Old Testament
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2 राजाओं 16:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
रमल्याह के पुत्र पेकह के राज्य के सत्रहवें वर्ष में यहूदा के राजा योताम का पुत्र आहाज राज्य करने लगा।
2 राजाओं 16:1 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 राजाओं 16:1 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यशायाह 1:1 (HINIRV) »
आमोत्स के पुत्र यशायाह का दर्शन, जिसको उसने यहूदा और यरूशलेम के विषय में उज्जियाह, योताम, आहाज, और हिजकिय्याह नामक यहूदा के राजाओं के दिनों में पाया।

2 राजाओं 15:38 (HINIRV) »
अन्त में योताम मर कर अपने पुरखाओं के संग जा मिला और अपने मूलपुरुष दाऊद के नगर में अपने पुरखाओं के बीच उसको मिट्टी दी गई, और उसका पुत्र आहाज उसके स्थान पर राज्य करने लगा।

2 राजाओं 15:32 (HINIRV) »
रमल्याह के पुत्र इस्राएल के राजा पेकह के राज्य के दूसरे वर्ष में यहूदा के राजा उज्जियाह का पुत्र योताम राजा हुआ।
2 राजाओं 16:1 का हिंदी टीका (HINIRV)
पर्व 2 राजाओं के इस हिस्से में राजा अहाज का प्रवेश संदिग्ध राजनीतिक स्थिति और धार्मिक उथल-पुथल की पृष्ठभूमि से जुड़ा है। रमल्याह के पुत्र पेकह के राज्य के सत्रहवें वर्ष में यहूदा के राजा योताम के पुत्र आहाज ने शासन संभाला। यह समय इज़राइल और यहूदा दोनों के लिए शक्तिशाली समराटों के प्रभाव और धार्मिक रीति-रिवाजों के मिश्रण का था, जिसमें राजाओं के द्वारा परमेश्वर के अनुरोधनीय कानूनों के पालन के बारे में प्रश्न उठते हैं। इस verse में पहली बात यह है कि आहाज की राजगद्दी पर कूदने की तिथि एक निश्चित ऐतिहासिक काल बताती है, जो सतर्कता से लिखी गई है ताकि आगे आने वाले अध्यायों के घटनाक्रमों से तुलना की जा सके।
मुख्य अर्थ
यह verse राजा की सत्ता के परिवर्तन की एक वास्तविक रिपोर्ट है, जिसमें आहाज के सत्ता में आने का समय स्पष्ट किया गया है ताकि पाठक यह समझ सकें कि किन वर्षों में क्या घटनाएं घटित हुईं। साथ ही यह संकेत देता है कि यह परिवर्तन एक संस्थापक इतिहास भाग का है—जहाँ राजा की सत्ता का क्रम और उसकी नीति का स्वरूप धर्म-परंपरा व व्यवस्थात्मक नियंत्रण के संदर्भ में जिसे आगे के अध्यायों में देखा जाएगा।
दो-तीन प्रमुख विषय
संबन्धित बाइबल पाठ (संक्षेप में)
- 1 राजा 15-16 अध्यायों में राजाओं के शासन क्रम और उत्तराधिकारी की पहचान से जुड़े घटनाक्रम मिलते हैं।
- 2 राजा 15 में यहूदा के राजा आहाज के पूर्वाधिकार और उसके प्रधानमंत्रियों के कार्यों का संदर्भ मिलता है।
संक्षेप: ये संदर्भ आहाज के समय की राजनीतिक-धार्मिक परिस्थितियों को जोड़कर समझाने में मदद करते हैं कि क्यों यह verses एक क्रमबद्ध इतिहास का हिस्सा है।
व्यावहारिक चिंतन
केवल सत्ता संभालना पर्याप्त नहीं होता; स्थायित्व और राष्ट्रीय आशीर्वाद के लिए राजा को परमेश्वर के नियमों के अनुसार शासन करना होता है। आहाज के समय दिखती घटनाएं हमें यह सीख देती हैं कि मानव-राज्य का स्थायित्व दैवीय परामर्श, नैतिकता और न्यायप्रिय नीतियों पर टिके रहने से बना रहता है। हमारा व्यक्तिगत आचरण भी जैसे एक राज्य के लिए कानून-नीतियों की पालन से जुड़ता है, वैसे ही समुदाय के लिए नैतिकता और धार्मिकता आवश्यक हैं।
क्रॉस-रेफरेंसेन
- यहूदा के राजाओं की सूची पर प्रकाश डालती यह जानकारी 1 राजा 15-16 से मिलती है, जहाँ पूर्ववर्ती और उत्तराधिकार के क्रम स्पष्ट होते हैं।
- इतिहास के उसी काल-खंड पर उत्तरदायी नैतिक संदर्भों को 2 राजा 14-16 में देख सकते हैं, जहां राजा के कार्यों और उनके परिणामों का मूल्यांकन मिलता है।
नोट: ऊपर उद्धृत क्रॉस-वचन पूर्ण पाठ नहीं देते; संकलित संदर्भ पाठ के अनुरूप संक्षेप हैं।
संक्षिप्त समापन
यह verse यहूदा के राजमहल के समय का एक ठोस समय-चिह्न है, जो बताता है कि राजा आहाज कब और किस पथ पर शासन कर रहा था। खुशी-खुशी सत्ता संभालना महत्त्वपूर्ण है, परन्तु परमेश्वर के मार्ग-निर्देशों के अनुसार न्यायपूर्ण नीति ही राष्ट्र की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित कर सकती है।
संदर्भित उद्धरण (हार्ड-टेक): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणियों से आवश्यक खंडों का संकलन सामाजिक-धार्मिक पाठ को समृद्ध बनाते हैं।