
एज्रा 4:1 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
एज्रा 4:1 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

एज्रा 1:11 (HINIRV) »
सोने चाँदी के पात्र सब मिलाकर पाँच हजार चार सौ थे। इन सभी को शेशबस्सर उस समय ले आया जब बन्धुए बाबेल से यरूशलेम को आए।

1 राजाओं 5:4 (HINIRV) »
परन्तु अब मेरे परमेश्वर यहोवा ने मुझे चारों ओर से विश्राम दिया है और न तो कोई विरोधी है, और न कुछ विपत्ति देख पड़ती है।

1 इतिहास 22:9 (HINIRV) »
देख, तुझ से एक पुत्र उत्पन्न होगा, जो शान्त पुरुष होगा; और मैं उसको चारों ओर के शत्रुओं से शान्ति दूँगा; उसका नाम तो सुलैमान होगा, और उसके दिनों में मैं इस्राएल को शान्ति और चैन दूँगा।
एज्रा 4:1 का तत्काल पं.Commentary
याद रहे कि यह पाठ वह समय दर्शाता है जब बंधुआई से निकलकर यहूदियों ने परमेश्वर के लिए मंदिर बनाने की योजना शुरू की, तो ईजरायली बस्तियों के पुराने शत्रु शक्ति-शक्ति ने यह बताने की कोशिश की कि वे यहूदी परमेश्वर की मन्दिर-निर्माण के विरुद्ध हैं। यह पंक्ति इस बात का उद्घाटन करती है कि कैसे प्रतिरोध और दबाव के बावजूद परमेश्वर के योजना के प्रति ईमानदार विश्वास बना रहता है।
Immediate setting
यहाँ का दृश्य यह दिखाता है कि बंधुआई से छूटे हुए लोग अपने ईश्वर के लिए मंदिर बनाने के क्रम में हैं। शत्रुओं की प्रतिक्रिया स्पष्ट है: वे सुनते हैं कि यहूदियों ने यहोवा के लिए मंदिर बनाने का कार्य आरम्भ किया है, और वे इस कदम को रोकने की चेष्टा करते हैं।
क्या दिखाता है परमेश्वर या विश्वास के बारे में
यह पाठ विश्वास के विरुद्ध विपरीत परिस्थितियों में भी परम कार्य की पुष्टि दिखाता है। ईश्वर के बारे में यह सच है कि उनके लोगों के復 उद्धार-कार्य से किसी भी प्रकार का प्रतिरोध उनकी योजना को रोक नहीं सकता। यह बताता है कि परमेश्वर अपने लोगों के साथ है, और वे उसकी आश्वासन के अनुसार आगे बढ़ते रहते हैं।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
संबद्ध पाठ (Related Passages)
1) यह बात बपतिस्मा नहीं बल्कि पुनर्निर्माण की महत्ता को दर्शाती है: फिर 1 पवित्रात्मा के साथ यहूदियों द्वारा मंदिर-निर्माण से जुड़ी दृढ़ता की स्मृति प्रमुख है।
2) विश्वास और प्रतिरोध: जैसे भविष्य के अन्य उद्धारक–पाठों में विपक्ष के बावजूद परमेश्वर के लोग आगे बढ़ते हैं, यह पाठ एक प्रेरक उदाहरण देता है कि परमेश्वर के उद्देश्य पूरी दुनिया में संचरित होते हैं।
3) परमेश्वर की योजना और मानव प्रतिक्रिया: यह उल्लेख करता है कि परमेश्वर अपने लोगों के साथ है, और वे उसकी योजना के अनुसार कार्य करें तो प्रतिरोध भी उनके लिए मार्गदर्शक बन सकता है।
प्रचलित क्लासिकल कमेंटरी से संचित विचार
अर्थशास्त्रों के अनुसार यह पाठ यह दिखाता है कि परमेश्वर के प्रति सत्यनिष्ठ समुदायों को बाहरी विरोध से विचलित नहीं होना चाहिए। यह भी दिखाता है कि बाहरी शक्तियाँ निर्भय होकर एक क्रिया का विरोध कर सकती हैं, परन्तु परमेश्वर की योजना अटल रहती है।
नई-आकलन/आज के संदर्भ में अनुप्रयोग
आज के संदर्भ में, जब किसी समुदाय या व्यक्ति पर जबरदस्ती या आलोचना की जाती है कि वे अपने विश्वास व कार्यक्रम से पीछे हट जाएँ, तब यह पाठ स्मरण कराता है कि प्रभु की सेवा के उद्देश्य पर अडिग बने रहना चाहिए। मजबूरियों के बीच भी ईश्वर की योजना बनती है और हमें धैर्य, निर्भयता और एकता के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
संक्षिप्त निष्कर्ष
एज्रा 4:1 यह स्मरण कराता है कि परमेश्वर के लिये मंदिर बनाना जैसे आध्यात्मिक कार्य बाहरी प्रतिरोध के बावजूद भी शुरू होता है, और विश्वासियों को अपनी श्रद्धा के दायरे में दृढ़ रहते हुए अपनी सेवा में अग्रसर होना चाहिए।
नोट्स: इस commentary में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के समान कुछ प्रसिद्ध विचारों का संक्षेप से समाकलन किया गया है, ताकि पाठ के मूल भाव के साथ-जोड़ने वाला एक संयुक्त दृश्य प्रस्तुत हो सके।