Old Testament
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जकर्याह 1:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
दारा के राज्य के दूसरे वर्ष के आठवें महीने में जकर्याह भविष्यद्वक्ता के पास जो बेरेक्याह का पुत्र और इद्दो का पोता था, यहोवा का यह वचन पहुँचा (एज्रा. 4:24, 5:1)
जकर्याह 1:1 पद-दर-पद बाइबल टीका
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जकर्याह 1:1 समानांतर पद और संबंधित वचन
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एज्रा 4:24 (HINIRV) »
तब परमेश्वर के भवन का काम जो यरूशलेम में है, रुक गया; और फारस के राजा दारा के राज्य के दूसरे वर्ष तक रुका रहा।

लूका 11:51 (HINIRV) »
हाबिल की हत्या से लेकर जकर्याह की हत्या तक जो वेदी और मन्दिर के बीच में मारा गया: मैं तुम से सच कहता हूँ; उसका लेखा इसी समय के लोगों से लिया जाएगा। (उत्प. 4:8, 2 इति. 24:20-21)

जकर्याह 1:1 का प्रवचन—एक प्रेरक उपक्रम और आशा की पहचान
यहाँ एक नई दिशाबोध की शुरुआत मिलती है—यहोवा का संदेश, ताज़ा दृष्टि के साथ, बंधे समय में नहीं बल्कि पुनर्निर्माण के लिए; यहोवा का पवित्र बुलावा है कि चुकाए हुए समय के बाद भी उसकी चॉंच में नया सृजन संभव है। जकर्याह ने दारा के राज्य के दूसरे वर्ष के आठवें महीने में भविष्यद्वक्ता के रूप मेंाधार दिया, और यह वचन इक्का-दुक्का व्यक्तियों के लिए नहीं, बल्कि जिनके दिलों में राष्ट्र के पुनर्निर्माण की कामना है, उनके लिए है।
Verse के बारे में पंक्तियाँ
यह verse दर्शाता है कि परमेश्वर ने अपने भविष्यवक्ता जकर्याह को बुलाकर संदेशवाहक बनाया। यह उल्लेख करता है कि वह दारा के शासनकाल की स्थिति के समय भेजे गए—यानी एक ऐतिहासिक तिथि में, परंतु परमेश्वर की दृष्टि समय-सीमा से परे है। यह संकेत है कि God के योजना में वास्तविक परिवर्तन हर समय संभव है, भले ही राजनीतिक परिस्थितियाँ कठिन क्यों न हों।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
अनुरूप तुलनात्मक पथ
कुछ अन्य पुराने वाचक पाठ जहाँ परमेश्वर का समय और बुलावा महत्त्वपूर्ण होते हैं: - दाऊद के समय और बंधन के भीतर भी परमेश्वर अपने योजनाओं को लागू करते हैं (उद्धृत संदर्भों का उल्लेख बिना पूर्ण पाठ के)।
इन संदर्भों से संज्ञान मिलता है कि समय कितना भी कठिन क्यों न हो, परमेश्वर के संदेश की आवश्यकता और उसकी सत्ता अडिग रहती है, और भक्त उस दिशा में आगे बढ़ते हैं जहाँ परमेश्वर उनकी आवाज़ सुनता और मार्गदर्शित करता है।
आध्यात्मिक पाठ का व्यवहारिक प्रयोग
क्रॉस-रेफरेंसेज़ और उनका संक्षिप्त अर्थ
ये संदर्भ इस verse के साथ-साथ चलती प्रेरणा को पुष्ट करते हैं:
व्यावहारिक अनुप्रयोग
आज के पाठक इस verse से यह सीख सकेंगे कि—परमेश्वर के बुलावे में धरातलीय राजनीति या स्थितियाँ मायने नहीं रखतीं; विश्वासियों को हर समय और परिस्थिति में उनकी वाणी को पहचानकर आगे बढ़ना चाहिए। पुनर्निर्माण की प्रक्रिया में व्यक्तिगत और सामुदायिक पहल दोनों मूल्यवान हैं—हम भी उस बुलावे के अनुरूप सचेत और समर्पित होकर सेवा करें।
सारांश
जकर्याह 1:1 में यह स्पष्ट है कि परमेश्वर अपने समय के भीतर अपने संदेशवाहक को भेजते हैं ताकि इस्राइल और यहूदियों के पुनर्निर्माण के लिए आहुति दी जाए। एक व्यक्ति के बुलावे से भी बड़ा उद्देश्य होता है—यहोवा की योजनाओं का प्रकाश और आशा का पुनःजीवन। इस एक वचन से यह प्रकट होता है कि परमेश्वर किसी भी परिस्थिति में भी अपनी शक्ति दिखाते हैं, जब लोग उसकी वाणी सुनकर विश्वासपूर्वक चलते हैं।
सूत्र-संदर्भनुसार उपलब्ध सार्वजनिक-डायमेंशन(commentaries) से यह सार निकला गया है; नीचे कोई विशिष्ट उद्धरण पूर्ण वाक्यों में नहीं दिया गया है ताकि मूल पाठ ही सुसंगत बना रहे।