Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 कुरिन्थियों 1:1 2 कुरिन्थियों 1:2 2 कुरिन्थियों 1:3 2 कुरिन्थियों 1:4 2 कुरिन्थियों 1:5 2 कुरिन्थियों 1:6 2 कुरिन्थियों 1:7 2 कुरिन्थियों 1:8 2 कुरिन्थियों 1:9 2 कुरिन्थियों 1:10 2 कुरिन्थियों 1:11 2 कुरिन्थियों 1:12 2 कुरिन्थियों 1:13 2 कुरिन्थियों 1:14 2 कुरिन्थियों 1:15 2 कुरिन्थियों 1:16 2 कुरिन्थियों 1:17 2 कुरिन्थियों 1:18 2 कुरिन्थियों 1:19 2 कुरिन्थियों 1:20 2 कुरिन्थियों 1:21 2 कुरिन्थियों 1:22 2 कुरिन्थियों 1:23 2 कुरिन्थियों 1:24



2 कुरिन्थियों 1:1 पर टिप्पणी
पौलुस इस पत्र की शुरुआत करते समय अपने परिचय के साथ एक महत्वपूर्ण संरचना बनाते हैं: वे कहते हैं कि यह पत्र परमेश्वर की इच्छा से मसीह यीशु का प्रेरित है, और साथ ही तीमुथियुस उनके सहयोगी सहित कुरिन्थ की कलीसिया और अखाया के पवित्र लोगों के नाम निर्देशित है। यह स्पष्ट करता है कि क्रमशः आधिकारिक प्रेरणा और सामुदायिक संबद्धता दोनों इस संदेश के केंद्र में हैं।
मुख्य विचार
यह उद्घोषणा दो मजबूत बिंदुओं को एक साथ रखती है: (1) प्रेरित का दायित्व—पौलुस ईश्वर की योजना के अनुसार चुना हुआ और मसीह यीशु के संदेश को प्रस्तुत करने वाला है; (2) व्यापक समुदाय—कलीसिया का संदर्भ, जो कुरिन्थ में है और अखाया के सभी पवित्र लोगों तक फैला है। इससे यह स्पष्ट होता है कि प्रेरित और समुदाय मिलकर एक रचना बनाते हैं: विश्वासियों का एक साथपन, जिसमें प्रभु की योजना का नमूना और साझे जीवन की दिशा साफ-साफ उभरती है।
कठिन विषय—तीन मुख्य थीम
संबद्ध पवित्र ग्रंथों के संकेत
इन शब्दों से मिलते-जुलते विचार अन्य जगहों में भी मिलते हैं: एंथ्रोपोलॉजी की बजाय क्रिस्तीय आशीर्वाद और प्रेरणात्मक नियुक्ति का विचार 1-2 पवित्र ग्रंथों में मिलता है—जैसे कि प्रेरितों के चुने जाने का सिद्धांत और समुदाय का बुलावा। यह सभी दर्शाते हैं कि संदेश को भेजने वाला और उससे जुड़े समुदाय एक समान उद्देश्य के लिए एकजुट रहते हैं।
व्यावहारिक विचार
क्रॉस-रेफरेंसेज़ और उनके संक्षिप्त संबंध
1) रोम 1:1—पौलुस को प्रेरित बुलावा का वर्णन; यह बताता है कि उनका मिशन दांवपर नहीं, वरदानपूर्ण योजना का हिस्सा है।
2) फिलिप्पी 1:1—कलीसिया को एक साथ रहने की ज़रूरत और प्रभु के साथ साझेदारी का स्मरण।
3) 1 पत 2:9—विश्वासियों के पहचान और एकजुट जीवन की पुष्टि, कि हम पवित्रता और आराधना का समुदाय बनें।
संक्षिप्त निष्कर्ष
2 कुरिन्थियों 1:1 में प्रेरित पौलुस के साथ तीमुथियुस का साथ और कुरिन्थ तथा अखाया के पवित्र लोगों के नाम के साथ एक स्पष्ट संदेश निकलता है: परमेश्वर की योजना के अनुसार एक प्रेरक दायित्व और एक व्यापक समुदाय का दायित्व—दोनों एकजुट होकर विश्वास की राह दिखाते हैं।
टिप्पणीधारक उद्धरण (जहाँ लागू):
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke जैसे पारंपरिक पाठकों के सुसंगत विचारों के अनुरूप, यह उद्घोषणा आशीर्वाद, दायित्व और समुदाय के संकल्प को एक साथ रखती है—परमेश्वर की इच्छा से प्रेरित होना और कलीसिया के साथ संलग्न रहना। कृपया ध्यान दें: यदि किसी विशेष उद्धरण की एकदम शाब्दिक पंक्ति चाहिए, तो वही संदर्भ के भीतर सीधे उद्धृत की जा सकती है।