Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 कुरिन्थियों 12:1 2 कुरिन्थियों 12:2 2 कुरिन्थियों 12:3 2 कुरिन्थियों 12:4 2 कुरिन्थियों 12:5 2 कुरिन्थियों 12:6 2 कुरिन्थियों 12:7 2 कुरिन्थियों 12:8 2 कुरिन्थियों 12:9 2 कुरिन्थियों 12:10 2 कुरिन्थियों 12:11 2 कुरिन्थियों 12:12 2 कुरिन्थियों 12:13 2 कुरिन्थियों 12:14 2 कुरिन्थियों 12:15 2 कुरिन्थियों 12:16 2 कुरिन्थियों 12:17 2 कुरिन्थियों 12:18 2 कुरिन्थियों 12:19 2 कुरिन्थियों 12:20 2 कुरिन्थियों 12:21



2 कुरिन्थियों 12:17 - संदर्भ-सूचना और समझ
इस पद का संदर्भ पॉल की उस चर्चा से जुड़ा है जिसमें वह अपने आलोचकों पर सचेतन आरोप लगाते हैं कि वे उसे विश्वासघात या छल करने के लिए भेजे गए नहीं थे। कुरिन्थ की स्थितियाँ दिखाती हैं कि प्रेरित पॉल के कार्यों के पीछे कभी-कभी व्यक्तिगत हित और दाम की चाहत भी हो सकती है, पर वह स्पष्ट करता है कि उसने किसी भी तरह से डराने-धमकाने या छल से कुछ प्राप्त करने का नहीं सोचा। १२ अध्याय के अंतर्गत यह प्रश्न उठता है: क्या जिन लोगों को वे ईश्वर की सेवकाई में भेजे गए थे, वे क्रियात्मक ईमानदार थे या नहीं?
पाठ से क्या दिखता है - परमेश्वर और विश्वास के बारे में
यह वाक्य सीधे उस बात को उजागर करता है कि ईश्वर की सेवकाई में अग्रभाग निभाने वाले लोग भी समय-समय पर मोह-लालच या स्वार्थ से मुक्त नहीं होते। पॉल का उत्तर यह है कि उसने कथा-उद्धृत लोगों से कुछ भी छल के द्वारा नहीं लिया; वह अपने प्रेरितत्व और सेवा के धैर्य पर भरोसा दिखाता है। ईश्वर के संदर्भ में यह बात यह बताती है कि सच्ची सेवा में उद्देश्य नैतिकता, पवित्रता और पारदर्शिता है—किसी भी तरह का छल या लाभ-लाभ नहीं। साथ ही यह संकेत देता है कि सत्य-निष्ठा और प्रेरित-प्रेरित व्यक्तियों के बीच वास्तविक अलगाव है: जो ईश्वर के कारण और प्रेम में चलते हैं, वे किसी भी प्रकार के दखल या गलत लाभ से मुक्त रहते हैं।
शब्दों और छवियों की स्पष्टता
- भला: यहाँ 'भला' से आशय है उच्च नैतिक मानक और निष्कपट उद्देश्य।
- जिन्हें मैंने तुम्हारे पास भेजा: पॉल उसी समूह की ओर इशारा कर रहे हैं जो उसे कुरिन्थियों के पास भेजे गए थे; यह उनका अनुभव-आधारित परीक्षण है।
- छल करके: सीधे-सीधे भरोसे को तोड़ना या धोखा देना; यहाँ ईश्वरीय सेवा के अधिकार के दुरुपयोग की ओर इशारा है।
अन्य संबद्ध पाठ
- मत्ती 7:12 और 1 कुरिन्थियों 4:2— सत्यता और विश्वसनीयता की आवश्यकता की परंपरागत धारणाओं को पुष्ट करते हैं कि सेवक अनुपम नैतिकता के साथ कार्य करें।
- 2 कुरिन्थियों 11:13-15— प्रेरितों और धूर्त प्रचारकों के बीच वास्तविक भिन्नता की चर्चा।
- गलातियों 1:10— मानव स्वार्थ बनाम ईश्वर की प्रेरणा में फर्क।
मुख्य विचार— आज के संदर्भ के लिए
1) सच्चे सेवकई का मानदंड: परमेश्वर की प्रेरणा से सेवा, न कि स्वार्थ और लाभ-लाभ से।
2) पारदर्शिता और विश्वास-निष्ठा: जब विपत्ति या आरोप सामने आता है, तब भी अधिकतम पारदर्शिता और ईमानदारी बनाए रखना चाहिए।
3) आत्म-परीक्षण और जवाबदेही: चर्च के नेता और अग्रदूतों को दिल से आत्म-समालोचना करनी चाहिए ताकि विश्वासियों के बीच विश्वास बना रहे।
छोटे cross-reference और उनका तात्पर्य
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि उद्देश्य-आचरण और सत्यनिष्ठा का समन्वय ईश्वर की सेवकाई की सुरक्षा है और यह विश्वासियों के बीच विश्वास स्थापित करता है।
निष्कर्ष - अभी के समय के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शन
प्रेरितों के मुकाबले आज के खेमों में भी कभी-कभी दुराग्रह और व्यक्तिगत लाभ की बातें सामने आती हैं। इस पद से प्रेरणा मिलती है कि हम अपनी पहचानों, कदमों और वित्तीय-सम्पर्कों को पारदर्शी और नैतिक बनाए रखें, ताकि ईश्वर के प्रेम और स Services की कथा बनी रहे।