Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी2 राजाओं 16:5 बाइबल पद की व्याख्या
2 राजाओं 16:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब अराम के राजा रसीन, और रमल्याह के पुत्र इस्राएल के राजा पेकह ने लड़ने के लिये यरूशलेम पर चढ़ाई की, और उन्होंने आहाज को घेर लिया, परन्तु युद्ध करके उनसे कुछ बन न पड़ा।
2 राजाओं 16:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
2 राजाओं 16:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

2 राजाओं 15:37 (HINIRV) »
उन दिनों में यहोवा अराम के राजा रसीन को, और रमल्याह के पुत्र पेकह को, यहूदा के विरुद्ध भेजने लगा।

1 राजाओं 11:36 (HINIRV) »
और उसके पुत्र को मैं एक गोत्र दूँगा, इसलिए कि यरूशलेम अर्थात् उस नगर में जिसे अपना नाम रखने को मैंने चुना है, मेरे दास दाऊद का दीपक मेरे सामने सदैव बना रहे।

2 इतिहास 28:5 (HINIRV) »
इसलिए उसके परमेश्वर यहोवा ने उसको अरामियों के राजा के हाथ कर दिया, और वे उसको जीतकर, उसके बहुत से लोगों को बन्दी बनाकर दमिश्क को ले गए। और वह इस्राएल के राजा के वश में कर दिया गया, जिसने उसे बड़ी मार से मारा।
मुख्य व्याख्या
2 राजाओं 16:5 में यह संकल्पना उभरती है कि प्रतिद्वंद्वी शक्तियाँ कितनी भी मजबूत क्यों न हों, परमेश्वर के द्वारा निर्धारित योजनाओं के अनुसार ही उनकी कथित सफलता निर्भर होती है। आहाज के समय यरूशलेम पर आक्रमण हुआ, परन्तु अटल और दृढ़ निश्चय के साथ उनकी घेराबंदी असफल रही। यह वाकया यह संकेत देता है कि यह युद्ध पुरुषों के बल पर नहीं, किन्तु परमेश्वर के उद्देश्य के अनुरूप हुआ है।
साहित्यिक संदर्भ
यशःसंदेश के इस पाठ में आर्मी के आक्रमण और घेराबंदी की घटना न केवल राजनीतिक तनाव को दर्शाती है, बल्कि धार्मिक स्थिति की भी गहन परीक्षा है। राजा पेकह और अराम के राजा रसीन के सम्मिलित संघर्ष से यह स्थापित होता है कि सीमाओं के भीतर रहते हुए भी यहूदियों की आस्था और परमेश्वर के निर्देशों के पालन पर ही जीवन निर्भर है।
धर्मशास्त्रीय महत्त्व
जहाँ एक ओर सामंती और सैन्य रणनीतियाँ लोगों के लिए सुरक्षा का स्रोत बनती हैं, वहीं दूसरी ओर यह दिखाती है कि असली सुरक्षा परमेश्वर के भरोसे में है। आहाज के शासनकाल में पाप और राजनीति के मिश्रण से उत्पन्न संकट में परमेश्वर अपनी प्रतिज्ञाओं के अनुसार मार्ग दिखाते हैं। यह घटना स्मरण कराती है कि सत्ता चाहे कितनी ही शक्तिशाली क्यों न हो, ईश्वर के उद्देश्य से आगे नहीं बढ़ सकती।
अन्य ग्रंथों से संयोजन
यह पाठ पूर्वी बाइबल की उन घटनाओं से जुड़ता है जहाँYयुद्धों में परमेश्वर की स्वतंत्र क्रिया उद्धार का कारण बनती है (उदा. 2 इतिहास 20; दानियेल की किताब के कुछ भाग)। नीतिगत संघर्षों के बीच परमेश्वर के सत्यनिष्ठ रहने से निष्कर्ष निकलता है कि विश्वासपूर्वक उसका नाम लिया जाए तो विपत्ति भी यात्रा का आकार बदल देती है।
विचारणीय प्रश्न
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेप में)
1) यिर्मयाह 17:5-8: परमेश्वर पर निर्भर रहने और इंसानी भरोसे के प्रति सावधानी। विवरण में बताया गया है कि कौन-सी स्थिति में मनुष्य अपने दिल को बल देता है और कब परमेश्वर आपके पीछे खड़ा होता है।
2) सेनाओं के विरुद्ध परमेश्वर की सहायता: यहूदा के राजा के समय भी रक्षा उसी से होती है जो उसे बनाते और सम्हालते हैं।
3) दानियेल 3 की आस्था-परख: संकट के समय भी विश्वास की आग परमेश्वर के नाम पर टिकती है, और वह उद्धार का रास्ता दिखाते हैं।
संक्षिप्त निष्कर्ष
2 राजाओं 16:5 का पाठ यह स्पष्ट करता है कि वास्तविक आंतरिक सुरक्षा परमेश्वर के.creative योजना में है, न कि बाहरी आक्रमणों के सफल होने पर। आहाज के शासन में घेराबंदी भले ही दिखाती हो कि मानव शक्तियाँ अभी भी खतरे में हैं, पर परमेश्वर ने उनके विरुद्ध अपनी नियति को आगे बढ़ाया। यह हमें याद दिलाता है कि संकट चाहे कितना भी बड़ा हो, भरोसा और प्रार्थना के साथ सत्यनिष्ठ रहने पर परमेश्वर निर्णायक मार्ग दिखाते हैं।
उद्धरण-योग
मैथ्यू हेनरी, अलबर्ट बार्न्स या एडम क्लार्क के इस पाठ के लिए सीधे उद्धरण की आवश्यकता नहीं है, पर यदि आप चाहें, तो वे इस प्रकार के बिंदुओं को स्पष्ट करते—परन्तु यहाँ हमने उनके विचारों को संक्षेप में समाहित किया है ताकि मूल पाठ के साथ एक सहज समन्वय बने।