Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीएज्रा 4:14 बाइबल पद की व्याख्या
एज्रा 4:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
हम लोग तो राजभवन का नमक खाते हैं और उचित नहीं कि राजा का अनादर हमारे देखते हो, इस कारण हम यह चिट्ठी भेजकर राजा को चिता देते हैं।
एज्रा 4:14 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एज्रा 4:14 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहेजकेल 33:31 (HINIRV) »
वे प्रजा के समान तेरे पास आते और मेरी प्रजा बनकर तेरे सामने बैठकर तेरे वचन सुनते हैं, परन्तु वे उन पर चलते नहीं; मुँह से तो वे बहुत प्रेम दिखाते हैं, परन्तु उनका मन लालच ही में लगा रहता है।

यूहन्ना 19:12 (HINIRV) »
इससे पिलातुस ने उसे छोड़ देना चाहा*, परन्तु यहूदियों ने चिल्ला चिल्लाकर कहा, “यदि तू इसको छोड़ देगा तो तू कैसर का मित्र नहीं; जो कोई अपने आप को राजा बनाता है वह कैसर का सामना करता है।”

एज्रा 4:14 — परिप्रेक्ष्य और अर्थ
परिस्थिति का तुरंत पन्ना: इस पद्य में एज्रा और यहूदियों के समकालीन विरोधियों के बीच राजभवन के नमक खाने और राजा के साथ उनके व्यवहार की बात स्पष्ट है। विदेशी शक्तियाँ मिलकर यह चाहते हैं कि यहूदियों का कामकाज और राज-काज निर्बल पड़े; इसलिए वे राजा तक एक चिट्ठी भेजकर किरण-सी चुभन के साथ राज्य की अवहेलना का ठेका लेते हैं।
ईश्वर की आराधना और विश्वास परिप्रेक्ष्य
यह पद यह दिखाता है कि परमेश्वर के लोग सामाजिक-राजनीतिक दबावों के समय भी अपनी आस्था और सत्यापित कर्म के प्रति अविचल रहते हैं। राजा के समक्ष यहूदियों की स्पष्टता, उनकी प्रामाणिकता और इमानदारी का संकेत है—उनके शब्दों में राज्य-सेवा और ईश्वर-आज्ञा के बीच संतुलन बना रहता है। यहूदी लोग जानते हैं कि परमेश्वर के निर्देश से हटकर काम करना उनके विश्वास के अनुरूप नहीं है; फिर भी वे राजनीतिक खतरे में भी आत्म-नियंत्रण और नैतिकता बनाए रखते हैं।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की सफाई
अन्य संदर्भों से संबंधित विचार
1) कथन या विधान के समान भावना कुछ अन्य गिनती/नुबदों में भी दिखाई देती है जहाँ ईश्वरीय लोक अपनी यादृच्छिक-राजनीतिक दबावों के बीच आस्था के अनुरूप रहते हैं।
2) परमेश्वर के लोग अपने समय में क्रियात्मक निर्भरता और धार्मिक-नैतिकता के बीच संतुलन रखते हैं, जिससे उनकी आचार-व्यवहार से समुदाय को उदाहरण मिलता है।
बहुवचन संदर्भ (क्रॉस-रेफरेंसेस) और उनके संक्षिप्त संबंध
आज के अनुप्रयोग
आज के संदर्भ में, दलगत दबावों के बावजूद ईश्वर-निर्देश के प्रति निष्ठा बनाए रखना अदम्य साहस की मांग है। कार्य-स्थल, सरकार, या समाज के दबावों में भी हम यह याद रखें कि नैतिक मानदंड और सत्य-निष्ठा ही स्थायी सुरक्षा बनाते हैं। सम्मान और कर्तव्य के साथ नीति-निर्णय लें, परन्तु ईश्वर के निर्देश से इधर-उधर न हटें।
संक्षेप में, यह पद्य हमें यह सिखाता है कि विश्वास के साथ व्यवहार करते हुए राज-व्यवस्था के साथ ईश्वर के सिद्धांतों को प्राथमिकता देना चाहिए, ताकि समाज ठीक-ठीक उसी दिशा में चले जिसमें परमेश्वर चाहते हैं।
नोट: इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के समान विचारों के छोटे-छोटे साक्ष्य शामिल करने का प्रयास किया गया है; यदि आवश्यक हो तो उनकी मौलिक टिप्पणियों के संकेंद्रित अंश नीचे उद्धृत किए जा सकते हैं।