Old Testament
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2 राजाओं 24:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और निर्दोष के उस खून के कारण जो उसने किया था; क्योंकि उसने यरूशलेम को निर्दोषों के खून से भर दिया था, जिसको यहोवा ने क्षमा करना न चाहा।
2 राजाओं 24:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 राजाओं 24:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 राजाओं 21:16 (HINIRV) »
मनश्शे ने न केवल वह काम कराके यहूदियों से पाप कराया, जो यहोवा की दृष्टि में बुरा है, वरन् निर्दोषों का खून बहुत बहाया, यहाँ तक कि उसने यरूशलेम को एक सिरे से दूसरे सिरे तक खून से भर दिया।

गिनती 35:33 (HINIRV) »
इसलिए जिस देश में तुम रहोगे उसको अशुद्ध न करना; खून से तो देश अशुद्ध हो जाता है, और जिस देश में जब खून किया जाए तब केवल खूनी के लहू बहाने ही से उस देश का प्रायश्चित हो सकता है। (व्य. 21:7)

व्यवस्थाविवरण 19:10 (HINIRV) »
इसलिए कि तेरे उस देश में जो तेरा परमेश्वर यहोवा तेरा निज भाग करके देता है, किसी निर्दोष का खून न बहाया जाए, और उसका दोष तुझ पर न लगे।
2 राजाओं 24:4 का संदर्भ-संदेश (HINIRV)
यह पद यरूशलेम और उसके राजाओं के इतिहास में एक गहरे नैतिक प्रश्न को दर्शाता है: निर्दोष लोगों के रक्त की भरमार के परिणामस्वरूप परमेश्वर का क्रोध कैसे फैलता है और क्षमा की संभावना कब तक निष्प्रभावी रहती है। यह वाकया प्रेषित न्याय और दयालुता के बीच के संतुलन को उद्घाटित करता है।
पद्य का परिचय और संदर्भ
यह आयत राजा यहोयाकिन के शासन के वर्षों के दौरान की है, जब यरूशलेम पर आक्रमण और देश के भीतर अपराधों की गूंज सुनाई देती है। विशिष्ट रूप से, राजा ने निर्दोषों के खून से शहर को भर दिया—एक ऐसा अपराध जिसे यहोवा ने क्षमापूर्ण नहीं माना। इस पाठ में,पाप की तीव्रता, दायित्व और परमेश्वर की न्यायप्रियता स्पष्ट होती है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
मुख्य संदेश यह है: इंसानी हिंसा और निर्दोषों के रक्त से भरा शहर परमेश्वर के हमदर्दीपूर्ण ध्यान के बाहर नहीं रहता। अपराध जितना बड़ा हो, परमेश्वर की निष्पक्षता उतनी ही स्पष्ट होती है; पर यदि जनसमुदाय पश्चात्ताप करे और ईमानदारी से लौटे, तो परमेश्वर की दया पुनः प्रकट हो सकती है। इस वचन के अनुसार, सरकार और शासक यदि न्याय के स्थान पर अन्याय भरते हैं, तो न केवल वे बल्कि समुदाय भी दंड के योग्य बनता है।
अन्य धार्मिक टिप्पणीकों के विचार (संक्षेप)
मथ्यू Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के प्रवचनों में इस प्रकार की घटनाओं को तोड़कर देखने की कोशिश की गई है: यहूदियों के नेतृत्व में पाप समष्टि पर प्रभाव डालता है और देवता की न्यायपूर्ण प्रतिक्रिया पर बल डालता है। उनके विचार एक साथ यह सुझाते हैं कि सत्ता के गलत उपयोग से मानवीय समाज को गहरा नुकसान होता है, और ईश्वरीय क्षमा तब संभव है जब प्रायश्चर्य और परिवर्तन की वास्तविक योजना बनती है। (नोट: यदि इनमें से किसी की एक निश्चित उद्धरण-संरचना की मांग हो, तो ठीक-ठीक उद्धरण यहाँ संक्षेप में नहीं दे रहा, ताकि संरक्षित पाठ के साथ संदर्भ बना रहे।)
अनुरोधित क्रॉस‑रेफरेंसेज
इन क्रॉस-रेफरेंसेज से यह स्पष्ट होता है कि नीति-न्याय और दया दोनों एक साथ चलते हैं, और समाज की स्थिरता के लिए सही आचरण आवश्यक है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
कार्य-भूमिका में एक सुरक्षित समापन
इस verse से हमें यह विश्वास मिलता है कि परमेश्वर न्याय भी करते हैं और दया भी दिखाते हैं। अगर समाज सचमुच परिवर्तन की ओर बढ़े, तो क्षमा संभव है; और अगर नहीं, तो परिणाम स्पष्ट रहते हैं। आत्म-निरीक्षण और सामूहिक उत्तरदायित्व इस संदेश का आधार हैं।
संक्षेप
2 राजाओं 24:4 में निर्दोष के रक्त से शहर भरना परमेश्वर की दृष्टि में अत्यंत चिंताजनक है; यह स्पष्ट करता है कि शासक के अपराध पूरे समाज पर प्रभाव डालते हैं। ईश्वर की न्यायप्रियता के साथ दया की संभावना भी बनी रहती है, यदि पश्चात्ताप और परिवर्तन का मार्ग अपनाया जाए।