Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 राजाओं 5:1 2 राजाओं 5:2 2 राजाओं 5:3 2 राजाओं 5:4 2 राजाओं 5:5 2 राजाओं 5:6 2 राजाओं 5:7 2 राजाओं 5:8 2 राजाओं 5:9 2 राजाओं 5:10 2 राजाओं 5:11 2 राजाओं 5:12 2 राजाओं 5:13 2 राजाओं 5:14 2 राजाओं 5:15 2 राजाओं 5:16 2 राजाओं 5:17 2 राजाओं 5:18 2 राजाओं 5:19 2 राजाओं 5:20 2 राजाओं 5:21 2 राजाओं 5:22 2 राजाओं 5:23 2 राजाओं 5:24 2 राजाओं 5:25 2 राजाओं 5:26 2 राजाओं 5:27



पाठ का तात्पर्य (2 राजाओं 5:20)
व्याख्या के अनुसार यहाँ गेहजी का विचार है कि वह बड़े ईमान के साथ अपने स्वामी एलिशा के प्रति नहीं रहा। उसने शुरू में एक मिश्रित अनुमान रखा: परमेश्वर की दृष्टि में नापाक अरामी राजा नमान के अंश को छोड़ दिया गया है, पर गेहजी के मन में लोभ और चतुराई ने जन्म लिया और वह यह सोच बैठा कि मित्रानुकूल स्थिति को भेद कर, आए हुए हर स्रोत से कुछ न कुछ प्राप्त किया जा सकता है।
पार्श्वभूमि (Contextual background)
नीरुवान राजा नेनन के समय, नमान नामक अरामी सैनिक ख्याति पा चुका था—उसका रोग यदृच्छित होता तो उसे ईश्वर ने एक चमत्कार-आधारित अवसर में रोगमुक्त किया जा सकता था। एलिशा के भरोसे पर विश्वास कर, नमान ने यहूदियों से सहायता माँगी। नमान के उपचार के लिए जॉर्डन के जल में डुबकी लगाने की आज्ञा मानी गई, और उसने इसाई विश्वास के लिए प्रतिक्रिया दी। गेहजी एलिशा का सेवक है, जो इन घटनाओं के समय उसकी छाया बने रहता है।
Interpretive observations
छोटे thematic points
Cross-references (संक्षिप्त संबद्ध संदर्भ)
1) 2 राजा 5:27 — नमन की चिकित्सा और गेहजी के विचार के बीच का विरोधाभास स्पष्ट होता है; परिणामस्वरूप गेहजी पर शाप लगता है। यह दिखाता है कि परमेश्वर के सम्मान में धोखा शोचनीय है।
2) उत्पत्ति 39:9 (जोयदान) — जोसेफ के आचरण की तरह एक दृढ़तापूर्ण नैतिक विरासत; बहकाव के बावजूद नैतिकता का चयन व्यक्ति के लिए लाभकारी रहता है।
3) मत्ती 6:19-21 — धनोपार्जन की क्षणभंगुरता बनाम आत्मिक धरोहर; यहाँ भी लोभ अंततः पछतावे की ओर ले जाता है।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
प्रेरणा यह है कि परमेश्वर की कृपा देखने के बाद भी हमारा मन यदि लोभी इरादों से भर जाए, तो वह ईश्वर के काम को विकृत कर सकता है। हमें अपने मन को साफ रखना चाहिए, ताकि परमेश्वर का आशीर्वाद वास्तविक और स्थिर रहे।
उद्धरण (Public-domain से संक्षेप)
यदि आप चाहें, तो Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के पारंपरिक टिप्पणियों से एक-एक विचार को संक्षेप में देख सकते हैं; परन्तु यहाँ गहरी तात्त्विकता उन विचारों के मूल को ही समाहित कर देती है।