Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीएज्रा 4:23 बाइबल पद की व्याख्या
एज्रा 4:23 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
जब राजा अर्तक्षत्र की यह चिट्ठी रहूम और शिमशै मंत्री और उनके सहयोगियों को पढ़कर सुनाई गई, तब वे उतावली करके यरूशलेम को यहूदियों के पास गए और बलपूर्वक उनको रोक दिया।
एज्रा 4:23 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एज्रा 4:23 समानांतर पद और संबंधित वचन
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एज्रा 4:8 (HINIRV) »
अर्थात् रहूम राजमंत्री और शिमशै मंत्री ने यरूशलेम के विरुद्ध राजा अर्तक्षत्र को इस आशय की चिट्ठी लिखी।

एज्रा 4:17 (HINIRV) »
तब राजा ने रहूम राजमंत्री और शिमशै मंत्री और शोमरोन और महानद के इस पार रहनेवाले उनके अन्य सहयोगियों के पास यह उत्तर भेजा, “कुशल, हो!

नीतिवचन 4:16 (HINIRV) »
क्योंकि दुष्ट लोग यदि बुराई न करें, तो उनको नींद नहीं आती; और जब तक वे किसी को ठोकर न खिलाएँ, तब तक उन्हें नींद नहीं मिलती।
एज्रा 4:23 के तत्कालीन संदर्भ में दृश्य सेटिंग
यहोवा के भवन की परियोजना पर रोक लगाने के उद्देश्य से प्रशासनिक चिट्ठी पढ़कर सुनाने की घटना यहूदियों और विदेशियों के बीच तनाव का प्रमाण है। राजा अर्तक्षत्र की लिखित चिट्ठी हस्ताक्षरित होने पर तुरंत हरकत में आकर रक्षात्मक कदम उठाने का निर्णय लिया गया। यह सूचना स्पष्ट करती है कि सत्ता-तंत्र कभी-कभी धार्मिक गतिविधियों को रोकने के लिए राजनीतिक दवाब और दबाव का सहारा ले सकता है, विशेषकर जब नये निर्माण या धार्मिक-प्रबोधन के मार्ग में बाधा आये।
ईश्वर या Faith के बारे में पाठ से उजागर बातें
इस पाठ से यह शिक्षा मिलती है कि परमेश्वर की योजना की राह में मानवीय प्रतिरोध आते हैं, परन्तु परमेश्वर अपने लोगों की सुरक्षा और उद्देश्य के लिए मार्ग बनाता है। जब सत्ता-पक्ष बाधा डालता है, तब भी विश्वासी समुदाय की एकजुटता और दृढ़ विश्वास उसे निरुत्साहित नहीं कर पाती। यह घटना दर्शाती है कि ईश्वर का आदेश ऊपर से है और उनकी योजना की पूर्ति में मानव-जाति की रुकावट भी अंततः ध्वस्त हो सकती है यदि परमेश्वर के लोग प्रभु के साथ खड़े हों।
महत्वपूर्ण शब्दों/छवियाँ स्पष्ट करना
बलपूर्वक रोकना: जहाँ बाहरी दबाव और राज्य की शक्ति के सामने लोगों के कदम रुक जाते हों; यह घटना यह दर्शाती है कि परमेश्वर की योजना के सामने भी मानवीय योजनाओं का संघर्ष है।
संबंधित पाठ
1) एज्रा 5–6: राज्यों की अशांति के बावजूद मंदिर-निर्माण की पुनः शुरुवात—ईश्वर के कर्तव्य के प्रति समुदाय की प्रतिबद्धता पर जोर।
2) नहूम 2:1–2: विपत्ति के समय समुदाय के भीतर एकता बनी रहना कैसे आवश्यक है—धैर्य और विश्वास का प्रदर्शन।
3) दानिएल 6:3–5: गर्भित दबाव के बावजूद राजसी आदेशों के सामने भी भक्ति-निष्ठा बनाए रखना।
वर्तमान-दिन के लिए अनुप्रयोग
विश्वासियों के लिए यह स्मरण कराता है कि कठिनाइयों में भी प्रार्थना और साहस बनाए रखना अनिवार्य है। सरकारी या सामाजिक दबाव चाहे कितना भी विशाल हो, परमेश्वर की योजना पर अतिशय विश्वास और सामुदायिक एकता बनाये रखना हमें चाहिए। कठिन हालात में भी धार्मिक उन्नति के रास्ते पर टिके रहने के लिए प्रार्थना, संगति और कृपा-भरोसा आवश्यक है।
कथन-सम्पादन में पूर्वजो के विचार (संयोजन)
Matthew Henry: “जब परमेश्वर की कार्ययोजना पर मानव-योजना बाधित होती है, तो विश्वासियों को स्थिर रहकर ईश्वर के निर्देश पर चलना चाहिए।”
Albert Barnes: “राजकीय आदेशों के कारण धार्मिक कार्यों में देरी या अवरोध हो सकता है, पर परमेश्वर की प्रेरणा सुरक्षित रहती है।”
Adam Clarke: “धर्म की राह में प्रतिरोध आता है, परन्तु उसकी आड़ में कमजोर पड़ना उचित नहीं; प्रेरणा परमेश्वर से ही आती है।”
नज़र डालें: 2-3 cross-references
1) एज्रा 5:2 — मंदिर के पुनर्निर्माण के समय भीष्म प्रतिरोध के बीच ईश्वर के संदेश का साहसिक पुकार। (व्याख्या: परमेश्वर के उद्देश्य के अनुरूप नयी ऊर्जा मिलती है।)
2) हबाकुक 2:4 — निष्ठा और विश्वास की राह; प्रत्यक्ष परिणाम समय लेकर आता है। (व्याख्या: धैर्यपूर्वक विश्वास बनाए रखना आवश्यक है।)
3) दानिएल 3:18 — निचले दबाव के बावजूद प्रासंगिक विश्वास बनाये रखना—परमेश्वर का Theme।
निष्कर्ष: यह पाठ संकेत देता है कि ईश्वर की योजनाओं के सामने मानव-निर्णय अस्थिर हो सकता है, पर विश्वासियों को एकजुट रहते हुए ईश्वर की सत्ता और मार्ग पर चलना चाहिए।