Old Testament
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2 राजाओं 24:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
निःसन्देह यह यहूदा पर यहोवा की आज्ञा से हुआ, ताकि वह उनको अपने सामने से दूर करे। यह मनश्शे के सब पापों के कारण हुआ।
2 राजाओं 24:3 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
2 राजाओं 24:3 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 राजाओं 18:25 (HINIRV) »
क्या मैंने यहोवा के बिना कहे, इस स्थान को उजाड़ने के लिये चढ़ाई की है? यहोवा ने मुझसे कहा है, कि उस देश पर चढ़ाई करके उसे उजाड़ दे।”

2 राजाओं 21:2 (HINIRV) »
उसने उन जातियों के घिनौने कामों के अनुसार, जिनको यहोवा ने इस्राएलियों के सामने देश से निकाल दिया था, वह किया, जो यहोवा की दृष्टि में बुरा था*।

2 राजाओं 23:26 (HINIRV) »
तो भी यहोवा का भड़का हुआ बड़ा कोप शान्त न हुआ, जो इस कारण से यहूदा पर भड़का था, कि मनश्शे ने यहोवा को क्रोध पर क्रोध दिलाया था।
2 राजा 24:3 का प्रसंग: यहूदा पर परमेश्वर की आज्ञा और मनश्शे के पाप
परिदृश्य का सामान्य परिचय: राजा मनश्शे की सत्ता के समय यहूदा और यरुशलेम पर परमेश्वर की एकता-पूर्ति के अनुरोध के साथ यह घटना घटित होती है। यह शास्त्र स्पष्ट करते हैं कि यहूदियों पर जो भी आघात आता है, वह केवल मनश्शे के पापों के कारण नहीं, बल्कि परमेश्वर की आज्ञाओं के अनुसार संपन्न हुआ। आशय यह है कि परमेश्वर अपने लोगों की पापों के कारण उनसे दूर नहीं रहते, बल्कि वे पापों के परिणामस्वरूप न्याय करते हैं ताकि वे अपने हृदय को मोड़ें।
ईश्वर का उद्देश्य और विश्वास की शिक्षा
इस वचन में स्पष्ट हुआ कि परमेश्वर का निश्चय परिवर्तनशील नहीं है; वह पापी के लिए भी न्याय नियंत्रित करते हैं ताकि अंततः पुरुष और समुदाय को पथ-परिवर्तन का अवसर मिले। यहूदा पर यहआदेश उनके दायित्वों के निर्वहन का भाग है कि वे अपने पापों से उबरें और परमेश्वर के साथ पुनः संबंध स्थापित करें।
शब्दों का स्पष्टीकरण
अन्य प्रकरणों से सम्बद्ध पठन
• क्रमशः न्याय और अभिशाप के विषय में प्रकरण: यहूदा के पापों के परिणाम और परमेश्वर की दयालुता के मिलन की चिंता।
• विभीष्ट-उद्धार के समय की सीख: पाप के पश्चात भी उद्धार का मार्ग खुला रहता है जब लोग तेरी ओर लौटें।
आज के पाठ के लिए अनुप्रयोग
यह वचन यह स्मरण कराता है कि न केवल व्यक्तिगत पाप, बल्कि समुदायजन्य पाप भी प्रभु के न्याय के अधीन होते हैं। हमें अपने जीवन में यह देखना चाहिए कि क्या हमारे कार्य परमेश्वर के आदेश से विमुख हैं और क्या हम उनसे पश्चाताप कर रहे हैं। यदि हम सचमुच उनकी ओर लौटें, तो वह दयालुता से हमारी राह सुधारेंगे और हमारे पापों के कारण आये परिणामों को सुधारने की राह दिखाते हैं।
पवित्रशास्त्र से संक्षिप्त संदर्भ
• यहूदा के पाप और उनके दुष्परिणामों पर विचार: पाप के कारण परमेश्वर के न्याय का अनुभव संभव होता है।
• नीत-आचार और करुणा के संतुलन पर दृष्टि: परमेश्वर अपने लोगों के लिए दया और सत्य दोनों को बनाए रखते हैं।
संदर्भ उद्धरण – अन्य टिप्पणीकारों के संकेत्नियाँ
मैथ्यू हेन्री, एलबर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क की सार्वजनिक-डायज़ी टीका-रचनाओं में से उपलब्ध कुछ संक्षिप्त सार नीचे दिए जा रहे हैं:
“जो कुछ भी ईश्वर के भय और तेरी व्यवस्था से विमुख होकर घटे, वह उसी नियम के अनुसार होता है जिसमें पाप के परिणाम स्पष्ट दिखाई दें” — यह शाब्दिक उद्धरण केवल उनके समेकित विचारों के सार को दर्शाने के लिए है।
नोट: ऊपर दिए गए नामों के समकक्ष कोई सीधे उद्धरण पूर्ण वाक्यों में यहाँ नहीं दिया गया है, पर उनके विचारों की आधारशिला इस प्रकार की स्पष्ट व्याख्या में समाहित रहती है।
क्रॉस-रेफरेंसेज़:
प्रत्येक संदर्भ के साथ संक्षिप्त विवेक: पाप के कारणों का प्रकाशन, फिर भीतु-उद्धार की राह खुली रहती है—यदि समुदाय और व्यक्ति पुनः प्रतिपादन करें।