Old Testament
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2 राजाओं 24:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उसके दिनों में बाबेल के राजा नबूकदनेस्सर* ने चढ़ाई की और यहोयाकीम तीन वर्ष तक उसके अधीन रहा; तब उसने फिरकर उससे विद्रोह किया।
2 राजाओं 24:1 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 राजाओं 24:1 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यिर्मयाह 25:1 (HINIRV) »
योशिय्याह के पुत्र यहूदा के राजा यहोयाकीम के राज्य के चौथे वर्ष में जो बाबेल के राजा नबूकदनेस्सर के राज्य का पहला वर्ष था, यहोवा का जो वचन यिर्मयाह नबी के पास पहुँचा,

दानिय्येल 1:1 (HINIRV) »
यहूदा के राजा यहोयाकीम के राज्य के तीसरे वर्ष में बाबेल के राजा नबूकदनेस्सर ने यरूशलेम पर चढ़ाई करके उसको घेर लिया*।

यिर्मयाह 25:9 (HINIRV) »
इसलिए सुनो, मैं उत्तर में रहनेवाले सब कुलों को बुलाऊँगा, और अपने दास बाबेल के राजा नबूकदनेस्सर को बुलवा भेजूँगा; और उन सभी को इस देश और इसके निवासियों के विरुद्ध और इसके आस-पास की सब जातियों के विरुद्ध भी ले आऊँगा; और इन सब देशों का मैं सत्यानाश करके उन्हें ऐसा उजाड़ दूँगा कि लोग इन्हें देखकर ताली बजाएँगे; वरन् ये सदा उजड़े ही रहेंगे, यहोवा की यही वाणी है।
2 राजाओं 24:1 (HINIRV) — passage setting
उस समय के ऐतिहासिक पटल पर यहोयाकीम शासन कर रहा था, और बाबेल के राजा नबूकदनेस्सर ने सभा-राजनीति से उठकर यहोयाकीम के विरुद्ध चढ़ाई की। परिणामस्वरूप यहोयाकीम तीन वर्ष तक नबूकदनेस्सर के अधीन रहा; तत्पश्चात उसने फिर विद्रोह किया। इस घटनाक्रम से स्पष्ट होता है कि शासन-कर्तव्य और आस्था का संघर्ष सत्ता की चापलूसी के विरुद्ध था, परन्तु परमेश्वर के प्रति विश्वास और उसकी योजनाएँ इतिहास के प्रवाह को निर्धारित करती हैं।
ईश्वर या विश्वास का पाठ
इस आयत में ईश्वर की योजना और राष्ट्र के आत्म-निर्णय का मेल साफ दिखता है। नबूकदनेस्सर का आक्रमण दिखाता है कि परमेश्वर अपनी बुलाहट के अनुसार अध्याय-चक्र बनाते हैं; वे शासन के चक्रों को चलाते हैं ताकि उसकी महिमा हो और पाप के परिणाम सामने आएँ। यह भी संकेत देता है कि प्रभु अपने लोगों के प्रति निष्क्रिय नहीं रहते, बल्कि दया और अनुशासन के माध्यम से उन्हें सही मार्ग पर लौटाते हैं।
महत्वपूर्ण शब्दों और imagery की स्पष्टता
अन्य संबंधित पाठ
– यह पाठ यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर की आज्ञाएं और सत्ता दोनों इतिहास के निर्णयों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं; यह मिथ्या आत्म-विश्वास को कम करते हुए साधारणता से सच्चे विश्वास की ओर ले जाता है। साथ ही अन्य दृश्यों से यह सिद्ध होता है कि राजा-चक्र में कमजोर पड़ना एक राष्ट्र के लिए दंड नहीं, बल्कि सुधार का अवसर बन सकता है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में)
1) दानिएल 1–6: बाबेल के प्रभाव और शोर-शराबे के बीच यहूदियों का विवेक बनना।
2) 2 इतिहास 36:15–21: यहूदियों की यह भूमिका और अल्पकालिक दंड के बाद फिर उठना।
3) प्रवश 3:5–6: प्रभु की गवाही और पाप के परिणाम स्वीकृत होते हैं।
आज के लिए अनुप्रयोग
हम यह देखते हैं कि सत्ता और संघर्ष के बीच विश्वास कैसे टिके रहते हैं—न केवल ईश्वर के साथ विश्वास बनाए रखना, बल्कि धैर्यपूर्वक उसकी योजना को स्वीकारना भी आवश्यक है। कठिन समय में परमेश्वर की संतान होने के नाते हमें चढ़ाई के बाधाओं में भी ईश्वर की व्यवस्था को समझना चाहिए, विद्रोह के स्थान पर आत्म-नियमन और प्रार्थना से मार्ग ढूँढना चाहिए। यह हमें अपने समाज में सत्य, न्याय और दया के उपायों को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है।
आउट-स्टोरी: 2-3 परिचित उद्धरण (जहाँ उपलब्ध)
मैथ्यू हेनरी, अर्बन Barnes और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणियों के संक्षिप्त सार जिन्हें यहाँ उपयोग किया गया है, उनके शब्द यदि उपलब्ध हों, तो सुरक्षा कारणों से संक्षेप में बताये जाते हैं। जहां स्पष्ट उद्धरण दिए गए हों, वहां केवल छोटा-सा पाठ उद्धृत किया गया है; पूर्ण टेक्स्ट उपलब्ध न होने पर उद्धरण के छोटे भाग ही दिए जाते हैं।
संक्षेप टिप्पणी: यह पाठ यह दिखाता है कि प्रभु अपनी चुने हुए लोगों के साथ सक्रिय रूप से जुड़े रहते हैं—न सिर्फ दंड देते हैं, बल्कि उन्हें सचेत और सुधारित मार्ग पर लाने के लिए व्यवस्था बनाते हैं।