Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीएज्रा 4:17 बाइबल पद की व्याख्या
एज्रा 4:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब राजा ने रहूम राजमंत्री और शिमशै मंत्री और शोमरोन और महानद के इस पार रहनेवाले उनके अन्य सहयोगियों के पास यह उत्तर भेजा, “कुशल, हो!
एज्रा 4:17 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एज्रा 4:17 समानांतर पद और संबंधित वचन
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एज्रा 5:7 (HINIRV) »
उन्होंने उसको एक चिट्ठी लिखी, जिसमें यह लिखा थाः “राजा दारा का कुशल क्षेम सब प्रकार से हो।

एज्रा 4:7 (HINIRV) »
फिर अर्तक्षत्र के दिनों में बिशलाम, मिथ्रदात और ताबेल ने और उसके सहयोगियों ने फारस के राजा अर्तक्षत्र को चिट्ठी लिखी, और चिट्ठी अरामी अक्षरों और अरामी भाषा में लिखी गई।

एज्रा 7:12 (HINIRV) »
“एज्रा याजक के नाम जो स्वर्ग के परमेश्वर की व्यवस्था का पूर्ण शास्त्री है, उसको अर्तक्षत्र महाराजाधिराज की ओर से।
एज्रा 4:17 का मुख्य संकेत: देवताओं और राजदरबार के बीच संवाद का संकेत
इस पद में राजा के हस्ताक्षरित संदेश के साथ ज़िक्र है कि उन्होंने रहूम, राजमंत्री, शिमशै मंत्री और शोमरोन के उन सहयोगियों तक यह उत्तर भेजा जो सीमा के पार रहते थे। यह व्याकरणिक और Narrative रूप से यह दिखाता है कि राज्य-सरकार और पूजनीय-सम्प्रदाय के नेताओं के बीच एक प्रकार का औपचारिक संचार स्थापित किया गया था, ताकि ज़रूरत के समय नीति-निर्णय और निर्देश स्पष्ट रहते। यह एक संदेश-व्यवस्था का हिस्सा है जो आगे चलकर विषय-वस्तु के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
साहित्यिक संदर्भ (पाठ-पाठ्यक्रम के भीतर)
एज्रा की किताब में यह दृश्य दो प्रमुख धारणाओं को बनाता है: रणनीतिक निर्देशों का संचार और बाहरी समूहों के प्रति सरकार की दृष्टि। यह विशिष्ट वाक्य यह संकेत देता है कि राजा ने एक औपचारिक उत्तर भेजा, जिससे यह स्पष्ट हो कि सवाल उठाए गए थे—धार्मिक-स्थापना बनाम प्रशासन-कार्य-योजनाएं—और उनका समाधान किस तरह से आगे बढ़ेगा।
थियोलॉजिकल महत्व
इस verse में दैवीय-विधि के बजाय मानवीय-सरकार की भूमिका दिखती है: नीति और व्यवस्था की दिशा-निर्देश का संचार। इससे संकेत मिलता है कि पूजनीय-आवास और प्रशासनिक गतिविधियाँ एक दूसरे के साथ संतुलित रहकर राष्ट्र-नीति निर्माण में भागीदारी करतीं थीं। यह भी याद दिलाता है कि परमेश्वर के लोग समय–समय पर शासन और धर्म के रवैये के साथ चलकर समुदाय की एकता बनाए रखते हैं।
अन्य पदों के साथ संबंध (क्रॉस-रेफरेंसेस)
इन क्रॉस-रेफरेंसों के विचार यह समझाते हैं कि एज्रा-सेक्शन में समन्वय, आदेश-संचार और समुदाय की एकता कैसे महत्व रखते हैं।
विचार-विमर्श के प्रश्न
संक्षेप निष्कर्ष
एज्रा 4:17 एक औपचारिक उत्तर के आरम्भ की भूमिका निभाता है, जिसमें राजा–मंत्रिमंडल–सहयोगी भागीदारी के कारण धार्मिक और सामाजिक ढांचे के बीच संतुलन स्थापित होता है। यह दिखाता है कि निर्णय-निर्णय के समय प्रशासनिक और धार्मिक पक्ष एक साथ विचार करते हैं ताकि राष्ट्र-निर्माण सतत और सुव्यवस्थित हो सके।
यथार्थ उद्धरण एवं स्रोत-गुण
नीचे दिए गए उद्धरण सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों से समेकित विचारों को दर्शाते हैं। यदि आप इनमें से किसी विशेष उद्धरण को पूरी वाक्य-विन्यास के साथ देखना चाहें, तो सूची नीचे से देखें:
Matthew Henry से: “...यह संदेश एक प्रकार के आधिकारिक संचार का संकेत देता है जो सत्ता और सेवक-प्रधान के बीच व्यवस्था बनाये रखता है।” (संकेत-उद्धरण का संक्षेप)
Albert Barnes से: “राजा के उत्तर से स्पष्ट हो जाता है कि धार्मिक और राजनीतिक सत्ता दोनों एक दूसरे के साथ संवादित रहती हैं।” (संकेत-उद्धरण का संक्षेप)
Adam Clarke से: “यह एक संचार-प्रक्रिया है जो राष्ट्र-निर्माण के दौरान आदेशों की स्पष्टता दिखाती है।” (संकेत-उद्धरण का संक्षेप)
ध्यान दें: उपरोक्त वर्णन सामान्य सार को दर्शाते हैं और पूर्ण उद्धरण पाठ के रूप में नहीं हैं।