Old Testament
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जकर्याह 1:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
“यहोवा तुम लोगों के पुरखाओं से बहुत ही क्रोधित हुआ था।
जकर्याह 1:2 पद-दर-पद बाइबल टीका
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जकर्याह 1:2 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यिर्मयाह 44:6 (HINIRV) »
इस कारण मेरी जलजलाहट और कोप की आग यहूदा के नगरों और यरूशलेम की सड़कों पर भड़क गई; और वे आज के दिन तक उजाड़ और सुनसान पड़े हैं।

विलापगीत 5:7 (HINIRV) »
हमारे पुरखाओं ने पाप किया, और मर मिटे हैं; परन्तु उनके अधर्म के कामों का भार हमको उठाना पड़ा है।

भजन संहिता 79:5 (HINIRV) »
हे यहोवा, कब तक*? क्या तू सदा के लिए क्रोधित रहेगा? तुझ में आग की सी जलन कब तक भड़कती रहेगी?
जकरियाह 1:2 का अर्थ 今
यहोवा ने अपने लोगों के पुरखाओं के प्रति गहरी क्रोध की स्थितसी दिखाई थी, जो पापों और अविश्वास के कारण परमेश्वर के अन्यायपूर्ण क्रोध को आकर्षित कर रहा था। इस वाक्य का मतलब है कि परमेश्वर की नाराज़गी उनके पापों के कारण तीखी हो गई थी, और यह चेतावनी देता है कि यद्यपि उसने अपने दया-प्रिय प्रेम के साथ बुलंदा किया, पर पाप का परिणाम उसे शांत नहीं कर सका।
प्रसंग-परिप्रेक्ष्य
होज़ूर के समान, यिर्मयाह की तरह, जकरियाह का समय बर्तमान इजराइल के लौटे हुए यहूदियों के दौर का है—बादशाह धमाख और बाबुल से लौटने के पश्चात समय। ईश्वर के पास उनके पूर्ववर्तियों के पापों की स्मृति है, और यह स्मृति उन्हें इस समय यहूदियों के लिए एक चेतावनी के रूप में प्रस्तुत करती है कि पाप की आदतें यहाँ तक कि निवृत्ति के बाद भी खतरे का कारण बन सकती हैं।
व्याख्यात्मक अवलोकन
थीमेटिक बिंदु
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में)
- वही धारा जहाँ पाप और पश्चात्ताप की आवश्यकता बताई गई है (उदा., पाप पर ईश्वर की प्रतिक्रिया का विचार).
- आस्था के साथ लौटना और उद्धार का पुनरुद्धार (पुनरुत्थान की प्रेरणा के संदर्भ)।
- परमेश्वर की वाचा के अनुसार लोगों की नीयत और कर्मों की जाँच।
व्यावहारिक takeaway
हम सभी को याद रखना चाहिए कि परमेश्वर की क्रोध उनके पाप के कारण आता है, पर वह सदा दया के साथ लौटने के मार्ग खोलता है। सच्ची पश्चात्ताप और विश्वास से ही हम पुनः सच्ची सहजता और जीवन की उम्मीद पा सकते हैं।
इतिहासिक-तद्भावगत संदर्भ (संक्षेप)
जकरियाह के दिन लौटे हुए यहूदियों के लिए यह संदेश था कि वे अपने पूर्व पापों के कारण हुई असफलताओं से सीखें और एक बार फिर से परमेश्वर के नियमों के अनुरूप चलें। यह नया चरण उनकी आस्था, पूजा और समुदायिक निष्ठा के पुनर्निर्माण की ओर संकेत करता है।
संदर्भ संकेत
1) पुराने पाप और दया के साथ संतुलित न्याय; 2) लौटना और सुधारना; 3) परमेश्वर की वाचा के अनुरूप जीवनयापन।
यह पाठ हमें स्मरण कराता है: ईश्वर की नाराज़गी तब होती है जब लोग सत्य से दूर होते हैं; परन्तु चिरकालिक प्रेम और न्याय के साथ वह पुनःस्थापना का मार्ग खोलते हैं, ताकि विश्वासी समुदाय पुनः एकता और पवित्रता की ओर बढ़े।