Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 राजाओं 17:1 2 राजाओं 17:2 2 राजाओं 17:3 2 राजाओं 17:4 2 राजाओं 17:5 2 राजाओं 17:6 2 राजाओं 17:7 2 राजाओं 17:8 2 राजाओं 17:9 2 राजाओं 17:10 2 राजाओं 17:11 2 राजाओं 17:12 2 राजाओं 17:13 2 राजाओं 17:14 2 राजाओं 17:15 2 राजाओं 17:16 2 राजाओं 17:17 2 राजाओं 17:18 2 राजाओं 17:19 2 राजाओं 17:20 2 राजाओं 17:21 2 राजाओं 17:22 2 राजाओं 17:23 2 राजाओं 17:24 2 राजाओं 17:25 2 राजाओं 17:26 2 राजाओं 17:27 2 राजाओं 17:28 2 राजाओं 17:29 2 राजाओं 17:30 2 राजाओं 17:31 2 राजाओं 17:32 2 राजाओं 17:33 2 राजाओं 17:34 2 राजाओं 17:35 2 राजाओं 17:36 2 राजाओं 17:37 2 राजाओं 17:38 2 राजाओं 17:39 2 राजाओं 17:40 2 राजाओं 17:41

संदर्भ और संक्षिप्त व्याख्या
2 राजाओं 17:1 में बताया गया है कि यहूदा के राजा आहाज के बारहवें वर्ष में शोमरोन में एला का पुत्र होशे ने इस्राएल पर राज्य आरंभ किया और नौ वर्षों तक शासन किया। यह वचन उत्तरी राज्य—इज़राइल (उत्तरी राज) के राजाओं की सूची में एक ऐतिहासिक नोट है और उस समय के राजनीतिक और धार्मिक मार्गदर्शन के पीछे के प्रसंग की शुरुआत सूचित करता है।
मुख्य अर्थ
शास्त्रीय रूप से यह पद केवल एक कालगणना बताता है—किस राजा के शासन की शुरुआत और अवधि—परन्तु इसका महत्व उस तत्कालीन ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में है: उत्तरी और दक्षिणी राजतंत्रों की सहयोगी और प्रतिस्पर्धी नीतियाँ, विदेशी शक्ति हस्तक्षेप, तथा इजराइल की गिरती आध्यात्मिक दशा। यह सूचित करता है कि किस समय किस प्रशासन ने शासन किया और आगे आने वाली घटनाओं—विशेषकर अस्स्य्रियन आक्रमण और उत्तरी राज्य की अंततः बंदी-निकासी—की रूपरेखा क्या रही।
प्रमुख थीम
संबंधित पद और संक्षिप्त सम्बन्ध
2 राजा 17:1 सीधे अगले अध्यायों से जुड़ा है जहाँ होशे के शासन के अंत और अस्स्य्रियों द्वारा सम्राट वर्षशम्भु (Shalmaneser) या सर्गोन/सिनहरिब के हाथों अभियानों का परिणाम आता है। तुलना के लिए देखें:
व्यावहारिक चिंतन
यह संक्षिप्त ऐतिहासिक पद हमें याद दिलाता है कि नेताओं के निर्णय और राष्ट्र की आस्था का आपसी तालमेल भविष्य निर्धारित करता है। नेतृत्व की अल्पकालिकता और नीतियों की अस्थिरता समाज में अस्थिरता और पीड़ा ला सकती है। व्यक्तिगत जीवन में भी—चाहे पारिवारिक, सामुदायिक या राष्ट्रीय—स्थिरता और धार्मिक नैतिकता दीर्घकालिक फल देती है, जबकि क्षणिक चलन और गठबंधनों से अस्थायी लाभ के साथ गंभीर परिणाम भी जुड़ सकते हैं।
प्रसिद्ध टिप्पणाकारों से संक्षेप उद्धरण
मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स और ऐडम क्लार्क जैसे सार्वजनिक डोमेन टिप्पणीकारों ने इसी प्रकार के पदों पर इतिहास-निर्देश और आध्यात्मिक सीखों पर प्रकाश डाला है। Matthew Henry ने इस प्रकार के अभिलेखों को "इतिहास में परमेश्वर की नियमबद्धता" से जोड़ा है; Albert Barnes ने ऐसे श्लोकों को राजनीतिक और धार्मिक परिणामों के कारणों की ओर इंगित किया है; Adam Clarke ने कालगणना और सिंक्रोनाइज़ेशन पर उपयोगी नोट्स दिए हैं। (उद्धरण संक्षेप में प्रस्तुत किए गए हैं, परन्तु ऊपर से उद्धरणवाक्य बिलकुल शब्दशः नहीं दिया गया है।)
संक्षिप्त समापन
2 राजाओं 17:1 एक सरल गणनात्मक वाक्य है, परन्तु वह उत्तरी राज्य की गिरावट की कहानी की शुरुआत का संकेत देता है। यह पद इतिहास, नेतृत्व की नश्वरता और नीतियों के दैर्घ्यकालिक प्रभाव की चेतावनी देता है—जो आगे आने वाले अध्यायों में और स्पष्ट रूप से उद्घाटित होता है।