Old Testament
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जकर्याह 3:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब यहोवा ने शैतान से कहा, “हे शैतान यहोवा तुझको घुड़के! यहोवा जो यरूशलेम को अपना लेता है*, वही तुझे घुड़के! क्या यह आग से निकाली हुई लुकटी सी नहीं है?” (रोम. 8:33)
जकर्याह 3:2 पद-दर-पद बाइबल टीका
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जकर्याह 3:2 समानांतर पद और संबंधित वचन
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आमोस 4:11 (HINIRV) »
“मैंने तुम में से कई एक को ऐसा उलट दिया, जैसे परमेश्वर ने सदोम और गमोरा को उलट दिया था, और तुम आग से निकाली हुई लकड़ी के समान ठहरे; तो भी तुम मेरी ओर फिरकर न आए,” यहोवा की यही वाणी है।

यहूदा 1:9 (HINIRV) »
परन्तु प्रधान स्वर्गदूत मीकाईल ने, जब शैतान से मूसा के शव के विषय में वाद-विवाद किया, तो उसको बुरा-भला कहके दोष लगाने का साहस न किया; पर यह कहा, “प्रभु तुझे डाँटे।”

रोमियों 8:33 (HINIRV) »
परमेश्वर के चुने हुओं पर दोष कौन लगाएगा? परमेश्वर वह है जो उनको धर्मी ठहरानेवाला है।
जकरिया 3:2 पर तात्पर्य और संदर्भ
यह वचन यहोवा के मुकुट-पुरुषों के बीच शैतान द्वारा यरूशलेम के गौरव के विरुद्ध उठने वाले आरोपों की कहानी में आता है। यरूशलेम के प्रधान पुजारी जिन्हें यशायाह और हज़ारों वर्षों के इतिहास में भ्रष्टाचार से मुक्त होना चाहिए था, उस समय का दृश्य सामने लाता है: शैतान उनका आरोप लगाकर बोझिल करता है, परन्तु यहोवा स्पष्ट करता है कि उन पर प्रभु का सुरक्षा-आच्छादन है। यह प्रेरित करता है कि धर्मी के विरुद्ध चलने वाले आरोप भी परमेश्वर की कृपा और स्मृति-चिन्हों से संतुलित होते हैं।
मुख्य अर्थ
शैतान का आरोप अस्थायी है; यहोवा का उद्देश्य शुद्धता और नियुक्ति है। यहोवा कह रहा है कि यरूशलेम को अपने ही हाथों में लेने वाला वह है, जो उसे आग से निकाले हुए लुक्के जैसे बचाकर निकालता है। यहाँ आग से बचना एक उद्धारकर्ता-परिमार्जन का संकेत है: परमेश्वर अपने चुनावित लोगों को दोषों से बचाकर, अतीत की लज्जा के बावजूद उनकी जिम्मेदारी को पुनः स्थापित करता है।
दो-तीन प्रमुख विषय
अनजाने संदर्भों से सम्बद्ध पाठ
रोम 8:33 का उल्लेख यहाँ यह दर्शाता है कि उद्धार और पाप से मुक्ति का निर्णय परमेश्वर के विरुद्ध हमारे लिए है; यह उद्धारकर्ता की रक्षा के बिना संभव नहीं। एक समान विचार “जो पहले से चुना गया है, उसे कौन दोष दे सकता है?” जैसी धारणा के साथ जुड़ता है।
यशायाह-3 या अन्य पुरानी प्रेरितियों में पाप के विरुद्ध ईश्वर के न्याय और उद्धार की गवाही मिलती है—परन्तु यहाँ उसकी कृपा सबसे दबदबे में है।
पढ़न की छोटी-सी व्यावहारिक बात
हममें से जो भी आलोचना या दोष-लांछन से घिरे हों, उन्हें यह स्मरण रहे कि परमेश्वर का बुलावा और सुरक्षा उन पर है जो उसकी पवित्रता के अनुरूप रहते हैं। यह सूरज की तरह है जो अंधेरों में भी अपनी रोशनी बनाए रखता है।
संक्षिप्त संदर्भ-चिंतन
- यशायाह 41:10: परमेश्वर की सहायता और तक़दीर के स्मरण से डर दूर होता है।
- रोम 8:33-34: उद्धार के लिए कौन आरोप लगा सकता है? जवाब—हमारे पिता ईश्वर, जो मसीह येशु के द्वारा हमें justify करता है।
- जकरिया 2:8: जो यहूदा को चुनता है, वही उसे पवित्र बनाता है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
जकरिया 3:2 में यहोवा शैतान के आरोपों को नाकाम बनाते हुए यह कहता है कि यहरूशलेम की रक्षा और purification उसका उद्देश्य है। यह शब्द हमें स्मरण कराते हैं कि परमेश्वर की कृपा, उसकी चयनित योजना और उद्धार की सुरक्षा हर आरोप से ऊपर है।
उद्धृत टिप्पणीकारों से संक्षेप संकेत (केवल संक्लित उद्धरणों के रूप में):
Matthew Henry: " ..."
Albert Barnes: " ..."
Adam Clarke: " ..."