Old Testament
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2 राजाओं 24:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और मिस्र का राजा अपने देश से बाहर फिर कभी न आया, क्योंकि बाबेल के राजा ने मिस्र के नाले से लेकर फरात महानद तक जितना देश मिस्र के राजा का था, सब को अपने वश में कर लिया था।
2 राजाओं 24:7 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 राजाओं 24:7 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यिर्मयाह 37:5 (HINIRV) »
उस समय फ़िरौन की सेना चढ़ाई के लिये मिस्र से निकली; तब कसदी जो यरूशलेम को घेरे हुए थे, उसका समाचार सुनकर यरूशलेम के पास से चले गए।

यिर्मयाह 46:2 (HINIRV) »
मिस्र के विषय। मिस्र के राजा फ़िरौन नको की सेना जो फरात महानद के तट पर कर्कमीश में थी, और जिसे बाबेल के राजा नबूकदनेस्सर ने योशिय्याह के पुत्र यहूदा के राजा यहोयाकीम के राज्य के चौथे वर्ष में जीत लिया था, उस सेना के विषय

उत्पत्ति 15:18 (HINIRV) »
उसी दिन यहोवा ने अब्राम के साथ यह वाचा बाँधी, “मिस्र के महानद से लेकर फरात नामक बड़े नद तक जितना देश है,
2 राजाओं 24:7 का संदर्भ और अभिप्राय
इस पद में शासक बाबील के अधीन होकर एमिस्र (मिस्र) का प्रभाव लगभग खत्म हो चुका था। बाबेल के राजा ने मिस्र की सीमा के अन्दर और बाहर तक रोके जाने के बाद, मिस्र का शासन-पतन सुनिश्चित कर दिया। परिणामस्वरूप मिस्र का राजा अपने देश से बाहर कभी न आ पाया। यह घटना न केवल राजनीतिक शक्ति की गिरावट का संकेत है, बल्कि यह सिद्ध करती है कि बाबेल की बढ़ती शक्ति के सामने अन्य साम्राज्यों की स्वतंत्रता मिटती चली गई।
केंद्रीय संदेश
यह वाक्य यह दर्शाता है कि बाबेल की निर्विवाद प्रभुता ने मिस्र जैसे विशाल साम्राज्य को भी निर्बल कर दिया। एक राजा के अंतर्गत आने से अन्य राज्यों की सीमाएं खुली और नियंत्रण में आ गईं, जिससे क्षेत्रीय सत्ता-चक्र में एक नया संतुलन बन गया। यह परमेश्वर के विश्वव्यापी शासन के ओर संकेत है, जिसमेंKingdoms rise and fall according to divine sovereignty.
तीन मुख्य विषय
संदर्भ-शब्द (Cross-references)
यही विचार 2 राजाओं के अन्य भागों में भी आता है जब साम्राज्य कमजोर होते हैं और दूसरे राजा अपने पराक्रम से क्षेत्रीय सीमाओं को पुनः निर्धारित करते हैं।—उदा. दानिएल की किताबों में भी देव का शासन और मानव साम्राज्यों का स्थायित्व अक्सर अन्तर्द्वंद से जुड़ा रहता है।
पाठ का व्यावहारिक अनुप्रयोग
हम यह सीख लें कि राजनीतिक सत्ता चाहे कितनी भी स्थिर क्यों न हो, परमेश्वर की purpose और योजना की प्राथमिकता है। हमारी आस्थाओं का केन्द्रण न मौका-ए-हवा पर हो, बल्कि परमेश्वर के धैर्यपूर्ण शासन पर हो। जब परिस्थितियाँ अस्थिर लगें, तब भी ईश्वर की योजना के अनुरूप निरंतरता और धैर्य रखना चाहिए।
संक्षेप
2 राजाओं 24:7 में बाबेल की बढ़त मिस्र के सत्ता-चक्र को पलट देती है, और मिस्र की व्यवस्था सत्ता-संघर्ष में कमजोर पड़ जाती है। यह दिखाता है कि पृथ्वी की शक्तियाँ कितनी भी विकसित क्यों न हों, परमेश्वर की सार्वभौम सत्ता के सामने वे सीमित हैं।
इतिहासिक-धार्मिक उद्धरणों के संकेत
पवित्रग्रंथ के दो प्रमुख पंक्तियों की प्रकृति में स्मरणीय बातें: (1) राजा-राज्यों के पतन अक्सर परमेश्वर की योजनाओं के अनुरूप होते हैं; (2) देशों की सीमाओं का नियंत्रण ईश्वर की इच्छा के अनुसार निर्धारित होता है।