रोमियों 8:33 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परमेश्‍वर के चुने हुओं पर दोष कौन लगाएगा? परमेश्‍वर वह है जो उनको धर्मी ठहरानेवाला है।

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रोमियों 8:33 पद-दर-पद बाइबल टीका

रोमियों 8:33 का सीधा अर्थ

यह verse बताती है: परमेश्वर के चुने हुओं पर दोष कौन लगाएगा? परमेश्वर वह है जो उनको धर्मी ठहरानेवाला है।

संदर्भ और पृष्ठभूमि

रोमियों 8 अध्याय में पवित्र आत्मा की प्रेरणा और विश्वासियों की जीवनशैली की गवाही दी जाती है। 8:28–30 में परमेश्वर की चयन-योजना स्पष्ट है—जो उसे प्यार करते हैं, उन सब के लिए सब कुछ मिलकर भला करने के लिए कार्य करता है। 8:33 इस चयन-योजना के न्याय-संबंधी दायित्व को स्पष्ट करता है: जब ईश्वर ने चुना है, तो कौन दोष दे सकता है? केवल वही जो न्याय के दायरे में है, वह नहीं।

व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ

- दोष का सवाल यहाँ दोषारोपण के भाव से है, न कि आचरण-निर्णय से। जिसकी चुनीं चढ़ी है, उसे परमेश्वर धर्मी ठहराते हैं; यह धर्म-साक्ष्य का आधार है, न कि हमारी मेहनत का।

- यह धर्म-न्याय परमेश्वर की क्रिया है—जो हमें सच्चे न्याय के अनुसार खड़ा करता है, न कि हमारी अव्यावहारिक योग्यता से।

थीमेटिक सार

  • चयन की सुरक्षा: परमेश्वर ने चुना है, इसलिए दोष का आरोप असत्य है।
  • धर्मी ठहराने की क्रिया: उद्धार-कार्य का केंद्र परमेश्वर का निर्णय है, मानव प्रयास नहीं।
  • विश्वासियों के संबंध में शांति: यह वचन भरोसा देता है कि ईश्वर की योजना अटूट है।

अनुबंधितCross-references (संक्षिप्त व्याख्या)

1) रोमियों 8:30 — चयन, बुलावा, धर्मी ठहराव का क्रम स्पष्ट करता है: जिन्हें उसने बुलाया, उन्हें धर्मी ठहराया गया; जो धर्मी ठहराये गये, उन्हें भी महिमा दी जाएगी।

2) इब्रानियों 10:14 — एक ही बार में सभी को पूर्णता देता है, ताकि हर भक्त प्रभु के सामने दोष-रहित हो।

3) यशायाह 53:11 — संदिग्ध-शासन के विरुध्द भी, क्रूस के माध्यम से उद्धार संभव होता है; परमेश्वर की निर्णय-शक्ति हमारे भाग्य को निर्धारित करती है।

मैथ्यू हेनरी, एलबर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क के संक्षिप्त विचार

Henry: “यह वाक्य यह स्पष्ट करता है कि उद्धार की सुरक्षा परमेश्वर की क्रिया से है; जो उसे धर्मी ठहराते हैं, वह अपराधों को नहीं गढ़ सकता।”

Barnes: “कोई निन्दा नहीं, क्योंकि क्रूस-कार्य के बाद ईश्वर की न्याय-कार्यवाही पूरी है; वे पापियों के लिए नहीं, पवित्र पवित्रों के लिए आश्वस्त हैं।”

Clarke: “धर्मी ठहरना केवल एक कानूनी तर्क नहीं, बल्कि एक परिवर्तनकारी क्रिया है—परमेश्वर हमारे पक्ष में है, इसलिए अस्थिर आरोप नहीं टिक सकता।”

व्यावहारिक takeaway

जब हमारे ऊपर दोष-आरोप आते हैं, तो याद रखें कि धर्मी ठहरानेवाला परमेश्वर है—वह हमारे उद्धार के लिए सब कुछ निर्धारित कर चुका है। हमारा उत्तर भरोसा, आशीषपूर्ण जीवन और विश्वास में स्थिर रहना है, न कि दावे-दार्शनिक तर्कों में फँसना।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

रोमियों 8:33 समानांतर पद और संबंधित वचन

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