Old Testament
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जकर्याह 3:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
फिर यहोवा ने यहोशू महायाजक को यहोवा के दूत के सामने खड़ा हुआ मुझे दिखाया, और शैतान उसकी दाहिनी ओर उसका विरोध करने को खड़ा था।
जकर्याह 3:1 पद-दर-पद बाइबल टीका
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जकर्याह 3:1 समानांतर पद और संबंधित वचन
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प्रकाशितवाक्य 12:9 (HINIRV) »
और वह बड़ा अजगर अर्थात् वही पुराना साँप*, जो शैतान कहलाता है, और सारे संसार का भरमानेवाला है, पृथ्वी पर गिरा दिया गया; और उसके दूत उसके साथ गिरा दिए गए। (यूह. 12:31)

भजन संहिता 109:6 (HINIRV) »
तू उसको किसी दुष्ट के अधिकार में रख, और कोई विरोधी उसकी दाहिनी ओर खड़ा रहे।

1 पतरस 5:8 (HINIRV) »
सचेत हो*, और जागते रहो, क्योंकि तुम्हारा विरोधी शैतान गर्जनेवाले सिंह के समान इस खोज में रहता है, कि किसको फाड़ खाए।
जकर्याह 3:1 का महत्व
यह पद यह दिखाता है कि परमेश्वर अपने उच्च प्रचारक काम के बीच भी वास्तविक संघर्ष को सामने लाते हैं। घर-घर की मन्दिर-यात्रा में यहहूशू महायाजक और यहोवा के दूत के बीच एक दृश्य संघर्ष का चित्र है, जहाँ शैतान उसकी दाहिनी ओर खड़ा होता है ताकि उसकी हार-हार लेकर उसे निराश करे। यह स्पष्ट करता है कि पवित्र कार्य में सद्गत मार्ग के साथ-spiritual बाधाएं भी आती हैं, लेकिन परमेश्वर की स्वीकृति और उसकी दया सिक्योर करती है।
पार्श्व संदर्भ और मूल संदर्भ
हिज्जक शब्दों में यह दृश्य यह बताता है कि यहोशू महायाजक एकegnaic भूमिका में है, और वह शैतान के आरोपों के सामने खड़ा है। यह यह दर्शाता है कि पवित्र उद्देश्य, येसु मसीह की भविष्यवाणी नहीं बल्कि पुरानी व्यवस्था के भीतर भी, शैतान के आरोपों के विरुद्ध ईश्वर के समर्थन से चलता है। साथ ही यह दिखाता है कि दायित्वपूर्ण नेता किन-किन परीक्षाओं से गुजरते हैं, और कैसे परमेश्वर उनके साथ है।
मुख्य संदेश
महत्वपूर्ण इतिहासिक/टिप्पणियाँ
यहाँ आदर्श तत्त्व क्रिस्टोलॉजी के साथ जुड़ते हैं: शैतान का आरोप एक संकेत है कि हमारे काम के पीछे आत्मा-यात्रा और परमेश्वर के उद्देश्य दोनों एक साथ चलते हैं। यह दृश्य यह भी संकेत करता है कि नेतृत्व और पवित्र सेवा में दिव्य स्वीकृति अनिवार्य है—न कि मानवीय प्रणाली से मात्र ठहराव।
क्रॉस-रेफरेंस
- मरकुस 9:24 के भाव: मनुष्य के लिए संभव नहीं पर प्रभु के साथ सम्भव है; यहोशू की स्थिति में भी यह सिद्धांत लागू होता है, कि परमेश्वर के साथ शक्ति मिले तो शत्रु पर अधिकार होता है।
- दानिय्येल 10:13: शक्तिशाली राजाओं के विरुद्ध संघर्ष—पर परमेश्वर की सहायता से विजय संभव है; यहोशू के लिए भी यही संदेश है कि आशीष के पीछे राज्य-चिंतन हैं।
- याकूब 4:7: परमेश्वर की कृपा पाने के लिए शत्रु के विरुद्ध आत्म-समर्पण और प्रतिशोध के स्थान पर ईश्वर की आज्ञा का मान रखना आवश्यक है।
इन क्रॉस-रेफरेंसेस की छोटी-सी व्याख्या यह बताती है कि प्रत्यक्ष संघर्षों के बीच भी इन से प्रेरणा मिलती है कि परमेश्वर अपनी योजना की पूर्ति में खड़ा रहता है।
व्यावहारिक दार्शनिक-आत्मिक सोच
हम जब अपनी सेवाओं में शत्रु-आरोपों का सामना करते हैं, तब याद रखें कि यह संघर्ष प्रभुईय योजना का भाग है। यहोशू की तरह हम भी अपनी भूमिका में साहस बनाए रखें; परमेश्वर हमारे साथ है, और उसकी स्वीकृति से ही हमारा दायित्व सफल होता है।
देवotional reflection
आज हम अपने जीवन के बगीचे में, अपने दायित्वों के सामने खड़े हों तो स्मरण रखें कि शैतान विरोध करता है, पर प्रभु की दया और सहायता अधिक गहराई से हमारे साथ है। चाहे हम कितने भी असमर्थ क्यों न लगें, परमेश्वर हमें सत्ता देता है और सच्चे पवित्र कार्य में बनाए रखता है।
महत्त्वपूर्ण उद्धरण: अगर आप Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के शब्दों से संक्षिप्त-सार खोज रहे हों, तो विचार करें कि उनके विवेचन शैतान के आरोप-बोध पर प्रभु की रक्षा की महत्ता पर ज़ोर देते हैं। (उक्त उद्धरणs प्रासंगिक टिप्पणियाँ पाठ के साथ एकीकृत हैं।)