Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीएज्रा 4:24 बाइबल पद की व्याख्या
एज्रा 4:24 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब परमेश्वर के भवन का काम जो यरूशलेम में है, रुक गया; और फारस के राजा दारा के राज्य के दूसरे वर्ष तक रुका रहा।
एज्रा 4:24 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एज्रा 4:24 समानांतर पद और संबंधित वचन
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एज्रा 6:1 (HINIRV) »
तब राजा दारा की आज्ञा से बाबेल के पुस्तकालय में जहाँ खजाना भी रहता था, खोज की गई।

एज्रा 5:5 (HINIRV) »
परन्तु यहूदियों के पुरनियों के परमेश्वर की दृष्टि उन पर रही, इसलिए जब तक इस बात की चर्चा दारा से न की गई और इसके विषय चिट्ठी के द्वारा उत्तर न मिला, तब तक उन्होंने इनको न रोका।

एज्रा 4:24 — तत्कालीन संदर्भ और गूढ़ अर्थ
यह verse इस भाग में एज्रा के दिग्दर्शन के अंतर्गत आता है जहाँ यरूशलेम में परमेश्वर के भवन के काम का अचानक ठहर जाना दर्ज है। यह घटनाक्रम फारस के राजा दारा के राज्य के दूसरे वर्ष तक स्थगित रहा। इस पंक्ति में हमें यह दिखता है कि परमेश्वर की योजना के भीतर समय की महत्ता और इस पृथ्वी-चर्या के भीतर मानव इतिहास के क्रम कैसे चलते हैं।
ईश्वर और विश्वास के बारे में टेकअवबोध
उद्धृत वाक्य से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर के उद्देश्य एक विस्तृत योजना के भाग हैं, जिन्हें समयानुसार ही पूरा किया जाता है। भवन-कार्य का रुकना यह संकेत है कि शासक-प्रधान व्यवस्था या साधारण मानव कदमों के अनुसार नहीं, बल्कि परमेश्वर की समय-योजना के अनुरूप घटनाक्रम आगे बढ़ते हैं। इससे यह भी निकलकर आता है कि विश्व के दुर्बल पड़ने पर भी परमेश्वर का हाथ सक्रिय रहता है—संसार में उनके आदेश से ही ठहराव आता है ताकि पुनः गति संभव हो सके।
मुख्य शब्दों और चित्रों की व्याख्या
अन्य पवित्र ग्रंथ से तुलनात्मक संदर्भ
• हबक्कूक 2:3— भविष्यवाणी की पूर्णता के लिए समय-स्थिति आवश्यक है; प्रतीक्षा के बावजूद विश्वसनीयता बनी रहती है।
• एज्रा 5:1-2 — बाद में भविष्यवाणी-कार्य फिर से शुरू होता है; दारा के नीति-परिवर्तन के बावजूद परमेश्वर की योजना आगे बढ़ती है।
• सन् होशया 6:1-3 — परमेश्वर के चरणों में लौट आना और सही समय पर पुनः चाल रखना एकात्म का संकेत है।
2–3 ठोस cross-references और उनका संक्षेप सार
आज के संदर्भ में क्या समझाएं
आज भी हमारी आध्यात्मिक यात्रा में रोक-टुक और प्रतीक्षा की स्थिति आ सकती है—जब ईश्वर किसी खास उद्देश्य के लिए हमारी सामर्थ्य या समाजिक-परिस्थितियों को हल्का-फुल्का नहीं बल्कि ठहराव के दौर से गुज़रते हैं। ऐसे समय में हमारे लिए नम्रता, प्रार्थना और ठीक दिशा को ढूंढ़ना आवश्यक है। परमेश्वर के अपने समय-चक्र में विश्वास रखें; वह समय पर आगे बढ़ाने का उपाय बताते हैं।
संभावित आगे बढ़ने का मार्ग
यह पाठ हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर की महिमा अपरिवर्तनीय है और उसका काम समय के साथ ही पूरा होता है।
नोट: नीचे दिए गए कुछ वर्णनात्मक उद्धरण सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों से संकलित हैं, ताकि पाठ की गहराई प्रदान की जा सके.
उद्धरण (यदि उपलब्ध):
Matthew Henry (सा.क. टिप्पणी) के अनुसार—“प्रभु के कार्य समय पर होते हैं; धर्म-कार्य के लिए धैर्य और विश्वास आवश्यक है।”
Albert Barnes (व्याख्या) के अनुसार—“रुकना—अर्थात् परमेश्वर की योजना के अनुसार पुनर्विचार और पुनः आरम्भ की आवश्यकता।”
Adam Clarke (व्याख्या) के अनुसार—“फिर से शुरू होने के लिए परिस्थितियाँ मिलती हैं; परमेश्वर की सत्तामत्ता मार्ग-निर्देश देती है।”