Old Testament
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2 कुरिन्थियों 12:1 2 कुरिन्थियों 12:2 2 कुरिन्थियों 12:3 2 कुरिन्थियों 12:4 2 कुरिन्थियों 12:5 2 कुरिन्थियों 12:6 2 कुरिन्थियों 12:7 2 कुरिन्थियों 12:8 2 कुरिन्थियों 12:9 2 कुरिन्थियों 12:10 2 कुरिन्थियों 12:11 2 कुरिन्थियों 12:12 2 कुरिन्थियों 12:13 2 कुरिन्थियों 12:14 2 कुरिन्थियों 12:15 2 कुरिन्थियों 12:16 2 कुरिन्थियों 12:17 2 कुरिन्थियों 12:18 2 कुरिन्थियों 12:19 2 कुरिन्थियों 12:20 2 कुरिन्थियों 12:21



2 कुरिन्थियों 12:1 — घमण्ड के विरुद्ध परम प्रेरणा
यह पद विशेष रूप से हमारे लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पवित्र लेखक पौलुस अपने रोब के पीछे एक सामान्य प्रचलन के विरुद्ध सचेत करते हैं। घमण्ड करना हमारी कमजोरी पर पर्दा डाल सकता है, परन्तु प्रेरित पौलुस यह स्पष्ट करते हैं कि कुछ बाध्यकारी अनुभव और दृश्यों के द्वारा वह अपनी योग्यता नहीं, बल्कि परम परमेश्वर की महिमा को दर्शाने की इच्छा को प्राथमिकता देता है। इस संदर्भ में यह verse बताता है कि मानव क्षमताओं की घोषणा कभी-कभी दुष्प्रेरणा बन सकती है यदि वह ईश्वर की महिमा को पीछे छोड़ दे।
पयथा-पार्श्व: मूल संदर्भ
2 कुरिन्थियों की दूसरी पत्री के अंतर्गत, पौलुस अपने अनुभवों के बारे में बोलते हैं—जो उन्हें परमेश्वर ने दिये थे: दर्शनों और प्रकशनों की अनुभूति। उनके रिकॉर्ड का उद्देश्य यह नहीं कि लोग उनकी वैभवशाली व्यक्तिगत सफलता को याद करें, बल्कि यह है कि उनके शारीरिक कमज़ोरी और देव की महिमा के प्रकाश में ईश्वर की कृपा प्रमुख बनी रहे। यहाँ गाँठ बंद वह विचार है कि घमण्ड के कारण कुछ लोग आत्म-गौरव में चूर हो जाते हैं; किन्तु पौलुस अपने अनुभवों को ईश्वर के गौरव के प्रकाश में प्रस्तुत करते हैं ताकि सुसमाचार की शक्ति स्पष्ट रहे, न कि मनुष्य की योग्यता।
मुख्य संदेश
इस पद का मूल भाव यह है: यदि कुछ घटनाओं से इंसान घमण्ड में आ जाये, तो भी प्रत्युत्तर यही है कि हम अपनी कमी और निर्भरता को स्वीकार करें—ताकि प्रभु की शक्ति, उसकी कृपा और उसकी महिमा उजागर हों। पौलुस कहता है कि मैं घमण्ड करुँ या न करुँ, लेकिन मैं वे द्रष्टांत और प्रकशन बताऊँगा जो मुझे प्रभु ने दिए—ताकि लोग जान लें कि यह सब परमेश्वर की कृपा से है, न कि मेरी योग्यता से। इसी प्रकार, क्रिस्ट के शरीर में कमजोरी होने पर भी उद्धारकर्ता की कृपा न बढ़े, यह संदेश आत्म-प्रतिष्ठा से ऊपर है।
प्रमुख विषय-सूत्र
संदर्भ—अनुरूप cross-references
- यूहन्ना 15:5: मैं vआपके बिना कुछ नहीं कर सकता; यह स्मरण ईश्वर की निर्भरता के महत्व को याद दिलाता है।
- 2 कुरिन्थियों 1:8-9: उनके दुःखों के समय भी उन्होंने मानव शक्ति पर आश्रय नहीं लिया; परमेश्वर की सहायता पर भरोसा किया।
- रोमियों 8:26-27: पवित्र आत्मा कैसे हमारी दुर्बलताओं में सहायता करता है—ईश्वर की करुणा के साथ।
आध्यात्मिक पुनःकथन
पौलुस की यह चितयिती हमें सिखाती है कि ईश्वर के काम में सफलता का माप कोई राजसी राजसी श्रेणी नहीं है, बल्कि वह है कि हम अपनी कमजोरियों में भी उसकी शक्ति को देख सकें। जब हम घमण्ड के बजाए निर्भरता अपनाते हैं, तब ईश्वर की महिमा स्वतः प्रकट होती है। सत्य यह है कि दार्शनिक या बाहरी परिणामों पर नहीं, वरन् परमेश्वर की कृपा पर हमारा विश्वास और दृढ़ता मुख्य होनी चाहिए।
संक्षेप निष्कर्ष
घमण्ड करना अभीष्ट नहीं, परन्तु प्रभु ने दर्शनों और प्रकाशनों के द्वारा अपने दिव्य नियम और कृपा को दिखाने के लिए हमें बुलाया है। यह verse हमें याद दिलाता है कि हमारी स्थिति चाहे कैसी भी हो, परमेश्वर की शक्ति और प्रेम ही उपाय है, और हमारी गवाही उसी क्रम में परमेश्वर की महिमा के लिए होनी चाहिए।